- लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी को कुर्मी समेत कई ओबीसी जातियों के समर्थन से 37 सीटें मिली थीं
- भाजपा विधानसभा चुनाव के लिए ओबीसी वर्ग पर विशेष फोकस करते हुए सामाजिक समीकरण साधने की तैयारी कर रही है
- ओम प्रकाश राजभर, संजय निषाद, पूजा पाल जैसे नेता सपा पर गैर-यादव ओबीसी के लिए जगह न देने का आरोप लगा रहे हैं
लोकसभा चुनाव 2024 में अखिलेश यादव की सपा को 37 सीटें मिल गई थीं. इसकी वजह यह मानी गई थी कि कुर्मी समाज के साथ ही कई ओबीसी जातियों का समर्थन अखिलेश यादव के पक्ष में रहा है. इसके अलावा कई सीटों पर भाजपा की ओर से उतारे गए उम्मीदवारों का निजी तौर पर विरोध था. ऐसे में समाजवादी पार्टी को हर फैक्टर का सीधा फायदा मिला. अब भाजपा उस चुनाव से सबक सीखते हुए विधानसभा इलेक्शन के लिए तैयारी करती दिख रही है. खासतौर पर ओबीसी वर्ग पर उसका फोकस है. यादव बनाम अन्य ओबीसी की राजनीति वह सीधे तौर पर करती नहीं दिख रही है, लेकिन समीकरण उसी ओर बढ़ रहे हैं.
ओम प्रकाश राजभर, संजय निषाद, पूजा पाल जैसे नेता अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर ले रहे हैं. सपा नेता पर आरोप लगा रहे हैं कि आपकी पार्टी में गैर-यादव ओबीसी के लिए कोई जगह नहीं है. इस तरह भाजपा ने ओबीसी वोटबैंक की अखिलेश यादव की राजनीति में सेंध लगाने की कोशिश की है. यही नहीं सामाजिक समीकरण भी साधे जा रहे हैं. नितिन नवीन ने लखनऊ के दो दिनों के दौरे पर कहा था कि हम सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. यह एक लाइन साफ संकेत थी कि भाजपा किसी भी तरह के खींचतान को बढ़ाना नहीं चाहती.
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भाजपा के पास यूपी में जो सहयोगी दल हैं, वह भी उसके पक्ष में सामाजिक समीकरण तैयार करते हैं. जैसे ओमप्रकाश राजभर को साथ लाने से राजभर वोट मिल सकते हैं तो वहीं संजय निषाद के जरिए मल्लाह राजनीति को साधा जा सकता है. पूजा पाल सपा से आई हैं और अब प्रदेश उपाध्यक्ष हैं. यूपी में पाल वोटों की अच्छी संख्या है. इसी को ध्यान में रखकर सपा ने श्याल लाल पाल को प्रदेश अध्यक्ष ही बना रखा है. हालांकि वह बहुत चर्चित नहीं हैं. ऐसे में पूजा पाल के जरिए भाजपा जातीय समीकरण साधना चाहती है. पूजा पाल ऐसा नाम हैं, जिनकी चर्चा आते ही अतीक अहमद का भी ध्यान आता है. अतीक अहमद पर पूजा पाल के पति राजू पाल की हत्या का आरोप था.
पूजा पाल से क्यों हैं भाजपा को इतनी ज्यादा उम्मीदें
योगी आदित्यनाथ सरकार के दौर में मारे गए अतीक अहमद का नाम आते ही ध्रुवीकरण का भी माहौल बनता है. ऐसे में पूजा पाल एक नाम और कई काम वाली नेता हैं. यही नहीं लोधी समाज के कई नेता भाजपा के साथ हैं तो वहीं कुर्मी समाज से प्रदेश अध्यक्ष ही बना दिए गए हैं. पंकज चौधरी गोरखपुर बेल्ट के कुर्मी नेता हैं. पूर्वांचल और अवध में इस समाज की अच्छी आबादी है. इसके अतिरिक्त अनुप्रिया पटेल भी साथ ही हैं. यही नहीं भाजपा ने पिछड़ा समीकरण को साधने के लिए यूपी के 6 जोन के अध्यक्ष में से 4 ओबीसी वर्ग के बनाए हैं.
गुर्जर को बनाया क्षेत्रीय अध्यक्ष, प्रदेश की टीम में भी चांस
गुर्जर समाज में महाराजा मिहिर भोज की प्रतिमा को लेकर हुए विवाद के चलते कुछ असंतोष था. उसे समाप्त करने के लिए भाजपा ने नवाब सिंह नागर को पश्चिम यूपी का अध्यक्ष बनाया है. इसके अलावा भी दो अन्य नेताओं को प्रदेश की टीम में मौका दिया है. इस तरह भाजपा चुनाव से पहले ओबीसी वर्ग की सभी प्रमुख जातियों को अपने स्तर पर साधने की कोशिश में जुटी है.
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