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डंकी रूट का खौफनाक सच... अजरबैजान में किडनैप गुजरात के युवक-युवती की इनसाइड स्‍टोरी

मुंबई के एजेंटों ने अमेरिका भेजने के झांसे में गुजरात के युवक-युवती को अजरबैजान में बंधक बनाकर 65 लाख रुपये फिरौती वसूली, सांसद की पहल से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हुई.

डंकी रूट का खौफनाक सच... अजरबैजान में किडनैप गुजरात के युवक-युवती की इनसाइड स्‍टोरी
  • आणंद जिले के युवक-युवती को अमेरिका भेजने का झांसा देकर अजरबैजान में करीब दस दिन तक बंधक बनाया गया था
  • आरोपियों ने परिवार से करीब पैंसठ लाख रुपये की फिरौती वसूलने के बाद भी दोनों को मुक्त नहीं किया था
  • सांसद मितेशभाई पटेल ने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से संपर्क कर दोनों की सुरक्षित वापसी में मदद की
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आणंद:

गुजरात के आणंद जिले से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला उस समय राहत भरी खबर में बदल गया, जब अजरबैजान में बंधक बनाए गए युवक और युवती आखिरकार सुरक्षित भारत लौट आए. रविवार देर रात से जारी इंतजार के बाद दोनों सोमवार सुबह वडोदरा एयरपोर्ट पहुंचे, जहां परिवारजनों से मिलन के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले. मुंबई के एजेंटों ने युवक-युवती को अमेरिका भेजने के नाम पर डंकी रूट का ऑफर दिया और अजरबैजान भेज दिया. 

अमेरिका भेजने के नाम पर अंतरराष्ट्रीय गिरोह द्वारा फंसाए गए

आणंद के युवक-युवती को करीब 10 दिनों तक अजरबैजान में बंधक बनाकर रखा गया था. इस दौरान अपहरणकर्ताओं ने परिजनों से करीब 65 लाख रुपये की फिरौती वसूल की थी. आरोपियों ने दोनों को वाया अजरबैजान-कनाडा होते हुए अमेरिका भेजने का लालच दिया था, लेकिन बाद में उन्हें बंधक बनाकर मारपीट और धमकियों के जरिए पैसे ऐंठे गए.

एयरपोर्ट पर भावुक मुलाकात

सोमवार सुबह जैसे ही दोनों युवक-युवती वडोदरा एयरपोर्ट पहुंचे, वहां मौजूद परिजनों और स्थानीय लोगों की आंखें नम हो गईं. लंबे समय बाद अपने बच्चों को सुरक्षित देखकर परिवारजनों ने उन्हें गले लगा लिया. एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों ने भी इस भावुक पल को देखा और राहत की सांस ली. इस दौरान आणंद के सांसद मितेशभाई पटेल भी एयरपोर्ट पहुंचे और दोनों से मुलाकात की. सांसद ने पूरे घटनाक्रम के दौरान विदेश मंत्रालय से लगातार संपर्क बनाए रखा था.

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सांसद की पहल से मिली मदद

बताया जा रहा है कि जैसे ही युवक-युवती के बंधक बनाए जाने की जानकारी सामने आई, सांसद मितेशभाई पटेल ने तुरंत विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से संपर्क साधा. उनकी सक्रियता और सतर्कता के चलते विदेश मंत्रालय और अजरबैजान स्थित भारतीय दूतावास ने स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर दोनों को बंधन से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई. सांसद मितेशभाई पटेल ने कहा, 'यह बेहद गंभीर मामला था. जैसे ही जानकारी मिली, हमने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया और लगातार फॉलोअप किया. हमारी प्राथमिकता थी कि दोनों को सुरक्षित भारत वापस लाया जाए.'

डंकी रूट से अमेरिका भेजने का झांसा

मामले की शुरुआती जानकारी के अनुसार, मुंबई के एजेंटों ने युवक-युवती को अमेरिका भेजने के नाम पर डंकी रूट का प्रस्ताव दिया था. बेहतर भविष्य और विदेश में नौकरी के लालच में दोनों उनके झांसे में आ गए. आरोपियों ने उन्हें अज़रबैजान ले जाकर बंधक बना लिया और परिजनों को वीडियो कॉल के जरिए धमकाकर पैसे वसूले. परिवारजनों से लाखों रुपये वसूलने के बाद भी दोनों को नहीं छोड़ा गया, जिसके बाद मामला सामने आने पर प्रशासन हरकत में आया और बचाव अभियान शुरू हुआ.

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प्रशासन की चेतावनी

इस घटना ने एक बार फिर अवैध तरीके से विदेश भेजने वाले गिरोहों के खतरनाक नेटवर्क को उजागर कर दिया है. प्रशासन ने युवाओं और अभिभावकों से अपील की है कि विदेश जाने के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों और वैध प्रक्रियाओं का ही सहारा लें. फिलहाल दोनों युवक-युवती सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं और परिवार के साथ हैं. इस पूरे घटनाक्रम ने जहां एक ओर परिवार को भय और दर्द दिया, वहीं सुरक्षित वापसी ने राहत और खुशी का माहौल भी पैदा कर दिया है. 

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