हिमाचल प्रदेश में बीजेपी के कई विधायक इस बार के चुनाव में उम्मीदवार नहीं होंगे, और न ही अन्य पार्टियों से आए लोगों के लिए टिकट आसान होगा. एनडीटीवी सूत्रों के मुताबिक सत्तारूढ़ दल के आंतरिक सर्वेक्षण में ये बात सामने आयी है. विधानसभा की 68 सीटों में से, 59 के लिए नामों की घोषणा कुछ दिनों के भीतर की जा सकती है. इसको लेकर आज दिल्ली के हरियाणा भवन में बैठक हुई है. हिमाचल प्रदेश में मतदान 12 नवंबर को जबकि मतगणना 8 दिसंबर को होगी.
भाजपा ने 2017 में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर हिमाचल प्रदेश में 44 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की थी.
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अपने आंतरिक चुनाव में, भाजपा ने प्रत्येक खंड के लिए ब्लॉक स्तर के सदस्यों से तीन वरीयताएं मांगीं. शिमला, कांगड़ा, मंडी और हमीरपुर में गुप्त मतदान द्वारा मतदान हुआ और दिल्ली में मतगणना हुई, जहां भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति अंतिम निर्णय लेगी. सूत्रों ने कहा कि पोल में कुछ ऐसे नाम सामने आए जो पार्टी के रडार पर भी नहीं थे.

15 सदस्यीय चुनाव समिति का नेतृत्व पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा करते हैं, जो हिमाचल में पूर्व मंत्री हैं, और इसमें पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित शीर्ष नेता शामिल हैं.
सूत्रों ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से दो बिंदु बनाती है, अलोकप्रिय मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट नहीं दिया जाना चाहिए और दलबदलुओं को खारिज कर दिया जाना चाहिए. यह संभव है कि कुछ विधायकों को अपनी सीट बदलने के लिए कहा जाए, जबकि कुछ वरिष्ठ विधायकों को अगली पीढ़ी को सत्ता सौंपने के लिए कहा जाए.

जेपी नड्डा के दिल्ली स्थित आवास पर सोमवार रात हिमाचल कोर ग्रुप की बैठक हुई, जिसमें अमित शाह की मौजूदगी में नामों पर चर्चा हुई.

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा है कि उन्हें सत्ता बरकरार रखने का भरोसा है. उन्हें पिछली बार यह शीर्ष पद मिला था क्योंकि प्रचार का मुख्य चेहरा होने के बावजूद अनुभवी प्रेम कुमार धूमल चुनाव हार गए थे.
पिछले कुछ हफ्तों से चल रही खबरों में कहा गया है कि धूमल के इस बार चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है. उनके बेटे अनुराग ठाकुर हमीरपुर से सांसद हैं और केंद्रीय मंत्री भी हैं.
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