ज्ञानवापी मस्जिद-शृंगार गौरी मामला : वाराणसी कोर्ट आज कथित 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग को लेकर सुनाएगा फैसला

मस्जिद पक्ष की दलील है कि वहां “शिवलिंग” नहीं फ़व्वारा है. पांच में से एक हिंदू पक्षकार ने कथित “शिवलिंग” का वैज्ञानिक परीक्षण का विरोध किया. दोपहर दो बजे के बाद कोर्ट फैसला सुना सकता है.

ज्ञानवापी मस्जिद- शृंगार गौरी मामले में वाराणसी कोर्ट आज ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पाए गए कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने को लेकर फैसला सुनाएगा. पांच में से चार पक्षकारों ने कथित शिवलिंग की ASI द्वारा वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की थी. 29 सितंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. मस्जिद पक्ष की दलील है कि वहां “शिवलिंग” नहीं फ़व्वारा है. पांच में से एक हिंदू पक्षकार ने कथित “शिवलिंग” का वैज्ञानिक परीक्षण का विरोध किया. दोपहर दो बजे के बाद कोर्ट फैसला सुना सकता है.गौरतलब है कि 18 अगस्त, 2021 बनारस की पांच महिलाओं ने मिलकर वाराणसी कोर्ट में याचिका दायर कर साल भर शृंगार गौरी की पूजा करने की अनुमति मांगी. 

गौरतलब है कि ज्ञानवापी और श्रृंगार गौरी मंदिर मामले में नित्य दर्शन पूजन के अधिकार को लेकर जो याचिका दायर की गई थी, उसी पर सुनवाई हो रही है. वाराणसी की जिला अदालत ने उसकी मेंटेनेबिलिटी की दलीलें सुनने के बाद मुकदमा सुनने योग्य है का फैसला दिया था. उसके बाद से मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई ,लेकिन अभी मामला उस अर्जी पर चल रहा है जो पहले ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वे के दौरान वजू खाने में मिली एक आकृति को लेकर है. जिसे मस्जिद पक्ष के लोग फव्वारा मानते हैं और हिंदू पक्ष के लोग उसे आदि विश्वेश्वर शिवलिंग बता रहे हैं. 

हिंदू पक्ष की वादी संख्या 2 से 5 ने क्यों की कार्बन डेटिंग की मांग

 लिहाजा हिंदू पक्ष की तरफ से बनारस की वादी संख्या 2 से 5 की 4 महिलाओं के वकील विष्णु जैन और हरिशंकर जैन ने अदालत ने यह अर्जी लगाई थी कि इस विवाद को खत्म करने के लिए कि फव्वारा है या शिवलिंग. उसकी कार्बन डेटिंग करा ली जाए. 


क्यों है कार्बन डेटिंग का विरोध

 
बता दें कि यहीं पर हिंदू पक्ष की वादी संख्या एक राखी सिंह के वकील और विश्व वैदिक सनातन संस्था की तरफ से अदालत में एक अलग अर्जी लगा कर कार्बन डेटिंग का विरोध किया गया. हिंदू पक्ष की वादी संख्या एक राखी सिंह के वकील की दलील थी कि अगर किसी भी तरीके से शिवलिंग में कार्बन डेटिंग या दूसरी विधि से भी जांच कराई जाएगी तो शिवलिंग का क्षरण होगा. सैंपल लेने के लिए उसमें खरोंच होगा, जिससे शिवलिंग खंडित हो जाएगा और फिर खंडित शिवलिंग की पूजा नहीं हो पाएगी . राखी सिंह की तरफ से इसका अदालत में जमकर विरोध किया गया. 

कार्बन डेटिंग को लेकर अदालत ने किस किस पक्ष की दलील सुनी

 अदालत ने हिंदू पक्ष की वादी संख्या एक राखी सिंह की दलील हिंदू पक्ष की वादी संख्या 2 से 5 महिलाओं के वकील की दलील और अंजुमन इंतजा मियां मसाजिद कमेटी की उस दलील जो कार्बन डेटिंग के खिलाफ है. सभी की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिस पर 7 तारीख को वह इस पर अपना निर्णय सुना सकते हैं.

जानकार कहते हैं कार्बन डेटिंग को लेकर अदालत के सामने खुले हैं कई विकल्प

अदालत के इस फैसले को लेकर जानकार वकील कहते हैं कि अदालत इसमें कार्बन डेटिंग की इजाजत दे सकती है या किसी दूसरी विधि से उसकी जांच की बात कह सकती है या इस पर कोई एक्सपर्ट की राय ले सकती है या इस एप्लीकेशन को खारिज भी कर सकती है. यह सब उसके अपने विवेक पर है.

राखी सिंह और विश्व वैदिक सनातन संस्था में क्या है संबंध और क्यों है आपस में विवाद

विश्व वैदिक सनातन संस्था से राखी सिंह जुड़ी हैं और उन्होंने यह मुकदमा नित्य दर्शन पूजन का दायर किया था.  यह मुकदमा भी राखी सिंह बनाम सरकार है साथ में उसमें बनारस की चार और महिलाएं जुड़ीं. शुरू में यह सभी पांचों महिलाएं एक साथ थीं, लेकिन बाद में कुछ मुद्दों पर अलग हुईं और एक-दूसरे पर आरोप लगने लगा कि इस मुकदमे को कमजोर करने के लिए यह लोग किसी और से मिल गए हैं. बनारस की चार महिलाओं और उनके वकील ने राखी सिंह और विश्व अधिक सनातन संस्था पर आरोप लगाया कि वह लोग इन महिलाओं से पावर ऑफ अटॉर्नी लेकर इस मुकदमे से हटने की बात कह रहे थे तो विश्व वैदिक सनातन संस्था का मानना है कि वह कभी मुकदमे से अलग होने की बात नहीं कर रहे थे. बनारस की चार महिलाएं और उनके वकील कुछ और लोगों से मिलकर इस पूरे मुकदमा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. 

अगर अदालत से एक कार्बन डेटिंग के पक्ष में फैसला आता है तो क्या कदम उठाएंगे 

हिंदू पक्ष में कार्बन डेटिंग को लेकर यह बिखराव बढ़ा हुआ है. हिंदू पक्ष की वादी संख्या 1 राखी सिंह उनके वकील और विश्व वैदिक सनातन संस्था के अध्यक्ष संतोष सिंह कहते हैं कि अगर अदालत से कार्बन डेटिंग के पक्ष में फैसला आता है तो वह इसका भी विरोध करेंगे और कानूनी तौर पर वह ऊंची अदालत मैं जाएंगे.

अब तक इस केस में क्या-क्या हुआ

  • 26 अप्रैल/2022 को कोर्ट ने अजय मिश्रा को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी मस्जिद प्रांगण में शृंगार गौरी मंदिर का सर्वे करने के आदेश दिया था.
  • 6 मई, 2022 को कोर्ट कमिश्नर ने ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे का काम शुरू किया. 
  • 7 मई, 2022 मस्जिद पक्ष ने कोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए. 
  • 12 मई, 2022 को कोर्ट ने अजय मिश्रा को हटाने से मना कर दिया. साथ ही सर्वे के लिए दो और कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर दिए. 
  • 14 मई, 2022 को कोर्ट द्वारा नियुक्त सर्वे कमीशन ने ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे शुरू किया. 
  • 16 मई, 2022 को हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने में शिवलिंग होने की बात कही. मुस्लिम पक्ष ने इसे फव्वारा बताया. 
  • 16 मई, 2022 को कोर्ट ने वजूखाने को सील करने का आदेश दिया. 
  • 19 मई, 2022 : कोर्ट कमीशन ने ज्ञानवापी मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की

  • 19 मई, 2022 : मस्जिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट ने श्रंगार गौरी मंदिर में पूजा करने की याचिका पर सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी कोर्ट को 20 मई तक इस याचिका पर सुनवाई टालने का आदेश दिया.

  • 20 मई, 2022 :सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी जिला जज को शृंगार-गौरी मंदिर में पूजा करने की याचिका सुनने योग्य है या नहीं. ये फैसला करने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी कोर्ट को 8 हफ्तों में सुनवाई पूरी करने के आदेश दिए.

  • 24 अगस्त, 2022 : वाराणसी कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी हुई .

  • 12 सितंबर, 2022: वाराणसी कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका ख़ारिज की. कोर्ट ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर में मौजूद शृंगार गौरी मंदिर में पूजा करने की याचिका सुनने योग्य है.

  • 22 सितंबर,2022: हिंदू पक्ष के पांच में चार पक्षकारों ने वजूखाने में मिले कथित “शिवलिंग” के ASI द्वारा वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की. 

  • 29  सितंबर, 2022: वाराणसी कोर्ट ने कथित “शिवलिंग” के कार्बन डेटिंग कराने पर फ़ैसले को सुरक्षित रखा .

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    7 अक्टूबर, 2022: वाराणसी कोर्ट दोपहर 2 बजे के बाद कार्बन डेटिंग पर फ़ैसला सुना सकता है