गुजरात में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और एक समय में उनके वरिष्ठ रहे आर बी श्रीकुमार के बीच गुरुवार गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद हुए दंगों को लेकर वाकयुद्ध शुरू हो गया।
पूर्व पुलिस महानिदेशक श्रीकुमार ने आरोप लगाया है कि ‘परोक्ष अभिप्राय’ और सरकार के हितों के टकराव बचाने के उद्देश्य से भट्ट ने गोधरा कांड के बाद हुए दंगों पर चुप्पी साधे रखी।
श्रीकुमार ने आईपीएस अधिकारी को लिखे पत्र में उन पर सूचनाओं को दबाने और हेराफेरी करने के आरोप लगाते हुए उन्हें आड़े हाथ लिया। श्रीकुमार ने भट्ट पर साम्प्रदायिक दंगों की जांच कर रहे नानावती आयोग के समक्ष दिए अपने ही बयान का खंडन करने के आरोप लगाए।
दोनों अधिकारियों के बीच यह आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला तब शुरू हुआ जब श्रीकुमार ने बुधवार को आयोग के समक्ष हलफनामा दायर करके दंगों के नौ वर्षों बाद मोदी सरकार के खिलाफ बोलने के लिए भट्ट की ईमानदारी पर प्रश्न उठाये।
श्रीकुमार ने कहा कि वर्ष 2002 में दंगों के दौरान उन्होंने भट्ट (तत्कालीन डीसीपी) से आयोग के समक्ष हलफनामा दायर करने को कहा था लेकिन उन्होंने ऐसा अभी तक नहीं किया है। इसी तरह से डीजीपी की ओर से 2004 में फिर से अनुरोध किया गया था लेकिन भट्ट ने उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की।
This Article is From Dec 29, 2011
मोदी विरोधी दो पुलिस अधिकारियों के बीच वाकयुद्ध
निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और एक समय में उनके वरिष्ठ रहे आर बी श्रीकुमार के बीच गुरुवार गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद हुए दंगों को लेकर वाकयुद्ध शुरू हो गया।
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अहमदाबाद: