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खेल विकास निधि को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने दी सफाई, कहा- सिर्फ खेल सुविधाओं पर ही हो रहा है खर्च

सरकार का कहना है कि पिछले एक साल में कार्यकारी समिति ने ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी है, जो प्राथमिक खेल उद्देश्यों के साथ मेल नहीं खाते. निजी निवेश को भी बढ़ावा दिया गया है.

खेल विकास निधि को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने दी सफाई, कहा- सिर्फ खेल सुविधाओं पर ही हो रहा है खर्च
  • देश में खेलों को प्रोत्साहित करने वाले राष्ट्रीय खेल विकास निधि (एनएसडीएफ) के खर्च पर सवाल उठे हैं
  • सरकार ने कहा है कि विकास निधि से बने खेल संसाधन नौकरशाहों के लिए नहीं, बल्कि व्यापक जनता के लिए उपयोगी हैं
  • सरकार ने निधि की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए प्रशासनिक सुधार और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के उपाय किए हैं
नई दिल्ली:

देश में खेलों को प्रोत्साहित करने और ओलंपिक जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने के उद्देश्य से बनाई गई राष्ट्रीय खेल विकास निधि (एनएसडीएफ) पर सवाल उठ रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली के पॉश इलाकों जैसे विनय मार्ग और मोती बाग में नौकरशाहों के लिए खेल सुविधाएं तैयार करने में इस फंड का इस्तेमाल कर लिया गया. इसी तरह आरएसएस से जुड़े वनवासी कल्याण परिषद को भी इस फंड से मिली सहायता पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इन्हें लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है.

गौरतलब है कि पिछले पांच सालों में इस फंड के माध्यम से खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए 464.49 करोड़ रुपए खर्च किए गए. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन क्षेत्रों में आवंटित फंड का उद्देश्य खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है.

बुनियादी ढांचे का विस्तार

दस्तावेजों के अनुसार, सिविल सेवा अधिकारी संस्थान और न्यू मोती बाग निवासियों के कल्याण संघ जैसी संस्थाओं को लगभग 6.7 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया. सरकार का तर्क है कि इन केंद्रों पर निर्मित स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट और जिम जैसे संसाधन केवल अधिकारियों के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े कामकाजी और निवासी वर्ग के लिए हैं. यह फंड के मूल उद्देश्य के अनुसार है, जिसमें सामान्य रूप से खेलों को बढ़ावा देना और शारीरिक गतिविधियों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना शामिल है.

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कूटनीति में इस्तेमाल 

इसके अतिरिक्त, फंड का उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'ग्लोबल साउथ' देशों जैसे मालदीव, जमैका और सेंट विंसेंट को क्रिकेट उपकरण प्रदान करने के लिए भी किया गया. इसे खेल कूटनीति के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसके लिए अब राष्ट्रीय खेल महासंघ सहायता योजना में विशिष्ट प्रावधान किए गए हैं.

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में खेलों को प्रोत्साहन

मीडिया में वनवासी कल्याण परिषद को दिए गए फंड पर भी सवाल उठाए गए थे. इस पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया गया कि यह संगठन ग्रामीण और सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में स्वदेशी खेलों को बढ़ावा देने में सक्रिय है. इसी उद्देश्य से राजस्थान और छत्तीसगढ़ की इकाइयों को कुल मिलाकर लगभग 5.07 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, ताकि खेल प्रतिभाओं को जमीनी स्तर पर समर्थन मिल सके.

प्रशासनिक सुधार

पिछले पांच सालों (2021-2026) के आंकड़ों के अनुसार, NSDF ने कुल 464.49 करोड़ रुपये वितरित किए हैं. इसमें से एक बड़ा हिस्सा टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम यानी टॉप्स के तहत एलीट एथलीटों के प्रशिक्षण और बेंगलुरु, ग्वालियर व सोनीपत जैसे भारतीय खेल प्राधिकरण साई केंद्रों में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा बनाने पर खर्च किया गया है. वर्तमान में टॉप्स के माध्यम से लगभग 399 एलीट खिलाड़ियों को सहायता दी जा रही है. इसके अलावा एनएसडीएफ ने प्रख्यात खिलाड़ियों जैसे गोपीचंद, मैरीकॉम, पी टी ऊषा, अंजू बॉबी जॉर्ज, रोहन बोपन्ना आदि को एकेडमी स्थापित करने में भी मदद दी है.

निधि की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाए हैं. सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण करते हुए एनएसडीएफ में अब सीईओ, सीओओ और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट की नियुक्ति कर प्रशासनिक क्षमता बढ़ाई गई है. साथ ही, निगरानी पर जोर दिया गया है.

पिछले एक साल में कार्यकारी समिति ने ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी है, जो प्राथमिक खेल उद्देश्यों के साथ मेल नहीं खाते. निजी निवेश को भी बढ़ावा दिया गया है. कॉर्पोरेट और सरकारी कंपनियों से फंड जुटाने के लिए सीएसआर कॉन्क्लेव आयोजित किए जा रहे हैं. एनटीपीसी, इंडियन ऑयल और कोल इंडिया जैसे संस्थान अब तीरंदाजी, एथलेटिक्स और मुक्केबाजी जैसे खेलों को सीधा सहयोग दे रहे हैं.

सरकार का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेश का अधिकतम लाभ देश के उभरते हुए और एलीट खिलाड़ियों को मिले.

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