- आंध्र प्रदेश के कुरनूल के जोन्नागिरी गांव में लगभग 50 टन सोने का विशाल भंडार मिला है
- भारत अपनी वार्षिक सोने की आवश्यकता का लगभग 99 प्रतिशत विदेशों से आयात करता है
- वर्तमान में कर्नाटक, झारखंड और गुजरात के कुछ सीमित क्षेत्रों में ही सोने का उत्पादन होता है
आंध्र प्रदेश में मिले लगभग 50 टन के सोने के भंडार के बाद अब देश में एक बार फिर से खदान, भारत में उत्पादकता और आत्मनिर्भरता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. देश में मिले नए भंडार से गोल्ड इंपोर्ट पर देश की निर्भरता कम होने की उम्मीद जताई जा रही है. कुरनूल जिले के जोन्नागिरी गांव में मिले भंडार से आंध्र प्रदेश कुछ ही सालों में देश में सोने का सबसे बड़ा सप्लायर बन सकता है. जोन्नागिरी के अलावा चार अन्य संभावित जगहों की भी पहचान की गई है. इनमें रामागिरी, जव्वकुला और चिगुरुकुंटा बिस्नाटम शामिल हैं.
हालांकि, माइनिंग सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि आंध्र प्रदेश में मिले नए सोने के भंडार से आने वाले दिनों में देश की तस्वीर बदल सकती है. भारत में फिलहाल 880 टन गोल्ड रिजर्व है.

भारत में अभी कहां-कहां से सोना निकलता है?
भारत में सोने का उत्पादन मुख्य रूप से तीन राज्यों और सीमित खदानों तक ही सीमित है, इसमें सबसे बड़ा योगदान कर्नाटक की सरकारी कंपनी का है.
- कर्नाटक (हट्टी गोल्ड माइन्स): कर्नाटक के रायचूर में हट्टी गोल्ड माइन्स देश की एकमात्र प्रमुख और सबसे बड़ी सोने की खदान है. हालांकि भारी लागत और गहराई के कारण केजीएफ (KGF - कोलार गोल्ड फील्ड्स) 2001 से ही बंद पड़ी है.
- झारखंड (कुंदरकोचा और स्वर्णरेखा नदी): झारखंड राज्य की कुंदरकोचा खदान से भी सोना निकाला जाता है, हालांकि यहां बेहद कम मात्रा में उत्पादन होता है. साथ ही स्थानीय लोग पारंपरिक तरीके से स्वर्णरेखा नदी की रेत को छानकर मामूली सोना इकट्ठा करते हैं.
- गुजरात (बाय-प्रोडक्ट): गुजरात में हिंडालको के कॉपर स्मेल्टर में तांबा साफ करने के दौरान बाय-प्रोडक्ट के तौर पर सोने का उत्पादन किया जाता है.

गेम चेंजर बन सकता है आंध्र प्रदेश का 'जोन्नागिरी'
इस बीच आंध्र प्रदेश से एक अच्छी खबर सामने आई है. जोन्नागिरी में लगभग 50 टन सोने का एक विशाल भंडार चिन्हित होने और उसके उत्पादन की शुरुआत होने के बाद आयात को लेकर देश को एक बड़ी राहत मिल सकती है. फिलहाल भारत का खनन उत्पादन बेहद कम है.
सोना निकालना इतना मुश्किल क्यों?
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में चट्टानों से सोना निकालना बेहद जटिल और खर्चीला काम है. 1 टन कच्चे माल को प्रोसेस करने पर महज 1 से 2 ग्राम ही शुद्ध सोना निकल पाता है. यही कारण है कि बड़ा निवेश और टेक्नोलॉजी की कमी के कारण भारत में सोने का उत्पादन काफी धीमा है, हालांकि आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के नए ब्लॉक्स की नीलामी से उम्मीदें काफी बढ़ी हैं.
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