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बंगाल का 'सोना पप्पू' कांड: 40 करोड़ का घोटाला, हवाला और जमीन कब्जाने का खेल; ED के रडार पर 'खाकी' और 'खादी'

ईडी इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि इस गिरोह ने वसूली, जमीन कब्जाने, अवैध निर्माण और हवाला जैसे तरीकों से भारी मात्रा में काला धन जुटाया और फिर उसे अलग‑अलग माध्यमों से सफेद किया.

बंगाल का 'सोना पप्पू' कांड: 40 करोड़ का घोटाला, हवाला और जमीन कब्जाने का खेल; ED के रडार पर 'खाकी' और 'खादी'
  • ED ने कोलकाता में सोना पप्पू मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए.
  • जय एस. कमदार को गिरफ्तार किया गया है और उनसे पूछताछ के दौरान व्यापक हवाला नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है
  • जांच में सोना पप्पू की पत्नी को हथियार उपलब्ध कराने, राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों की संलिप्तता की आशंका सामने आई
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नई दिल्ली:

कोलकाता में सोना पप्पू केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच जैसे‑जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे‑वैसे एक बड़े और संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं. 26 अप्रैल 2026 को ईडी ने एक बार फिर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए शहर के तीन ठिकानों पर छापेमारी की. ये छापे सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार, जय एस. कमदार, डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रही जांच के तहत किए गए.

कार्रवाई के दौरान ईडी ने कल्याण शुक्ला और संजय कुमार कनोडिया के ठिकानों की तलाशी ली. यहां से 10 लाख रुपए नकद, सोने के आभूषण, कई अहम दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए. शुरुआती जांच में सामने आया है कि जब्त दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर नकद लेन‑देन के सबूत हैं, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं. खास बात यह है कि इन लेन‑देन में कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है.

कोलकाता और बैरकपुर में छह ठिकानों पर छापेमारी

इससे पहले 19 अप्रैल को ईडी ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जय एस. कमदार को गिरफ्तार किया था. फिलहाल वह 28 अप्रैल तक ईडी की हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि कमदार से पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं. उसी दिन ईडी ने कोलकाता और बैरकपुर में छह ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिनमें डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास और जय एस. कमदार के आवास भी शामिल थे.

हालांकि, जब ईडी की टीम डीसीपी शांतनु बिस्वास के घर पहुंची, तो वह वहां मौजूद नहीं मिले. इसके बाद ईडी ने उन्हें जांच में शामिल होने के लिए समन जारी किया, लेकिन अब तक वह एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं. इससे उनकी भूमिका को लेकर और सवाल खड़े हो गए हैं और माना जा रहा है कि ईडी उनके खिलाफ सख्त कदम उठा सकती है.

सोना पप्पू की पत्नी सोमा सोनार पोद्दार को हथियार उपलब्ध कराए थे

जांच में एक और बड़ा खुलासा यह हुआ है कि जय एस. कमदार का सोना पप्पू के साथ बेहद करीबी संबंध था और दोनों के बीच करोड़ों रुपए का लेन‑देन हुआ है. ईडी को यह भी जानकारी मिली है कि कमदार ने सोना पप्पू की पत्नी सोमा सोनार पोद्दार को हथियार उपलब्ध कराए थे. हालांकि, इस मामले में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, क्योंकि दोनों ने इस खरीद को लेकर चुप्पी साध रखी है.

ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि जय एस. कमदार कई शेल कंपनियों के जरिए एक बड़े हवाला रैकेट का संचालन कर रहा था. यह नेटवर्क न सिर्फ देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैला हुआ था, जिसके जरिए अवैध धन को एक जगह से दूसरी जगह भेजकर उसे सफेद किया जाता था. अब ईडी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है.

निर्दोष लोगों को फंसाकर उनकी जमीनों पर कब्जा करता था

सबसे बड़ा खुलासा कोलकाता से जुड़े एक एजुकेशनल ट्रस्ट को लेकर हुआ है, जहां से करीब 40 करोड़ रुपए की हेराफेरी के संकेत मिले हैं. ईडी के मुताबिक इस घोटाले में जय एस. कमदार की अहम भूमिका थी और उसने इस राशि को अलग‑अलग तरीकों से इधर‑उधर घुमाया. जांच में यह भी सामने आया है कि जय एस. कमदार का पुलिस के कुछ अधिकारियों के साथ गहरा संपर्क था, खासतौर पर डीसीपी शांतनु बिस्वास के साथ. ईडी को मिले सबूतों के मुताबिक कमदार इन अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों को महंगे तोहफे और सुविधाएं देता था. बदले में वह उनके प्रभाव का इस्तेमाल कर जमीन से जुड़े मामलों में फर्जी शिकायतें दर्ज कराता था और निर्दोष लोगों को फंसाकर उनकी जमीनों पर कब्जा करता था.

ईडी को मिले डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों से यह स्पष्ट हो गया है कि यह कोई मामूली गिरोह नहीं, बल्कि एक पूरी तरह संगठित सिंडिकेट है, जो सुनियोजित तरीके से जमीन कब्जाने, अवैध निर्माण कराने, वसूली और हवाला के जरिए धन को इधर‑उधर करने का काम कर रहा था.

ईडी ने क्या-क्या जब्त किए

इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को भी ईडी ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई की थी. उस दौरान करीब 1.47 करोड़ रुपए नकद, 67.64 लाख रुपए मूल्य के सोने‑चांदी के आभूषण, एक फॉर्च्यूनर गाड़ी और एक अवैध रिवॉल्वर बरामद किया गया था. इसके अलावा कई अहम दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए थे, जिनसे इस नेटवर्क की जड़ें और गहरी नजर आईं.

अब तक की जांच से ईडी इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि इस गिरोह ने वसूली, जमीन कब्जाने, अवैध निर्माण और हवाला जैसे तरीकों से भारी मात्रा में काला धन जुटाया और फिर उसे अलग‑अलग माध्यमों से सफेद किया. ईडी अब इस पूरे मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है और आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे व गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है.

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