- गृह मंत्री अमित शाह ने मादक पदार्थों को लेकर भारत के नशामुक्त राष्ट्र बनने के लक्ष्य की रूपरेखा पेश की
- भारत की सुरक्षा एजेंसियां मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए एक व्यापक रोडमैप के तहत काम कर रही हैं
- मादक पदार्थों के विरुद्ध लड़ाई में वैश्विक स्तर पर समान परिभाषा और दंड मानकों के साथ समन्वित कार्रवाई जरूरी है
विदेशों से खुफिया जानकारी जुटाने और उसका विश्लेषण करने वाली भारत की प्रमुख एजेंसी, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस वर्ष 'मादक पदार्थ: एक सीमाहीन खतरा, एक सामूहिक जिम्मेदारी' विषय पर अपना संबोधन दिया. गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 2047 तक नशामुक्त भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है.
शाह ने कहा कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने मादक पदार्थों के गिरोहों को खत्म करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है और इस लक्ष्य की दिशा में काम कर रही हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि मादक पदार्थों के धन का इस्तेमाल आतंकवादियों और आपराधिक गिरोहों को वित्त पोषित करने और समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है, लेकिन मादक पदार्थों के सेवन से मानव शरीर को होने वाले स्थायी नुकसान पर बड़े पैमाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

शाह ने चेतावनी दी कि इस खतरे को हराने के लिए दुनिया के सभी जिम्मेदार देशों के पास अभी भी मिलकर काम करने का समय है, उन्होंने कहा कि अगर अभी संयुक्त प्रयास शुरू नहीं किए गए, तो 10 साल बाद दुनिया को एहसास होगा कि जो नुकसान हुआ है उसे ठीक करना बहुत देर हो चुकी है.
गृह मंत्री ने मादक पदार्थों के खिलाफ युद्ध में एक एकीकृत वैश्विक प्रयास का आह्वान किया और इस मुद्दे से निपटने के लिए एक एकीकृत कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने आगे कहा कि जब तक नियंत्रित पदार्थों की परिभाषा और मादक पदार्थों की तस्करी के लिए समान दंड मानकों पर वैश्विक स्तर पर एकमत नहीं होगा, तब तक मादक पदार्थों के गिरोह नीतिगत विसंगतियों का फायदा उठाते रहेंगे, जिससे इस खतरे से निपटने के प्रयास कमजोर पड़ते रहेंगे.
शाह ने ये भी कहा कि 8 अरब लोगों की आबादी, 195 राष्ट्रों और 250,000 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं वाले विश्व को ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए खंडित या विखंडित दृष्टिकोणों के माध्यम से नहीं जा सकता. ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में, राष्ट्रों के बीच सामूहिक संकल्प के साथ-साथ खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान, समन्वित कार्रवाई और सीमा-पार अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे.
अमित शाह ने यह भी कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को भू-राजनीतिक मतभेदों और व्यक्तिगत राष्ट्रीय हितों से ऊपर उठना चाहिए. विश्व को नार्को नेटवर्कों के साथ-साथ नार्को-टेरर स्टेट्स के विरुद्ध एक साथ संघर्ष करना चाहिए. इस लड़ाई में, विश्व को प्रतिबंधित पदार्थों की समान परिभाषा, ड्रग तस्करी के लिए एकसमान सज़ा, ड्रग सरगनाओं के प्रत्यर्पण तथा खुफिया जानकारी साझा करने के लिए एकसमान कानून अपनाने होंगे.
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