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कार में चलता था 'बेटा या बेटी' बताने का गोरखधंधा: गर्भपात का भी इंतजाम, चीन की मशीन से खोल रहे थे गर्भ का राज

Ghaziabad Ultrasound Racket: गाजियाबाद पुलिस ने चलती कार में भ्रूण लिंग जांच करने वाले एक रैकेट का खुलासा किया है. पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार भी किया है. जिसमें कई अहम खुलासे हुए हैं.

कार में चलता था 'बेटा या बेटी' बताने का गोरखधंधा: गर्भपात का भी इंतजाम, चीन की मशीन से खोल रहे थे गर्भ का राज
गाजियाबाद पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
  • गाजियाबाद पुलिस ने एक भ्रूण लिंग परीक्षण करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है.
  • ये लोग चलती कार में परीक्षण करते थे, ताकि किसी को शक न हो सके. यह बड़ा नेटवर्क माना जा रहा है.
  • गाजियाबाद पुलिस ने चार लोगों को मामले में गिरफ्तार किया है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.
गाजियाबाद:

गाजियाबाद पुलिस ने भ्रूण लिंग जांच और अबॉर्शन कराने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा काम चलती कार में किया जा रहा था. जहां कार से पुलिस को मेडिकल उपकरण और पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन मिली है. पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि आरोपी कार में पोर्टेबल मशीन से महिलाओं के गर्भ में पल रहे भ्रूण की लिंग जांच करते थे. गाजियाबाद के महामाया स्टेडियम के पास वह देर रात एक महिला के आने का इंतजार कर रहे थे. उसके पहले ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. 

गाजियाबाद पुलिस का बड़ा खुलासा 

गाजियाबाद पुलिस ने मामले में बड़ा खुलासा किया है. आरोपी पहले चलती कार में जांच करते थे और उसके बाद एक निजी अस्पताल में गर्भपात कराते थे. एक साल में करीब 500 से ज्यादा महिलाओं के भ्रूण लिंग परीक्षण की बात सामने आई है. पुलिस को आरोपियों के पास से एक चीन की एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन मिली है. जबकि 20 हजार रुपए भी बरामद किए गए हैं. पकड़े गए लोगों में संदीप जो बागपत का रहने वाला है, दूसरे का नाम सलमान है जो गढ़मुक्तेश्वर का है. तीसरे का नाम साहिद है जो गाजियाबाद का ही रहने वाला है. जबकि चौथे आरोपी का नाम तस्लीम है जो बुलंदशहर का रहने वाला है. 

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कैसे चल रहा था पूरा रैकेट

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक यह पूरा रैकेट लंबे समय से संचालित हो रहा था. आरोपियों ने बताया कि भ्रूण लिंग की जांच 15 से 20 हजार रुपए के बीच में होती थी. जबकि गर्भपात कराने के लिए 50 से 60 रुपए की राशि ली जाती थी. ये सभी आरोपी निजी और सरकारी अस्पतालों के बाहर सक्रिय रहते थे और प्रेग्नेंट महिलाओं के परिजनों से संपर्क करते थे. इनके पास मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड समेत दूसरे कई राज्यों से भी महिलाएं आती थी. खास बात यह है कि पूरा रैकेट कार से संचालित किया जा रहा था. ऐसे में किसी को इसकी भनक नहीं लगती थी. जबकि गिरोह महिला के बारे में भी पूरी जानकारी जुटाता था, ताकि यह क्लीयर हो जाए कि वह पुलिस या मुखबिर तो नहीं है. 

चीन से मंगाई थी मशीन 

आरोपियों ने नेपाल के रास्ते चीन पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन बुलावाई थी. जिसकी कीमत सामान्य तौर पर 5 से 25 लाख रुपए होती है. हैरान करने वाली बात यह है कि यह मशीन आरोपियों को 2 से 3 लाख रुपए में ही मिली थी. ऐसे में पुलिस इस बात की जांच में भी जुटी है कि यह मशीन इतने कम दामों में आरोपियों तक कैसे पहुंची है. पुलिस दूसरे कई एंगल से भी जांच में जुटी है. जिसमें आशा कार्यकर्ताओं से भी पूछताछ हो सकती है. क्योंकि पुलिस को इस बात की आशंका है कि इनका कनेक्शन आशा कार्यकर्ताओं से भी हो सकता है. अगर ऐसा कुछ पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. 

झोलाछाप डॉक्टरों से कनेक्शन

गाजियाबाद पुलिस इस बात की जांच में भी जुटी है कि इस गिरोह का नेटवर्क झोलाछाप डॉक्टरों से भी हो सकता है. आरोपियों में शामिल संदीप पहले भी इस तरह के मामले में जेल जा चुका है. जबकि बाकि के तीन आरोपी दलाली का काम करते थे. उन्हें महिला से संपर्क करने के लिए 3 से 4 हजार रुपया दिया जाता है. पुलिस फिलहाल इस मामले की जांच में जुटी है. जिसमें आने वाले समय में कुछ और बड़े खुलासे भी हो सकते हैं. 

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