जलवायु विशेषज्ञों ने नयी दिल्ली में हुए जी20 शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में कोयले और अन्य जीवाश्म ईंधन को लेकर अच्छा संतुलन बनाने और सदस्य देशों को 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तीन गुना करने पर सहमत करने के लिए भारत की सराहना की.
शनिवार को यहां जी20 शिखर सम्मेलन के बाद जारी नयी दिल्ली घोषणापत्र में कहा गया कि समूह का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने और राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप बिजली बनाने में कोयले के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से कम करने के प्रयासों में तेजी लाना होगा. लेकिन उन्होंने तेल और गैस सहित सभी प्रदूषणकारी जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से ख़त्म करने के लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई.
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घोषणापत्र में कोयले के इस्तेमाल का जिक्र इंडोनेशिया में पिछले साल हुए जी20 शिखर सम्मेलन में बनी सहमति के अनुरूप है.
जलवायु थिंक टैंक ई3जी में भारत की प्रमुख मधुरा जोशी ने कहा, 'कोयले के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से कम करने के प्रयासों पर पिछले जी20 बयान को दोहराना यथास्थिति को बनाए रखने के समान है. नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से कम करने का समर्थन किया जाना चाहिए, दोनों ही परिवर्तन और नेट-शून्य कार्बन उत्सर्जन के लिए अपरिहार्य हैं.'
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) की विशिष्ट फेलो और कार्यक्रम निदेशक आर.आर. रश्मि ने कहा, “सभी जीवाश्म ईंधनों और 'कोयले को चरणबद्ध तरीके से खत्म करना या चरणबद्ध तरीके से इस्तेमाल बंद करने' का जी20 घोषणापत्र में जिक्र नहीं किया जाना समझ में आता है क्योंकि इसके लिए ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के सभी तेल, गैस और कोयला उत्पादक देशों के बीच आम सहमति की आवश्यकता है.”
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं