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अब पैकेट देखते ही पता चलेगा कितना 'खराब' है खाना, FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दिया नया प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद FSSAI ने ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिससे लोगों को ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थों की पहचान करने में आसानी होगी.

अब पैकेट देखते ही पता चलेगा कितना 'खराब' है खाना, FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दिया नया प्रस्ताव
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद FSSAI ने नया प्रस्ताव दिया है.

खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट के 13 अगस्त 2026 के आदेश के अनुपालन में एक हलफनामा दाखिल किया है. इसमें पैकेटबंद खाद्य उत्पादों के सामने की तरफ लाल रंग के षट्भुज (रेड हेक्सागन) चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव रखा गया है. इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह बताना है कि किसी उत्पाद में चीनी, नमक या फैट की मात्रा अधिक है.

किन उत्पादों पर लगेगा चेतावनी लेबल?

प्रस्ताव के अनुसार पहले चरण में ऐसे उत्पादों पर चेतावनी लेबल लगाया जाएगा जिनमें एडेड फैट, एडेड शुगर और नमक में से दो या उससे अधिक तत्व तय सीमा से ज्यादा हों. ऐसे उत्पादों पर “HIGH FAT”, “HIGH SUGAR” और “HIGH SALT” जैसी चेतावनियां लिखी जाएंगी. वहीं अधिक मीठे पेय पदार्थों पर “HIGHLY SWEETENED BEVERAGE” की चेतावनी लगाने का भी प्रस्ताव है.

पैकेट पर ज्यादा साफ दिखेगी चेतावनी

FSSAI ने सुझाव दिया है कि पैकेट के सामने लिखी जाने वाली चेतावनी का फॉन्ट साइज पीछे दिए गए न्यूट्रिशन इंफॉर्मेशन टेबल के फॉन्ट से एक प्वाइंट बड़ा रखा जाए, ताकि उपभोक्ता इसे आसानी से पढ़ सकें. पोषक तत्वों की सीमा तय करने के लिए ICMR-NIN की “Dietary Guidelines for Indians 2024” को आधार बनाया जाएगा.

कुछ उत्पादों को मिलेगी छूट

प्रस्ताव में एकल-सामग्री वाले खाद्य पदार्थों को इस व्यवस्था से बाहर रखने की बात कही गई है. इसके अलावा घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे उत्पादों को भी छूट देने का सुझाव दिया गया है क्योंकि इनमें संबंधित तत्व स्वाभाविक रूप से अधिक मात्रा में पाए जाते हैं.

क्या है पूरा मामला?

पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर साफ और आसान चेतावनी देने की मांग को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. अदालत ने 13 अगस्त 2026 को FSSAI से इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी. अब FSSAI ने अदालत को बताया है कि वह नियमों में संशोधन कर सही तरीके से फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल लागू करने की तैयारी कर रहा है. दूसरे चरण में ऐसे उत्पाद भी इस दायरे में लाए जा सकते हैं जिनमें किसी एक पोषक तत्व की मात्रा तय सीमा से अधिक हो.

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