जापान में एशियन गेम्स 2026 में दस हजार से भी ज्यादा एथलीट हिस्सा ले रहे हैं. खिलाड़ियों के महाकुंभ पहुंचते ही उनके सामने आने वाली अलग-अलग समस्याएं समस्याएं सामने आ रही हैं. वहीं, आप समझ सकते हैं कि इन करीब 15 दिन चलने वाली प्रतियोगिता के दौरान अलग-अलग देशों के खान-पान तैयार करना आयोजकों के लिए कितनी बड़ी चुनौती की बात होगी. बता दें कि हर दिन करीब दो टन चिकन, करीब 35,000 ब्रेड का इस्तेमाल हो रहा है. यह जानकारी एशियन गेम्स के हेड शेफ पीटर राइट ने दी. वहीं, उन्होंने साल 1992 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में आयोजित हुए 'क्रांतिकारी (पहली बार कलर्ड ड्रेस में)' में हुई बहुत ही मजेदार घटना के बारे में बताया, जिसने उनका नजरिया अपने पेशे के प्रति पूरी तरह बदल दिया. और यह घटना पाकिस्तान और भारत की बिरयानी से जुड़ा था और यह राइट के लिए बड़ा सबक था.
🇯🇵The Aichi-Nagoya Asian Games in Japan are facing complaints about tiny meal portions.
— 鳳凰資訊 PhoenixTV News (@PhoenixTV_News) September 18, 2026
Thailand's athletes shared what they eat while dining at the Asian Games cafeteria, but the meals were trolled for tiny portions, limited staple choices, and a strict limit of only one… pic.twitter.com/EZNf06aOrS
1992 क्रिकेट विश्व कप फाइनल की घटना
राइट ने यह सबक 1992 में सीखा था, जब पाकिस्तान ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड का सामना किया था. तब पाकिस्तान टीम के मैनेजर ने मैच वाले दिन खाने में बिरयानी मांगी थी. राइट ने बताया, 'उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या आप जानते हैं कि यह क्या है? मैंने जवाब दिया, 'हां, हां, मुझे पता है कि यह क्या है, कोई समस्या नहीं है क्योंकि मैं बड़े अहंकार वाला एक युवा शेफ था, लेकिन मैंने अपनी जिंदगी में बिरयानी का नाम तक नहीं सुना था.'
भारतीय कर्मचारी की मां बनीं सहारा
उस समय उनकी मदद के लिए इंटरनेट नहीं भी था. इसलिए राइट अपनी रसोई के एक भारतीय कर्मचारी के पास गए, जिनकी मां एमसीजी आईं और उन्होंने शेफ्स को यह डिश बनाना सिखाया. उन्होंने इसे पाकिस्तान टीम को परोसा. बाद में, राइट ने मैनेजर से पूछा कि खाना कैसा था. उन्होंने कहा कि ओह यह ठीक था. यह पाकिस्तानी बिरयानी नहीं थी, यह भारतीय बिरयानी थी. इस पर मैंने कहा आप क्या बात कर रहे हैं? यह तो एक ही चीज़ है. इस पर मैनेजर ने कहा, नहीं, यह एक चीज़ नहीं है. यह एक महत्वपूर्ण सबक था. राइट कहते हैं, 'मुझे नहीं पता था कि कोई अंतर होता है, लेकिन मैंने एक बात सीखी.'
पीटर राइट के करियर पर इस घटना का प्रभाव
इस एक घटना ने पीटर राइट के खाना बनाने और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को प्रबंधित करने के नजरिए को पूरी तरह बदल दिया.राइट को समझ आया कि भोजन सिर्फ पेट भरने या एक जैसी रेसिपी बनाने का नाम नहीं है. एक ही नाम की डिश अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और यहां तक कि समुदायों में अलग पहचान रखती है. इस सीख का असर यह हुआ कि आगे चलकर सिडनी (2000), बीजिंग (2008), और रियो (2016) ओलंपिक जैसे विशाल आयोजनों में राइट ने यह सुनिश्चित किया कि खिलाड़ियों को केवल भोजन न मिले, बल्कि उनके अपने देश के प्रामाणिक स्वाद और सामग्रियों का सटीक ध्यान रखा जाए. और इस बार भी पीटर राइट ने एशियन गेम्स में इसी नजरिये के साथ खिलाड़ियों का भोजन तैयार करने की कोशिश की है.
भारतीय और पाकिस्तानी बिरयानी के बीच का अंतर
जब पाकिस्तानी टीम ने वह बिरयानी खाई, तो मैनेजर ने राइट को बताया कि भोजन अच्छा था, लेकिन वह "पाकिस्तानी बिरयानी नहीं, बल्कि भारतीय बिरयानी" थी. ऐसे में आप जानिए कि दोनों देशों की संस्कृति में बिरयानी का क्या अंतर है. यह बिरियानी के बनाने के तरीके, मसालों आदि से जुड़ा है.
पाकिस्तानी बिरयानी (विशेषकर कराची शैली) में आलू, आलूबुखारा , टमाटर, तीखी हरी मिर्च और खटास का इस्तेमाल अधिक होता है. वहीं, पारंपरिक उत्तर भारतीय या हैदराबादी बिरयानी में खड़े गरम मसाले, केसर, दही, मेवे और खुशबूदार मसालों का संतुलन अधिक रहता है. वहीं, जहां भारतीय बिरयानी में 'दम' देकर चावल और मीट को खुशबूदार बनाया जाता है, वहीं पाकिस्तानी शैली में तीखा ग्रेवी बेस थोड़ा अधिक चटपटा और नमदार रखा जाता है.
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