- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2026 में देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की
- 1951 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अकाल के समय लोगों से हफ्ते में एक बार भोजन त्यागने की सलाह दी थी
- 1962 के युद्ध के दौरान नेहरू ने नेशनल डिफेंस फंड में सोना और गहने दान करने की अपील की थी
मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट का असर भारत पर भी पड़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संकट की घड़ी में देशवासियों से अपील की है कि वे पेट्रोल-डीजल को बचाने की कोशिश करें. लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ऐसी अपील की हो. इतिहास गवाह है कि जब-जब भारत पर संकट के बादल मंडराए हैं, तब-तब देश के प्रधानमंत्रियों ने सरकारी खजाने से ज्यादा देशवासियों के 'संकल्प' पर भरोसा जताया है. कभी नेहरू की एक वक्त का खाना छोड़ने की अपील थी, तो कभी शास्त्री का 'सोमवार का उपवास' जो पूरे राष्ट्र का सामूहिक व्रत बन गया. आज 2026 में मिडिल ईस्ट संकट के बीच PM मोदी ने नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने का आह्वान किया है. आइए बताते हैं किस प्रधानमंत्री ने कब ऐसी अपील की.
10 मई 2026: PM मोदी ने सोना ना खरीदने की अपील की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि नागरिक एक साल तक सोना न खरींदे. ऐसा संकल्प लें कि कुछ भी आयोजन हो हम सोना नहीं खरीदेंगे. सोना खरीदने से हमारे रिजर्व फॉरेक्स यानी विदेशी मुद्रा पर असर पड़त है. इसके अलावा पीएम मोदी ने पेट्रोल-डीजल के कम इस्तेमाल की भी अपील की. उन्होंने वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइल क्लासेस जैसे विकल्पों को लागू करने का सुझाव दिया. इसी के साथ पीएम ने नागरिको से मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, इलेक्ट्रिक व्हीकल और काल पूलिंग का इस्तेमाल करने के लिए कहा.
1951: जब पीएम नेहरू ने एक वक्त का भोजन छोड़ने को कहा
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी साल 1951 में संकट के समय देशवासियों से कई अपीलें कीं. पीएम नेहरू ने संकट के समय जनता से योगदान देने और सादगी बरतने की अपील की. मई 1951 में अकाल या भोजन की कमी से निपटने के प्रयासों के दौरान, उन्होंने अपने संदेशों में सुझाव दिया कि लोग हफ्ते में एक बार का भोजन त्यागकर संकट के समय देश की मदद करें.

1962: जब नेहरू ने देशवासियों से की सोना दान करने की अपील
इसके अलावा 1962 के युद्ध के समय भी PM नेहरू ने नागरिकों से अपील की कि वे नेशनल डिफेंस फंड में सोना और गहने दान करें, ताकि सरकार विदेशी मुद्रा भंडार को कम किए बिना हथियार और साजो-सामान खरीद सके. इंदिरा गांधी ने अपने निजी गहने NDF में दान कर दिए. इस दौरान कितना सोना दान किया गया इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है.
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान
वहीं 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश से अपील की कि वे एक दिन का उपवास रखें. ऑल इंडिया रेडियो पर संबोधित करते हुए शास्त्री ने लोगों से कहा कि वे हफ्ते में कम से कम एक बार का भोजन त्यागें.
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1971 में इंदिरा गांधी ने की थी राष्ट्रीय अनुशासन की अपील
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी 1971 के युद्ध के दौरान देशवासियों से खास अपील की थी. इस युद्ध ने और बांग्लादेश से आए शरणार्थियों के संकट ने भारत के खजाने पर भारी दबाव डाल दिया था. इसे लेकर इंदिरा गांधी ने अपील करते हुए कहा, 'इन सब बातों से हम पर भारी जिम्मेदारियां आ गई हैं और अब कड़े राष्ट्रीय अनुशासन की सख्त जरूरत है. हमें कई बलिदान देने होंगे. हमारी फैक्टरियों और खेतों में उत्पादन बढ़ना चाहिए. हमारी रेलगाड़ियां और हमारी पूरी परिवहन और संचार व्यवस्था बिना किसी रुकावट के काम करनी चाहिए. यह क्षेत्रीय या गुटीय हितों के टकराव का समय नहीं है. हमारी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने को बनाए रखने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए हर चीज को कम महत्वपूर्ण मानना होगा. मैं हर नागरिक, हर पुरुष, महिला और बच्चे से अपील करता हूं कि वे सेवा और बलिदान की उस भावना से ओत-प्रोत हो जाएं, जिसके लिए यह राष्ट्र पूरी तरह सक्षम है.'
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