- पंजाब के फूड सेफ्टी अफसर अभिनव कुमार को मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई के कारण निलंबित किया गया है
- निलंबन के खिलाफ फिरोजपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसान और आमजन द्वारा प्रदर्शन और सड़क जाम किया गया है
- अभिनव कुमार ने अपने करियर में लगभग 18 वर्षों में 26 बार विभागीय कार्रवाई झेली है
महाराष्ट्र के आईएएस तुकाराम मुंढे की तरह पंजाब में मिलावटखोरों के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन लेने वाले फूड सेफ्टी अफसर अभिनव कुमार चर्चा में हैं. उनके निलंबन की कार्रवाई के विरोध में 8 अक्टूबर 2026 की सुबह 11 बजे से शाम साढ़े पांच तक लोगों ने फिरोजपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग (जीटी रोड) जाम रखा है. आमजन और किसान यूनियन उनके समर्थन में सड़कों पर उतरा था. पंजाब के फिरोजपुर में फूड सेफ्टी अफसर के तौर पर तैनात रहे और फिलहाल निलंबित किए गए 42 वर्षीय अभिनव कुमार की कहानी बेहद दिलचस्प है. साधारण परिवार से आने वाले अभिनव कुमार फिरोजपुर के रहने वाले हैं. माता-पिता की मेहनत और अपने लगन के दम पर उन्होंने पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और वर्ष 2009 में पंजाब के स्वास्थ्य विभाग में लुधियाना से बतौर फूड सेफ्टी अफसर अपने करियर की शुरुआत की.

फूड सेफ्टी अफसर अभिनव कुमार Photo Credit: NDTV
नौकरी शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद मिलावटखोरों के खिलाफ की गई कार्रवाई के कारण उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का सिलसिला भी शुरू हो गया. अपनी करीब 18 साल की सेवा में अभिनव कुमार 26 बार कार्रवाई झेल चुके हैं. इनमें निलंबन से लेकर तबादले तक शामिल हैं. मौजूदा पंजाब सरकार के कार्यकाल में भी उन पर पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान छह बार कार्रवाई हो चुकी है. हालांकि इस बार उनके निलंबन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. उनके समर्थन में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. फिरोजपुर के कई इलाकों में किसान संगठनों और विभिन्न कर्मचारी यूनियनों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा निलंबन का आदेश जारी करने वाली आईएएस अधिकारी कंवलप्रीत बराड़ के पुतले तक फूंके. फिरोजपुर में मिलावटखोरों पर कार्रवाई के बाद 1 अक्टूबर को अभिनव कुमार को निलंबित कर उनका मुख्यालय तरनतारन निर्धारित कर दिया गया. अभिनव कुमार ने अपने ऊपर हुई कार्रवाइयों, शिक्षा और पेशेवर जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर एनडीटीवी से विस्तार से बातचीत की.
करने के बाद अभिनव कुमार ने पंजाब विश्वविद्यालय से संबद्ध फिरोजपुर के राम सुख दास कॉलेज से वर्ष 2005 में बीएससी की डिग्री हासिल की. इसके बाद वर्ष 2006 में फरीदकोट के बरजिंदरा कॉलेज से बीएड किया. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने चंडीगढ़ का रुख किया और वर्ष 2008 में पंजाब विश्वविद्यालय से एमएससी फिजिक्स की
पढ़ाई पूरी की.
पंजाब के किन-किन जिलों में रहे तैनात?
अभिनव कुमार का कहना है कि 2009 में उनकी पहली पोस्टिंग लुधियाना में हुई थी. तब से लेकर अब तक वे पंजाब के 10 जिलों में सेवाएं दे चुके हैं. इन जिलों में तरनतारन, श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, नवांशहर, लुधियाना, कपूरथला, होशियारपुर, फाजिल्का, मोगा और रूपनगर (रोपड़) शामिल हैं. अभिनव कुमार का दावा है कि उन्होंने अपने पूरे करियर में ईमानदारी से समझौता नहीं किया. उनका कहना है कि शायद यही वजह है कि उन्हें बार-बार कार्रवाई का सामना करना पड़ा.

लोगों ने फिरोजपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग (जीटी रोड) जाम कर रखा है.
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भगवंत मान सरकार में छह बार कार्रवाई
अभिनव कुमार के अनुसार, पिछले साढ़े चार वर्षों में उन पर छह बार कार्रवाई हो चुकी है. ताजा निलंबन 1 अक्टूबर को हुआ, जब वे मिलावटखोरों के खिलाफ किए गए अभियानों को लेकर चर्चा में थे. उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार के दौरान उनकी पहली पोस्टिंग मुक्तसर में हुई थी. इसके बाद 27 जून 2026 को उन्हें फिरोजपुर भेजा गया. फिर लगभग हर नौ महीने के अंतराल में उनका तबादला होता रहा. फिरोजपुर के बाद उन्हें होशियारपुर भेजा गया. इसके बाद कपूरथला, फिर दोबारा उनके गृह जिले फिरोजपुर और अब निलंबन के बाद तरनतारन मुख्यालय निर्धारित किया गया है. अभिनव कुमार का कहना है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाइयों की वजह नियमों के अनुसार काम करना और किसी भी तरह के दबाव के आगे न झुकना रहा है.
'लीडरों की बात नहीं मानी, इसलिए कार्रवाई हुई'
एनडीटीवी से बातचीत में अभिनव कुमार कहते हैं कि उन्होंने नेताओं के दबाव के आगे झुकने से इनकार किया. उनका आरोप है कि मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए उन्हें कई अधिकारियों और राजनीतिक व्यक्तियों के फोन आते रहे, लेकिन उन्होंने नियमों के विरुद्ध कोई काम नहीं किया. उनका कहना है कि ईमानदारी और सिद्धांतों पर टिके रहने की सीख उन्हें अपने परिवार से मिली है.

आमजन और किसान यूनियन उनके समर्थन में सड़कों पर है.
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निलंबन के बाद लोगों में नाराजगी
फिरोजपुर में मिलावटखोरी के खिलाफ लगातार कार्रवाई करने के कारण अभिनव कुमार पिछले कुछ समय से सुर्खियों में रहे. उनके निलंबन के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली और उनकी बहाली की मांग उठने लगी. अभिनव कुमार ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मिलकर जिले में दूध डेयरियों, मिठाई की दुकानों, रेस्टोरेंट, खाद्य प्रतिष्ठानों और खाने-पीने के ठेलों पर कई अभियान चलाए. स्थानीय लोगों का दावा है कि उनकी कार्रवाई से खाद्य पदार्थों में मिलावट पर अंकुश लगाने में मदद मिली. यही वजह रही कि कई लोगों ने उन्हें 'सिंघम फूड अफसर' कहना शुरू कर दिया.
लगातार सुर्खियों में रहे अभिनव कुमार
सितंबर महीने से अभिनव कुमार फिरोजपुर में मिलावटखोरी के खिलाफ चलाए गए अभियानों को लेकर लगातार चर्चा में रहे. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ शहरों, कस्बों और गांवों में खाद्य कारोबारियों के खिलाफ निरीक्षण और कार्रवाई की. दूध और डेयरी उत्पादों से लेकर मिठाइयों, रेस्टोरेंट्स और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर हुई जांच और छापेमारी के कारण वे स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बने रहे. कार्रवाई के दौरान कथित नकली पनीर, मिलावटी दूध और अन्य संदिग्ध खाद्य सामग्री से जुड़े मामलों में भी कदम उठाए गए.
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