
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों काफी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. उनके खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की जांच और छापेमारी के अलावा अब चुनाव आयोग ने राज्यपाल से हेमंत सोरेन को विधायक के तौर पर आयोग्य घोषित करने की सिफारिश की है. इसके बाद सीएम हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को एक के बाद एक कई ट्वीट कर बीजेपी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है.
हेमंत सोरेन ने कहा, "यह आदिवासी का बेटा है. इनकी चाल से हमारा न कभी रास्ता रुका है, न हम लोग कभी इन लोगों से डरे हैं. हमारे पूर्वजों ने बहुत पहले ही हमारे मन से डर-भय को निकाल दिया है. हम आदिवासियों के डीएनए में डर और भय के लिए कोई जगह ही नहीं है."
यह आदिवासी का बेटा है। इनकी चाल से हमारा न कभी रास्ता रुका है, न हम लोग कभी इन लोगों से डरे हैं।
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 26, 2022
हमारे पूर्वजों ने बहुत पहले ही हमारे मन से डर-भय को निकाल दिया है। हम आदिवासियों के डीएनए में डर और भय के लिए कोई जगह ही नहीं है। pic.twitter.com/0PAks18iJF
सीएम ने कहा, "झारखण्ड के अंदर बाहरी ताकतों का गिरोह सक्रिय है. इस गिरोह ने विगत 20 सालों से राज्य को तहस-नहस करने का संकल्प लिया था. जब उन्हें 2019 में उखाड़ कर फेंका गया तो उन षड्यंत्रकारियों को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा कि अगर हम यहां टिक गए तो उनका आने वाला समय मुश्किल भरा होने वाला है."
झारखण्ड के अंदर बाहरी ताकतों का गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह ने विगत 20 वर्षों से राज्य को तहस-नहस करने का संकल्प लिया था। जब उन्हें 2019 में उखाड़ कर फेंका गया तो उन षड्यंत्रकारियों को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा कि अगर हम यहाँ टिक गए तो उनका आने वाला समय मुश्किल भरा होने वाला है। pic.twitter.com/bYl1MfnICd
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 26, 2022
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, "केंद्र से राज्य का 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये बकाया क्या मांगा, इन्होंने परेशान करने के लिए एजेंसियों को मेरे पीछे लगा दिया. जब इन्होंने देखा कि मुझे कुछ कर नहीं पा रहे हैं तो आदरणीय गुरुजी जो एक उम्र के पड़ाव पर खड़े हैं, उन्हें परेशान कर मुझ तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं."
केंद्र से राज्य का 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये बकाया क्या माँगा, इन्होंने परेशान करने के लिए एजेंसियों को मेरे पीछे लगा दिया।
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 26, 2022
जब इन्होंने देखा कि मुझे कुछ कर नहीं पा रहे हैं तो आदरणीय गुरुजी जो एक उम्र के पड़ाव पर खड़े हैं, उन्हें परेशान कर मुझ तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। pic.twitter.com/h4WXxqL7Cd
मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने केंद्र सरकार से आग्रह किया झारखण्ड गरीब राज्य है, यहां के लोगों के लिए पेंशन और स्वीकृत करें. वह उन्होंने कभी नहीं किया. यह व्यापारियों की जमात है. यह पैसा देना नहीं, पैसा लेना जानती है. देश में झारखण्ड पहला राज्य है जिसने सभी गरीब-वंचित को सर्वजन पेंशन से जोड़ने का काम किया."
हमने केंद्र सरकार से आग्रह किया झारखण्ड गरीब राज्य है यहाँ के लोगों के लिए पेंशन और स्वीकृत करें। वह उन्होंने कभी नहीं किया। यह व्यापारियों की जमात है। यह पैसा देना नहीं, पैसा लेना जानती है।
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देश में झारखण्ड पहला राज्य है जिसने सभी गरीब-वंचित को सर्वजन पेंशन से जोड़ने का काम किया। pic.twitter.com/3anO4o8wgD
सीएम सोरेन ने एक ट्वीट में कहा, "सरकारी कुर्सी के भूखा हम लोग नहीं हैं, बस एक संवैधानिक व्यवस्था की वजह से आज हमें रहना पड़ता है, क्योंकि उसी के माध्यम से हम जन-कल्याण के काम करते हैं. क्या कभी किसी ने सोचा था कि हर बूढ़ा-बुजुर्ग, विधवा और एकल महिला को पेंशन मिलेगा?आपके बेटा ने आपके आशीर्वाद से वह करके दिखाया."
सरकारी कुर्सी के भूखा हम लोग नहीं है बस एक संवैधानिक व्यवस्था की वजह से आज हमें रहना पड़ता है क्योंकि उसी के माध्यम से हम जन-कल्याण के काम करते हैं।
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क्या कभी किसी ने सोचा था कि हर बूढ़ा-बुजुर्ग, विधवा और एकल महिला को पेंशन मिलेगा?आपके बेटा ने आपके आशीर्वाद से वह करके दिखाया। pic.twitter.com/8k5Fep5cPX
उन्होंने कहा, "हमारे विरोधी राजनैतिक तौर पर हमसे सक नहीं पा रहे हैं तो संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं. लेकिन हमें इसकी चिंता नहीं है. हमें यह कुर्सी विरोधियों ने नहीं बल्कि जनता ने दी है. आज का कार्यक्रम मेरा पहले से तय था. यह कुछ कर लें. मेरी जनता के लिए मेरा काम कभी नहीं रुक सकता."
हमारे विरोधी राजनैतिक तौर पर हमसे सक नहीं पा रहे हैं तो संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं। लेकिन हमें इसकी चिंता नहीं है। हमें यह कुर्सी विरोधियों ने नहीं बल्कि जनता ने दी है।
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आज का कार्यक्रम मेरा पहले से तय था। यह कुछ कर लें। मेरी जनता के लिए मेरा काम कभी नहीं रुक सकता। pic.twitter.com/dv6ke5Wx1a
वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लेकर सीएम ने कहा, "दुर्भाग्य है हमारा, हम आदिवासियों का कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री एवं आदिवासी राष्ट्रपति ने देश के आदिवासी समाज को शुभकामना सन्देश देना भी उचित नहीं समझा. इनकी नजर में हम आदिवासी नहीं, वनवासी हैं."
दुर्भाग्य है हमारा, हम आदिवासियों का कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री एवं आदिवासी राष्ट्रपति ने देश के आदिवासी समाज को शुभकामना सन्देश देना भी उचित नहीं समझा।
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इनकी नजर में हम आदिवासी नहीं, वनवासी हैं। pic.twitter.com/xkIuCR0H6x
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