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6 years ago
नई दिल्ली:

किसानों के साथ गुरुवार को हुई सरकार की बैठक एक बार फिर बेनतीजा रही है और इस तरह किसान आंदोलन (Farmers Protests) अपने नौवें दिन में प्रवेश कर गया है. किसान संगठनों के नेता बैठक में तीन नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांगों पर अड़े रहे. जानकारी है कि सरकार ने किसानों को कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव भी दिया था, जिससे किसानों ने इनकार कर दिया. आठ घंटों तक चली इस मीटिंग में किसानों ने सरकार की ओर से खाने, चाय और पानी के इंतजाम को भी ठुकरा दिया और अपने साथ लंगर का लाया हुआ खाना खाया.

अपनी ओर से सरकार ने लगभग 40 किसान संगठनों के नेताओं को भरोसा दिलाया कि उनकी सभी वैध चिंताओं को संबोधित किया जाएगा लेकिन किसान संगठनों का सीधा कहना है कि सितंबर में पास किया गया कानून जल्दबाजी में लाया गया है और कई कमियां और लूपहोल हैं.

Here are the live updates on Farmers Protest in Delhi :

कृषि क्षेत्र के सुधार हड़बड़ी में नहीं किए गए: सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि नए कृषि कानूनों को हड़बड़ी में नहीं लाया गया. इन्हें हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा और काफी विचार विमर्श के बाद लाया गया. इनसे किसानों को फायदा होगा.
प्रदर्शन से दिल्ली हुई ‘‘बंधक’’, कपिल मिश्रा ने लिखा राष्ट्रपति को पत्र
दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के वर्तमान प्रदर्शन के बीच प्रदेश भाजपा के नेता कपिल मिश्रा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से दिल्लीवासियों को राहत प्रदान करने के लिए कदम उठाने की अपील की जो उनके अनुसार प्रदर्शन के कारण ''बंधक'' बने हुए हैं.

इनेलो किसानों की खातिर शिअद के नेतृत्व में बनने वाले किसी भी मोर्चे में शामिल होने को इच्छुक है: अभय चौटाला
केंद्र सरकार से हाल के तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की किसानों की मांग स्वीकार करने की मांग करते हुए इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने शुक्रवार को कृषकों के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के शिरोमणि अकाली दल (शिअद) द्वारा बनाये जाने वाले किसी भी मोर्चे में शामिल होने की इच्छा प्रकट की.
सिंघू बार्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों के लिए 24 घंटे लंगर चला रहा मुस्लिम दल
केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के सिंघू बार्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए 25 सदस्यीय मुस्लिम टीम बुधवार से ही लंगर (सामुदायिक रसोई) चला रही है.

सरकार को किसानों के प्रदर्शन का जल्द समाधान निकालना चाहिए :धर्मेंद्र
प्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कृषि कानूनों पर किसानों के प्रदर्शन का समाधान जल्द निकालने का आग्रह किया.
भारत ने किसानों के आंदोलन पर ट्रूडो व अन्य नेताओं की टिप्पणी को लेकर कनाडाई उच्चायुक्त को तलब किया
भारत ने शुक्रवार को कनाडा के उच्चायुक्त को तलब कर कहा कि किसानों के आंदोलन के संबंध में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और वहां के कुछ अन्य नेताओं की टिप्पणी देश के आंतरिक मामलों में एक "अस्वीकार्य हस्तक्षेप" के समान है.
BJP कृषि कानूनों के जरिए किसानों के अधिकारों को कॉर्पोरेट घरानों को बेच रही: TMC

तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को 'क्रूर' कृषि कानूनों पर अपना क्षोभ प्रकट करते हुए आरोप लगाया कि संबंधित पक्षों से मशविरा किए बिना पारित किए गए इन कानूनों के जरिये भाजपा किसानों के अधिकारों को कॉर्पोरेट घरानों को बेच रही है. तृणमूल के राज्य सभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने हरियाणा में प्रदर्शन कर रहे किसानों से दोपहर में मुलाकात की. पार्टी ने एक बयान में बताया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फोन पर किसानों से बातचीत की और प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता प्रकट की.

इससे पहले मुख्यमंत्री ने दिन में किसानों के समर्थन में ट्वीट किया था. ट्वीट में कहा, '14 साल पहले चार दिसंबर 2004 को मैने कृषि भूमि के जबरन अधिग्रहण के खिलाफ कोलकाता में अपनी भूख हड़ताल शुरू की थी जो 26 दिनों तक चली थी. केंद्र द्वारा बिना मशविरा लिए पारित किए गए क्रूर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के प्रति मैं समर्थन व्यक्त करती हूं.' (भाषा)

पंजाब के किसानों ने मोदी सरकार को घुटनों पर ला दिया : शिवसेना

शिवसेना ने शुक्रवार को कहा कि पंजाब के किसानों ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनों के जरिये मोदी सरकार को घुटनों पर ला दिया है तथा दुनिया उनके द्वारा दिखाई गई एकता से सीख ले रही है.
पार्टी ने केन्द्र से प्रदर्शनकारी किसानों की मांगें सुनने का भी आग्रह किया.

शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में एक संपादकीय में कहा गया है, 'कड़ाके की ठंड के बावजूद पंजाब के किसानों ने मोदी सरकार के पसीने छुड़ा दिये हैं. प्रदर्शन उग्र होता दिख रहा है. मोदी सरकार को पहले कभी ऐसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा. सरकार के सदाबहार हथियार सीबीआई, आयकर विभाग, ईडी और एनसीबी इस मामले में काम नहीं आ रहे हैं. किसानों ने सरकार को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया है.'

संपादकीय में आगे कहा गया है, 'वे (किसान) अपनी मांग पर अडिग हैं कि तीनों विवादित कृषि कानूनों को रद्द किया जाना चाहिए. यहां तक कि, चौथे दौर की बातचीत के दौरान बैठक में उन्होंने सरकार की ओर से दिया गया भोजन और पानी तक ग्रहण करने से मना कर दिया.' (भाषा)
किसान आंदोलन का मामला अब SC में

 शीर्ष अदालत में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें दिल्ली की सीमाओं पर जमे किसानों को हटाने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दिल्ली-एनसीआर के सीमावर्ती इलाकों से किसानों को प्रदर्शन से तुरंत हटाने की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया है कि इस प्रदर्शन से COVID-19 के प्रसार का खतरा पैदा हो गया है. साथ ही लोगों को आने-जाने में भी दिक्कत हो रही है. याचिका में कहा गया है कि प्राधिकारियों को तुंरत बॉर्डर खुलवाने के आदेश दिए जाएं. साथ ही किसी निश्चित स्थान पर सामाजिक दूरी और मास्क आदि के साथ प्रदर्शन को शिफ्ट किया जाए. 

भारत ने किसानों के आंदोलन पर ट्रूडो व अन्य नेताओं की टिप्पणी को लेकर कनाडाई उच्चायुक्त को तलब किया

भारत ने शुक्रवार को कनाडा के उच्चायुक्त को तलब कर कहा कि किसानों के आंदोलन के संबंध में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और वहां के कुछ अन्य नेताओं की टिप्पणी देश के आंतरिक मामलों में एक 'अस्वीकार्य हस्तक्षेप' के समान है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडाई राजनयिक से यह भी कहा गया गया कि ऐसी गतिविधि अगर जारी रही तो इससे द्विपक्षीय संबंधों को 'गंभीर क्षति' पहुंचेगी. ट्रूडो ने भारत में आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकारों की रक्षा के लिए कनाडा हमेशा साथ रहेगा. इसके साथ ही उन्होंने स्थिति पर चिंता जतायी थी. (भाषा)
ममता बनर्जी ने किसानों को किया कॉल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर मौजूद कुछ किसानों को कॉल कर फोन पर बात की और उन्हें अपना समर्थन दिया. ममता ने एकजुटता दिखाते हुए किसानों की उस मांग से सहमति जताई जिसके तहत वो तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. 
RJD ने दिया समर्थन

कृषि बिल के ख़िलाफ़ क़िसानों के आंदोलन का राष्ट्रीय जनता दल ने समर्थन किया है. इसकी घोषणा विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने की. उन्होंने पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा कि शनिवार को पटना के गांधी मैदान में उनकी पार्टी ने एक दिन का धरना का आयोजन किया है. तेजस्वी ने कहा कि कानून बनाने से पहले किसानों से परामर्श करना चाहिए था और अब जो भी हो रहा है. वो दिखाने के लिए हैं.
कड़ी सुरक्षा के बीच अब भी दिल्ली से लगी सीमाओं पर डटे हैं प्रदर्शनकारी


केंद्र के नए तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हजारों किसान शुक्रवार को लगातार नौंवे दिन कड़ी सुरक्षा के बीच राष्ट्रीय राजधानी से लगी सीमाओं पर डटे हैं. सरकार के साथ गुरुवार को बातचीत एक बार फिर बेनतीजा रहने के बाद, प्रदर्शन कर रहे किसानों के संगठन आगे की कार्रवाई को लेकर आज बैठक करेंगे.

उत्तर प्रदेश के प्रदर्शनकारी किसानों ने 'यूपी गेट' के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-9 को जाम कर दिया है. वहीं पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली आने वाले दूसरे प्रवेश मार्गों पर डटे हैं. किसान संगठनों और केन्द्र के बीच अगले दौर की बातचीत शनिवार को हो सकती है. प्रदर्शन के शुक्रवार को नौवें दिन भी जारी रहने के मद्देनजर सिंघु, टिकरी, चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर पर अब भी सुरक्षा कर्मी तैनात हैं. (भाषा)
'सरकार को सात महीने लग गए'

सिंघु बॉर्डर पर इकट्ठा हुए किसान यहीं अपना खाना-पीना-रहना कर रहे हैं. न्यूज एजेंसी ANI से एक किसान ने कहा, 'सरकार को हमारी समस्याएं सुनने और कानून में कमियां देखने में सात महीने लग गए.' 

ये किसान पिछले हफ्ते बुधवार से यहां बैठे हुए हैं और वो कृषि कानून वापस लिए जाने तक यहां बैठने को तैयार हैं.


गुरुवार बेनतीजा रही बैठक

गुरुवार को सरकार के साथ हुई बैठक में सरकार ने किसान कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दिया था, जिससे किसानों ने इनकार कर दिया था. किसानों की मांग है कि सरकार को इन कानूनों में कोई संशोधन करने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि वो चाहते हैं कि सरकार इन कानूनों को ही रद्द कर दे. इस मीटिंग के दौरान दोनों पक्षों की ओर से प्रेजेंटेशन दिया गया और बिंदुवार चर्चा की गई. हालांकि, फिर भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. शनिवार को फिर किसानों के साथ बैठक है.
सिंघु बॉर्डर पर किसानों की बैठक

40 किसान नेता सिंघु बॉर्डर पर शुक्रवार की सुबह मीटिंग कर रहे हैं. वो अभियान को आगे ले जाने पर चर्चा कर रहे हैं. शनिवार को उनकी केंद्र सरकार के साथ फिर मीटिंग है, जिसके लिए वो रणनीति तैयार कर रहे हैं. किसानों ने शनिवार को एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का भी आह्वान किया है.
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