दिल्ली क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस मामले में अब तक 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि यह गिरोह महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की अवैध खरीद, स्टोरेज, पैकिंग, सप्लाई और बिक्री का काम कर रहा था. पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में नकली दवाओं के अलावा अस्पतालों और सरकारी संस्थानों से अवैध तरीके से डायवर्ट की गई दवाएं भी बाजार में पहुंचाई जा रही थीं.
पुलिस ने ये सब किया जब्त
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, आरोपियों और उनसे जुड़े ठिकानों से 588 भरी हुई एंटी-कैंसर दवाओं की वायल, 6 खाली वायल, 7 खाली दवा के डिब्बे और दूसरी दवाओं की 3,021 यूनिट बरामद की गई हैं. इन दवाओं की अनुमानित कीमत करीब 9 करोड़ रुपये बताई गई है. इसके अलावा करीब 50 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, पैकिंग का सामान और दवाओं के लेन-देन का हिसाब रखने वाली रजिस्टर और डायरियां भी मिली हैं.
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, इस मामले में 12 जुलाई 2026 को क्राइम ब्रांच थाने में FIR दर्ज की गई थी.

Fake Anti Cancer Drug Racket Busted: दिल्ली क्राइम ब्रांच का एक्शन
ऐसे बनाया एक्शन प्लान
क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल को 22 जून 2026 को सूचना मिली कि कुछ लोग महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की अवैध तरीके से खरीद और बड़े स्तर पर सप्लाई कर रहे हैं. मामला कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जुड़ा होने की वजह से पुलिस ने सूचना को गंभीरता से लिया. इस दौरान पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और मुंबई में कई संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई और नेटवर्क में शामिल लोगों के बारे में जानकारी जुटाई गई. इसके बाद 11 जुलाई को इंटर स्टेट सेल की सात अलग-अलग टीमें बनाई गईं. इन टीमों ने ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली और नवी मुंबई में कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की.
पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को इस गिरोह के काम करने के तरीके के बारे में कई अहम जानकारी मिली है.
ऐसे करते खेल
पुलिस के मुताबिक, आरोपी मुख्य रूप से तीन तरीकों से एंटी-कैंसर दवाओं का इंतजाम करते थे. इनका पहला तरीका था अनधिकृत स्रोतों से नकली दवाएं हासिल करना. दूसरा, अस्पतालों में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए रखी गई दवाओं को कथित तौर पर चोरी या गबन के जरिए बाहर निकालना. तीसरा, सरकारी संस्थानों और सरकारी गोदामों में सप्लाई की गई दवाओं को कथित तौर पर अवैध तरीके से डायवर्ट करना.
जांच में एक और चौंकाने वाला तरीका सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी पुराने कार्टन और खाली दवा के बॉक्स संभालकर रखते थे और जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल दोबारा पैकिंग में करते थे. दवाओं की असली पहचान छिपाने के लिए बैच नंबर, MRP और दूसरी पहचान संबंधी जानकारी मिटाने की कोशिश की जाती थी. इसके लिए केमिकल जैसे एसीटोन के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है. इसके बाद दवाओं को थर्माकोल बॉक्स, बबल रैप, टेप और पॉलीथिन की मदद से पैक किया जाता था और अलग-अलग शहरों में भेजा जाता था.
पुलिस ने डायरियां बरामद कीं, ये हैं अरोपी
पुलिस ने आरोपियों के पास से रजिस्टर और डायरियां भी बरामद की हैं, जिनमें कथित तौर पर दवाओं की खरीद-बिक्री और पैसों के लेन-देन का हिसाब रखा जाता था. आरोपियों में दिल्ली के लक्ष्मी नगर के रहने वाले अभिषेक वैश्य और शुभम कुमार चौधरी भी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, अभिषेक 2022 से अवैध चैनल के जरिए एंटी-कैंसर दवाओं की खरीद और सप्लाई में शामिल था. उसके ठिकाने से रजिस्टर, डायरी, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, पैकिंग सामग्री, दवाएं और 4 लाख रुपये नकद बरामद किए गए.
पुलिस के मुताबिक, गाजियाबाद के गगन का इस्तेमाल दवाओं की सप्लाई में किया जाता था. वह थोक दवाओं के कारोबार से जुड़ा था और 2023 से अवैध एंटी-कैंसर दवा कारोबार में शामिल बताया गया है. आरोप है कि वह सतीश कुमार से दवाएं लेकर अभिषेक वैश्य तक पहुंचाता था.
गुरुग्राम के मुकेश पर आरोप है कि वह अस्पतालों से एंटी-कैंसर दवाएं हासिल कर उन्हें फार्मासिस्ट और ब्रोकरों तक पहुंचाता था. उसकी गाड़ी से 12 वायल, दूसरी दवाएं, पैकिंग सामग्री और 16.50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए. वहीं नवी मुंबई के आयुष कुमार पर पुलिस ने गगन से एंटी-कैंसर दवाएं लेकर आगे बाजार में सप्लाई करने का आरोप लगाया है. उसके पास से बिना सही बिल और लाइसेंस के एंटी-कैंसर दवाओं की वायल बरामद हुईं. जबकि गाजियाबाद के विश्वास त्यागी पर आरोप है कि वह बिना वास्तविक दवा सप्लाई के बिल तैयार करवाने और कंपनी के बैंक खाते के जरिए पैसों के लेन-देन में मदद करता था.
हैदराबाद से जुड़ी कड़ी
इसके अलावा हरियाणा के झज्जर में मेडिकल स्टोर चलाने वाले परमजीत श्योराण को भी इस नेटवर्क में आरोपी बनाया गया है. उसके यहां से 9 एंटी-कैंसर वायल बरामद हुईं. नोएडा के आनंद कुमार को पुलिस इस सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण बिचौलिया बता रही है. उसके कब्जे और ठिकाने से 337 एंटी-कैंसर वायल और बड़ी संख्या में दूसरी दवाएं बरामद होने की बात कही गई है.
रामदास सतीश कुमार पर एक नामी अस्पताल में काम करने के दौरान मरीजों के लिए रखी एंटी-कैंसर दवाओं को कथित तौर पर बाहर निकालकर आगे सप्लाई करने का आरोप है. मालुगारी श्रीनाथ रेड्डी, जो B.Pharma कर चुका है और एक नामी अस्पताल में नौकरी करता था, पर भी मरीजों के लिए रखी एंटी-कैंसर दवाओं को कथित तौर पर बाहर निकालकर दूसरे आरोपियों तक पहुंचाने का आरोप है.
अस्पतालों के अंदर से भी दवाएं बाहर आने का आरोप
इस पूरे नेटवर्क की जांच में अस्पतालों से दवाओं के कथित डायवर्जन का एंगल सबसे अहम माना जा रहा है. गुरुग्राम के मयंक गर्ग पर आरोप है कि वह अस्पतालों से जुड़े लोगों के जरिए एंटी-कैंसर दवाएं हासिल कर नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाता था. उसके पास से 55 संदिग्ध एंटी-कैंसर वायल मिलीं.
फरीदाबाद के जसवंत शर्मा पर भी अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग से एंटी-कैंसर वायल बाहर निकालकर आगे सप्लाई करने का आरोप है. वह नर्सिंग की पढ़ाई कर चुका है और अस्पताल में नर्सिंग इंचार्ज के तौर पर काम कर चुका था. राजस्थान के अलवर के मनीष शर्मा पर भी अस्पताल में मरीजों के लिए रखे एंटी-कैंसर इंजेक्शन कथित तौर पर बाहर निकालने का आरोप है. उसकी गिरफ्तारी के बाद 5 भरी हुई और 4 खाली वायल बरामद हुईं.
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