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देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक हाईवे! इस NH के ट्रायल को धुरंधर-4 नाम क्यों दिया गया?

इलेक्ट्रिक हाईवे का अब तक छोटे स्तर पर प्रयोग किया जा चुका है, जैसे दिल्ली‑आगरा, दिल्ली‑जयपुर और चेन्नई‑त्रिची रूट पर. ये सभी ट्रायल सफल रहे हैं और कई जगहों पर इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल भी शुरू हो चुका है.

देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक हाईवे! इस NH के ट्रायल को धुरंधर-4 नाम क्यों दिया गया?
इलेक्ट्रिक हाईवे.... दिल्ली से सीधे मुंबई तक यात्रा
  • लगभग 1300 किलोमीटर लंबा देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक हाईवे धुरंधर‑4 ट्रायल के लिए तैयार किया जा रहा है.
  • हाईवे पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन, निर्बाध बिजली आपूर्ति और बेहतर रेस्ट पॉइंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
  • धुरंधर‑4 प्रोजेक्ट में सोलर, विंड और हाइड्रोजन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग किया जाएगा.

देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक हाईवे, जहां बस के जरिए दिल्ली से सीधे मुंबई तक यात्रा की जा सकेगी. इस हाईवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ऐसा आधुनिक आधारभूत ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत ईवी से एक हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की जा सकेगी. इस इलेक्ट्रिक हाईवे का ट्रायल आने वाले कुछ महीनों में किया जाएगा और इसका नाम ‘धुरंधर‑4' रखा गया है. आखिर क्या है धुरंधर‑4 और यह कैसे काम करेगा, आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं.

तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम 

दुनिया में कहीं भी तेल आपूर्ति पर असर पड़ता है, तो उसका सीधा प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ता है. इसी जोखिम को कम करने के लिए सरकार अब परिवहन व्यवस्था में बदलाव की दिशा में काम कर रही है. धुरंधर‑4 उसी सोच का हिस्सा है. दिल्ली से मुंबई तक करीब 1300 किलोमीटर लंबा यह इलेक्ट्रिक हाईवे ट्रायल सिर्फ एक परीक्षण नहीं, बल्कि यह प्रयोग है कि हाईवे पर बिना डीजल और पेट्रोल के वाहन कैसे चलाए जा सकते हैं. अगर यह ट्रायल सफल होता है, तो आने वाले समय में हाईवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेज़ी से बढ़ने की संभावना है.

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क्या खासियत है इलेक्ट्रिक हाईवे की?  

इस पूरे प्रोजेक्ट में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर दिया गया है. पूरे रूट पर कुछ‑कुछ दूरी पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं. इनमें फास्ट चार्जिंग की सुविधा, निर्बाध बिजली आपूर्ति और ड्राइवरों के लिए बेहतर रेस्ट पॉइंट शामिल होंगे, ताकि यात्रा आसान और भरोसेमंद बन सके. नेशनल हाईवे फॉर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अभिजीत सिन्हा के मुताबिक, यह थर्ड‑जेनरेशन चार्जिंग सिस्टम है. उन्होंने बताया कि पहली पीढ़ी में पेट्रोल‑डीजल आधारित सिस्टम था, लेकिन अब इन स्टेशनों पर सोलर, विंड और हाइड्रोजन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल किया जाएगा.

नीति आयोग का अनुमान है कि यदि 2030 तक देश इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के 20 प्रतिशत लक्ष्य को हासिल कर लेता है, तो करीब 6 करोड़ वाहन पेट्रोल‑डीजल की जगह नई ऊर्जा से संचालित होंगे. इन सभी वाहनों, चाहे वे बस हों, ट्रक हों या कार के लिए फास्ट चार्जिंग और लॉजिस्टिक्स की पूरी व्यवस्था भी की जाएगी.

धुरंधर-4 के नाम से क्यों हो रहा है प्रयोग? 

इलेक्ट्रिक हाईवे का अब तक छोटे स्तर पर प्रयोग किया जा चुका है, जैसे दिल्ली‑आगरा, दिल्ली‑जयपुर और चेन्नई‑त्रिची रूट पर. ये सभी ट्रायल सफल रहे हैं और कई जगहों पर इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल भी शुरू हो चुका है. लेकिन धुरंधर‑4 अब तक का सबसे बड़ा और वास्तविक टेस्ट है, क्योंकि इसकी दूरी 1300 किलोमीटर से ज्यादा है. अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो एक ही रूट पर ट्रक, बस और कार—तीनों तरह की इलेक्ट्रिक गाड़ियां चलाई जा सकेंगी. खास बात यह है कि इस बार बसों और ट्रकों पर ज्यादा जोर दिया गया है, क्योंकि देश में सबसे ज्यादा तेल की खपत इन्हीं में होती है और प्रदूषण का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं से आता है. यदि इन्हें इलेक्ट्रिक में बदला जाता है, तो आम लोगों पर दबाव डाले बिना ही परिवहन व्यवस्था में बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है.

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