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ED के 70 साल पूरे, 94% कन्विक्शन रेट, 2.36 लाख करोड़ की संपत्ति अटैच, ड्रग्स और साइबर क्राइम पर बढ़ा फोकस

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के 70वें स्थापना दिवस पर निदेशक राहुल नवीन ने बताया कि एजेंसी ने बदलते आर्थिक अपराधों के अनुरूप अपनी रणनीति को मजबूत किया है. उन्होंने कहा कि ईडी का कन्विक्शन रेट 94 प्रतिशत है और वित्त वर्ष 2025‑26 में रिकॉर्ड 812 चार्जशीट दाखिल की गईं.

ED के 70 साल पूरे, 94% कन्विक्शन रेट, 2.36 लाख करोड़ की संपत्ति अटैच, ड्रग्स और साइबर क्राइम पर बढ़ा फोकस
  • ED ने 70 वर्षों में बैंक फ्रॉड से लेकर क्रिप्टो धोखाधड़ी और साइबर क्राइम तक अपनी जांच प्रक्रिया बदली है.
  • वित्त वर्ष 2025-26 में ईडी ने 812 चार्जशीट दाखिल कर 94 प्रतिशत कन्विक्शन रेट के साथ रिकॉर्ड कार्रवाई की है.
  • अब तक 2.36 लाख करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अटैच की गई है, जिसमें से 63 हजार करोड़ रुपये पीड़ितों को लौटाए गए.
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नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के 70वें स्थापना दिवस के मौके पर ईडी निदेशक राहुल नवीन ने एजेंसी की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर बड़ा और विस्तृत बयान दिया. उन्होंने कहा कि ईडी ने अपने 70 वर्षों का सफर पूरा कर लिया है और यह अवसर केवल जश्न का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आगे की दिशा तय करने का भी है.

कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, राजस्व विभाग के सचिव अरविंद श्रीवास्तव, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू समेत ईडी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

बदलती चुनौतियों के साथ बदला फोकस

ईडी निदेशक ने कहा कि पहले एजेंसी का मुख्य फोकस बैंक फ्रॉड, कॉर्पोरेट घोटाले और रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर था, लेकिन समय के साथ अपराध का स्वरूप बदल गया है. अब क्रिप्टो धोखाधड़ी, साइबर क्राइम, आतंकवाद की फंडिंग और ड्रग्स तस्करी जैसी चुनौतियां सामने हैं. उन्होंने कहा कि इन नए अपराधों से निपटने के लिए ईडी ने अपनी कार्यशैली में बदलाव किया है और खासतौर पर नारकोटिक्स नेटवर्क को फाइनेंशियल तरीके से तोड़ने पर जोर दिया जा रहा है.

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उन्होंने रेड फोर्ट ब्लास्ट केस का उदाहरण देते हुए कहा कि आतंकवाद और जासूसी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ईडी तेजी और सख्ती से कार्रवाई कर रही है.

रिकॉर्ड स्तर पर कार्रवाई, 94% कन्विक्शन रेट

राहुल नवीन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ईडी ने रिकॉर्ड कार्रवाई की. इस दौरान 812 चार्जशीट दाखिल की गईं, जिनमें 155 सप्लीमेंट्री शिकायतें शामिल हैं. यह पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है. उन्होंने दावा किया कि ईडी का कन्विक्शन रेट 94 प्रतिशत है और फिलहाल 2400 से अधिक मामले अदालतों में लंबित हैं, जिनमें जल्द फैसलों की उम्मीद है.

2.36 लाख करोड़ की संपत्ति अटैच, पीड़ितों को राहत

ईडी निदेशक ने बताया कि अब तक कुल 2,36,017 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अटैच की जा चुकी है. केवल पिछले वित्त वर्ष में 81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, जो पिछले साल के मुकाबले 170 प्रतिशत ज्यादा है. उन्होंने कहा कि ईडी की कोशिश सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं है. अब तक 63,142 करोड़ रुपये पीड़ितों, जैसे बैंक, निवेशक और होमबायर्स को वापस दिलाए जा चुके हैं.

उन्होंने PACL लिमिटेड घोटाले का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें 15,581 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाए गए. वहीं, उदयपुर के एक रियल एस्टेट मामले में 200 से अधिक होमबायर्स को उनकी संपत्ति वापस दिलाई गई.

भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा

भगोड़े आर्थिक अपराधी कानून (FEOA) के तहत अब तक 54 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है, जिनमें से 21 को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है और 2178 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है.

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी भूमिका

ईडी अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही है. भारत ARIN-AP (एशिया-प्रशांत एसेट रिकवरी नेटवर्क) की स्टेयरिंग ग्रुप की अध्यक्षता कर रहा है. 2026 में इसकी AGM भारत में और 2028 में Globe प्लेनरी की मेजबानी भी भारत करेगा.

पारदर्शिता और सिस्टम सुधार

ईडी ने जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं. अब QR कोड सिस्टम के जरिए समन की जांच संभव है, जिससे फर्जी समन और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी.

'किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं'

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि ईडी को दी गई ताकत किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि देश को आर्थिक अपराधों से बचाने और आम आदमी के पैसे को सुरक्षित रखने के लिए है. उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध कैंसर की तरह हैं और इनका इलाज सख्ती से ही संभव है. उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 तक ईडी ने 2.36 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है, जिनमें से करीब 63 हजार करोड़ रुपये असली हकदारों को लौटाए गए हैं.

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पंकज चौधरी ने बढ़ते साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली धोखाधड़ी पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इन अपराधों से निपटने के लिए एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और सूचना साझा करना जरूरी है. अंत में उन्होंने दोहराया कि मोदी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति है और देश का पैसा लूटने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा.

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