- ट्रेन में सफर करते समय कुछ वेबसाइट्स और ऐप्स से खाना बुक करते हैं तो सावधान रहें
- IRCTC अब ऐसे ऐप्स और वेबसाइट्स पर शिकंजा कस रहा है जो लिस्ट में नहीं हैं
- कुछ निजी वेबसाइट्स और ऐप्स नाम और ब्रांड का गलत इस्तेमाल कर यात्रियों को खाना उपलब्ध कराने का दावा कर रही थीं.
अगर आप भी ट्रेन में सफर करते समय कुछ वेबसाइट्स और ऐप्स से खाना ऑर्डर करते हैं तो सावधान हो जाएं. इससे आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. आप बीमार होने के साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार भी हो सकते हैं. आपका पर्सनल डेटा किसी और के पास जा सकता है. IRCTC अब ऐसे ऐप्स और वेबसाइट्स पर शिकंजा कस रहा है. उसका कहना है कि कुछ निजी वेबसाइट्स और ऐप्स उसके नाम और ब्रांड का गलत इस्तेमाल कर यात्रियों को खाना उपलब्ध कराने का दावा कर रही थीं. दरअसल ये प्लेटफॉर्म तो आईआरसीटीसी की लिस्ट में हैं ही नहीं.
ये यात्रियों से पीएनआर, ई-मेल, मोबाइल नंबर और पैमेंट संबंधी जानकारी लेकर ऑर्डर ले रही थीं. अब भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) ने अवैध ई-कैटरिंग वेबसाइटों पर शिकंजा कसा है. उसने कई अनधिकृत वेबसाइटों और ऐप्स की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की है.
पहले चेतावनी, फिर कानूनी कदम
अधिकारियों का कहना है कि जब उनको ये बात पता चली तो कड़े कदम उठाए गए. पहले चेतावनी दी गई और फिर कानूनी कदम उठाए गए. IRCTC ने सबसे पहले अवैध वेबसाइट्स और ऐप्स को 18 फरवरी को कानूनी नोटिस भेजा. इस पर जब कोई सकारात्मक असर नहीं दिखा तो फिर 16 मार्च को पहली आपराधिक और 11 अप्रैल को दूसरी आधिकारिक शिकायत दर्ज की. इसके बाद अवैध ऑपरेटरों की पहचान कर कार्रवाई की गई.
रेलवे ने इन वेबसाइटों पर लिया एक्शन
- railrestro.com
- railrestro.in
- railmitra.com
- travelkhana.com
- trainscafe.com
- dibrail.com
- railfood.net
- comesum.com
- travelerfood.com
- foodontrack.in
- ecatering.app
- khanaonline.in
- trainway.in
- railmeal.com
- trainmenu.com
यात्रियों के लिए क्या खतरा?
IRCTC के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा, खाने की क्वालिटी और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देशभर में संचालित अवैध ई-कैटरिंग प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ यह अभियान शुरू किया गया है. इसका मुख्य मकसद यात्रियों को दो बड़े खतरे से बचाना है. पहला खतरा फूड क्वालिटी और हेल्थ के जोखिम से बचाना है. दरअसल ये अनऑर्थराइज्ड प्लेटफॉर्म ऐसे रेस्तरां से खाना लेते हैं जो भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मानकों का पालन नहीं करते. हो सकता है कि ये खाना साफ-सफाई से नहीं बनाया गया हो. डिलीवरी स्टाफ और रसोई कर्मचारियों की अनिवार्य स्वास्थ्य जांच नहीं होती. ऐसा खाना खाने से यात्रियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है.
ऑनलाइन फ्रॉड के हो सकते हैं शिकार
दूसरा खतरा है साइबर और वित्तीय जोखिम. दरअसल, ऑर्डर बुकिंग के लिए यात्रियों से पीएनआर, मोबाइल नंबर, ई-मेल और भुगतान की जानकारी मांगी जाती है. इसमें फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा चोरी का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही, खाना नहीं मिलने या ऑर्डर कैंसिल होने पर में कोई शिकायत और जवाबदेही की व्यवस्था नहीं होती है, जिससे यात्रियों को सीधे पैसे का लॉस होता है.
यही वजह है कि यात्रियों को IRCTC की लिस्ट में शामिल सिर्फ आधिकारिक ई-कैटरिंग वेबसाइट, फूड ऑन ट्रैक मोबाइल ऐप या अधिकृत फूड एग्रीगेटर्स और विक्रेताओं के जरिए ही खाना बुक करने की सलाह दी गई है. इससे सिक्योर पेमेंट, साफ खाना और शिकायत निवारण की सुविधा सुनिश्चित होती है.
IRCTC से जुड़े ये बड़े ब्रांड्स
आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग नेटवर्क से कई बड़े फूड ब्रांड जुड़े हैं. इसमें डोमिनोज, पिज्जा हट, मैकडॉनल्ड्स, केएफसी, हल्दीराम, बीकानेरवाला, बेहरोज बिरयानी, बिरयानी बाय किलो, फासोस जैसे ब्रांड शामिल हैं.
यात्रियों की सीट तक पहुंचता है खाना
आईआरसीटीसी का कहना है कि अप्रैल 2026 तक उसकी ई-कैटरिंग सेवा 400 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर थी. इससे 629 सीधे विक्रेता और 13 अधिकृत फूड एग्रीगेटर्स के जरिए 5,604 से ज्यादा सेलर जुड़े हुए थे. इस सुविधा के जरिए आरक्षित ट्रेनों के यात्रियों को सीट तक खाना पहुंचाया जाता है. आकंड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में इस सेवा के जरिए प्रतिदिन औसतन 1.55 लाख से ज्यादा खाने के ऑर्डर किए गए हैं.
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