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This Article is From Dec 16, 2025

साल 2025 में महाराष्ट्र का ये शहर बना 'डिजिटल अरेस्ट' का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट, 11 महीनों में लोगों ने गंवाए 6 करोड़ रुपये

साल 2025 की सबसे बड़ी डिजिटल ठगी नागपुर में हुई है. यहां एक ही व्यक्ति ने 1.51 करोड़ रुपये गंवा दिए हैं. इन घोटालों में अंतर्राष्ट्रीय गिरोहों और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल का पर्दाफाश हुआ है.

साल 2025 में महाराष्ट्र का ये शहर बना 'डिजिटल अरेस्ट' का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट, 11 महीनों में लोगों ने गंवाए 6 करोड़ रुपये
नागपुर बनी साइबर फ्रॉड की राजधानी! एक ही व्यक्ति ने गंवाए 1.51 करोड़ रुपये (सांकेतिक तस्वीर)

Maharashtra News: साल 2025 को साइबर अपराध के इतिहास में 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) घोटालों का वर्ष कहा जा रहा है. देश के कई शहरों में हजारों लोग इस हाई-टेक धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं. लेकिन इस धोखाधड़ी का सबसे बड़ा उदाहरण महाराष्ट्र के नागपुर (Nagpur) शहर में सामने आया है. अकेले नागपुर में, इस साल के शुरुआती 11 महीनों (जनवरी से नवंबर) में, निवासियों ने 14 बड़े मामलों में सामूहिक रूप से लगभग ₹6 करोड़ गंवाए हैं.

अक्टूबर महीने में, एक ही नागरिक को RTGS ट्रांसफर के जरिए 1 करोड़ 51 लाख रुपये गंवाकर फंसाया गया, जो इस साल की सबसे बड़ी डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी थी.

कैसे फंसाते हैं ये शातिर जालसाज?

'डिजिटल अरेस्ट' नाम की यह धोखाधड़ी, लोगों के मन में डर और घबराहट पैदा करके की जाती है. जालसाज तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर निर्दोष नागरिकों को शिकार बनाते हैं. ये जालसाज WhatsApp कॉल या वीडियो कॉल के जरिए लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाते हैं. वे खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी अधिकारी बताते हैं. अक्सर वे कॉल पर किसी दफ्तर या पुलिस स्टेशन जैसा फ़ेक सेटअप दिखाते हैं ताकि पीड़ित को सच लगे. 

वे पीड़ित को झूठ बताते हैं कि आपके बैंक अकाउंट या पहचान का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों या बड़े घोटालों में हुआ है. आपके खाते में अपराध की रकम आई है. आपका कोई करीबी रिश्तेदार कानून की गिरफ्त में है और मुसीबत में है. डर का माहौल बनाकर, जालसाज 'कानूनी कार्यवाही से बचने' या 'समस्या सुलझाने' के नाम पर तुरंत बड़ी रकम देने के लिए दबाव बनाते हैं.

अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन और क्रिप्टोकरेंसी

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन घोटालों के पीछे क्रिप्टोकरेंसी और अंतर्राष्ट्रीय गिरोहों का हाथ हो सकता है. ठगी गई रकम को अक्सर क्रिप्टो या सीमा पार के माध्यमों से तुरंत निकाल लिया जाता है, जिससे इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है.

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह

किसी भी अपरिचित नंबर से आए पुलिस या सरकारी अधिकारी के कॉल पर कभी भरोसा न करें. याद रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी या बैंक कभी भी WhatsApp/Video Call पर पैसे ट्रांसफर करने या व्यक्तिगत जानकारी (जैसे OTP, PIN) देने के लिए नहीं कहता.

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Sanjay Tiwari
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