वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने NDTV के मंच पर कहा कि सरकार ने कभी भी छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को रोकने की कोशिश नहीं की. उन्होंने ये भी कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दोबारा परीक्षा के नतीजों के बाद इस्तीफे की पेशकश करके समझदारी भरा फैसला लिया. NDTV प्रॉफिट बिजनेस लीडरशिप अवार्ड्स 2026 को संबोधित करने के बाद NDTV ग्रुप के CEO और एडिटर इन चीफ के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विशाल छात्र आंदोलन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसे मुद्दों पर पहली बार बात की.
राहुल कंवल ने अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर जबरदस्त प्रदर्शन हुए, क्या आप और सरकार इस बात से राहत महसूस कर रहे हैं कि फिलहाल प्रदर्शन खत्म हो गया? क्या यह आपके लिए राहत का बड़ा पल है?
इस सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा, 'राहत से ज्यादा, मुझे लगता है कि इसने हमें महसूस कराया कि हमें जवाब देना था और हमने अपने युवाओं की आवाज का जवाब दिया, जो एक जिम्मेदार सरकार के लिए उचित है. इसलिए हमारी प्रतिक्रिया सही थी.'

युवाओं के आंदोलन को कितना सही मानती हैं वित्त मंत्री?
राहुल कंवल ने उनसे छात्र आंदोलनों को लेकर भी बात की. उन्होंने पूछा, 'आप जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से आती हैं. आपने बड़े होकर छात्र आंदोलन देखे हैं. आपने तिहाड़ जेल में बंद लोगों के लिए खाना बनाया है. जब ये युवा Gen Z प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे, दिल्ली, मुंबई, पूरे देश में, और सरकार के खिलाफ ऐसी बातें कही गईं, जो पिछले 12 सालों में नहीं सुनी गईं, तो आपने क्या सोचा? क्या इसने आपको पूरी तरह चौंका दिया?'
वित्त मंत्री ने कहा कि हर पीढ़ी युवावस्था में विरोध-प्रदर्शन करती है और साथ ही कहा कि सरकार की जिम्मेदारी ये सुनिश्चित करना था कि दोबारा परीक्षा समय पर हो ताकि छात्रों का एक एकेडमिक साल बर्बाद न हो.
उनसे जब ये पूछा गया कि क्या वो छात्रों की ओर से की गई सरकार की आलोचना को स्वीकार करती हैं कि सरकार ने प्रदर्शन की गंभीरता और संदेश को पहचानने में बहुत देर कर दी, और प्रदर्शनकारियों की मांगों को सुनने में बहुत समय लगा..... इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से निपटने के सरकार के तरीके का बचाव किया और कहा, 'हमने किसी भी समय विरोध-प्रदर्शन को रोकने की कोशिश नहीं की.' उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET के री-एग्जाम के नतीजे आने के बाद इस्तीफे की पेशकश करके समझदारी भरा फैसला लिया.
'सरकार को Gen-Z की भाषा में बात करनी चाहिए'
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का मानना है कि सरकार को Gen-Z की भाषा में बात करनी चाहिए. NDTV प्रॉफिट बिजनेस लीडरशिप अवार्ड्स 2026 के मंच पर उन्होंने कहा कि सरकारी संदेश बहुत अनौपचारिक नहीं हो सकते क्योंकि सरकार के हर बयान को अदालत में परखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि बयानों में स्पष्टता के साथ-साथ कानूनी नजरिये से सटीकता का भी ध्यान रखना चाहिए और कानूनी दायरे में रहना चाहिए.

देश में मेडिकल कॉलेज बढ़े, MBBS और PG की सीटें भी बढ़ीं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगे बताया कि देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 2014 में 723 से बढ़कर 1,340 हो गई है, जबकि कॉलेजों की संख्या 36,600 से बढ़कर 52,000 हो गई है. उन्होंने कहा कि देश में अब 2,100 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 1.3 लाख MBBS सीटें और 85,000 पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटें जोड़ी गई हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में AIIMS की संख्या आठ से बढ़कर 23 हो गई है. उन्होंने इंडस्ट्रीज से युवा टैलेंट में खुलकर निवेश करने का आग्रह किया.
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