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नोएडा से दिल्ली तक तेज रफ्तार, नए अंडरपास से मयूर विहार, त्रिलोकपुरी-खिचड़ीपुर की ओर जाना होगा आसान

मयूर विहार की इस रेडलाइट के पास जाम इसलिए लगता है क्यों कि अलग-अलग दिशाओं से आने वाला ट्रैफिक जंक्शन पर आकर मिलता है. अंडरपास बनने से ट्रैफिक चौराहे पर बिना रुके आगे बढ़ सकेगा. 

नोएडा से दिल्ली तक तेज रफ्तार, नए अंडरपास से मयूर विहार, त्रिलोकपुरी-खिचड़ीपुर की ओर जाना होगा आसान
मयूर विहार फेज-1 से निकलेगा नया अंडरपास. (AI इमेज)
  • मयूर विहार फेज-1 के क्राउन प्लाजा के पास दिल्ली-यूपी रोड पर नया अंडरपास बनाए जाने की योजना है
  • प्रस्तावित अंडरपास की लंबाई लगभग 500 मीटर होगी और इसके निर्माण में 1 करोड़ से ज्यादा खर्च आएगा
  • अंडरपास का मकसद जंक्शन पर अलग-अलग दिशाओं से आने वाले ट्रैफिक को बिना रुके आगे बढ़ाना है

दिल्ली के विकास को रफ्तार देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है. अब मयूर विहार में नया अंडरपास बनने जा रहा है, इसके बनने के बाद डीएनडी की तरफ से चिल्ला, त्रिलोकपुरी की तरफ जाना बहुत ही आसान हो जाएगा. साथ ही दिल्ली- यूपी रोड पर भी फ्लाईओवर के नीचे आवाजाही आसान हो जाएगी. ये अंडरपास बनने जा रहा है मयूर विहार फेज-1 में क्राउन प्लाजा के पास दिल्ली-यूपी रोड पर. 

मयूर विहार में बनेगा नया अंडरपास

मयूर विहार में दिल्ली-यूपी रोड के क्राउन प्लाजा की लाल बत्ती पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक करता है. पिछले कुछ सालों में इस रेड लाइट पर सुबह-शाम वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा रहता है. इस जाम से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए ही नया अंडरपास बनाया जाएगा. 

500 मीटर के अंडरपास से मिलेगी जाम से राहत

इस अंडरपास की लंबाई 500 मीटर होगी.इसे बनाने में करोड़ से ऊपर का खर्च आने का अनुमान है. मयूर विहार में प्रस्तावित अंडरपास का मकसद बिजी जंक्शन पर होने वाली आवाजाही से सीधे निकलने वाले ट्रैफिक को अलग करना है.यह जंक्शन DMRC के एलिवेटेड कॉरिडोर के पास में स्थित है. PWD विभाग ने इस चौराहे पर भारी ट्रैफिक और बार-बार लगने वाले जाम की पहचान कर ली है.  

मयूर विहार की इस जगह पर जाम इसलिए लगता है क्यों कि अलग-अलग दिशाओं से आने वाला ट्रैफिक जंक्शन पर आकर मिलता है. अंडरपास बनने से ट्रैफिक चौराहे पर बिना रुके आगे बढ़ सकेगा. 

अंडरपास का काम शुरू होने में लगेगा समय

हालांकि अंडरपास के काम में थोड़ा वक्त लगेगा, क्यों कि इस प्रोजेक्ट पेड़ों और जमीन से जुड़े पहलुओं का सर्वेक्षण सड़क विकास से जुड़ी एजेंसी को करना होगा. साथ ही ये भी देखना होगा कि इस प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य के दौरान बिजली, पानी, गैस, दूरसंचार और अन्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें. इसके लिए प्लानिंग करनी होगी. 

पेड़ों के सर्वे के बाद आगे बढ़ेगा काम

प्रस्तावि प्रोजेक्ट एरिया में जितने भी पेड़ मौजूद हैं. पहले उनकी गिनती होगी और उनकी क्या स्थिति है इसका भी सर्वे किया जाएगा. ये जानना होगा कि ये पेड़ किस प्रजाति के हैं, कितने मोटे और जमीन में कितने फैले हुए हैं. इनकी हेल्थ और जगह और तस्वीरों का विवरण तैयार किया जाएगा. इन पेड़ों को नंबर देकर चिह्नित किया जाएगा. उनकी डिटेल मैप में दर्ज की जाएगी. कोशिश रहेगी कि पहले पेड़ों को बचाने की योजना बनाई जाए.

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