- दिल्ली सरकार ने शहर में BS6 मानकों के अनुरूप न होने वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों पर पाबंदी लगा दी है.
- वाहनों की कड़ी जांच के कारण दिल्ली की सीमाओं पर भारी ट्रैफिक जाम और लंबी कतारें बनी हुई हैं.
- यात्रियों ने बताया कि पाबंदियों के कारण सफर में लगने वाला समय बढ़ गया है और ईंधन की खपत बढ़ी है.
दिल्ली में बढ़ता हुआ प्रदूषण लोगों को परेशान कर रहा है. दिल्ली सरकार ने शहर में BS-6 पेट्रोल और डीजल वाहनों पर पाबंदी लगा दी है. जिससे शहर में वाहनों की लगातार चेकिंग की जा रही है. जिससे शहर की सीमाओं पर एक नई समस्या खड़ी हो गई है. भारी ट्रैफिक जाम, लंबी कतारें और घंटों तक वाहनों का एक ही जगह पर खड़े रहना पड़ रहा है. मंगलवार सुबह से ही चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर जहां से दिल्ली में एंट्री होती है, यहां से NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में वहां के हालात और लोगों की राय सामने आई है. ट्रैफिक पुलिस की तरफ से वाहनों की BS6 अनुपालन जांच की जा रही थी, जिसके चलते कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया और गाड़ियां रेंगने लगीं. जो वाहन तय मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे, उन्हें वापस लौटा दिया गया.
दिल्ली में प्रदूषण के लिए पाबंदियां
दिल्ली में इन पाबंदियों का मकसद राष्ट्रीय राजधानी में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है, लेकिन जमीनी हालात को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या अधिकारियों की तरफ से की जा रही लंबी जांच और ट्रैफिक जाम, इस पूरी कवायद के मूल उद्देश्य को ही कमजोर कर रहे हैं. ट्रैफिक में फंसे यात्रियों ने NDTV को बताया कि इन पाबंदियों की वजह से उनके रोज के सफर का समय काफी बढ़ गया है. इससे ईंधन की खपत ज्यादा हो रही है और नतीजतन, प्रदूषणभी बढ़ रहा है. काम पर जा रहे प्रभजोत ने बताया कि हालात बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं, खासकर त्योहारी सीजन के दौरान, जब वैसे भी सड़कों पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक होता है. उन्होंने कहा कि सफर में लगने वाले अतिरिक्त समय ने लोगों की पहले से ही व्यस्त दिनचर्या को और मुश्किल बना दिया है, क्योंकि रास्ते में बार-बार वाहनों को रोका जा रहा है.

40 मिनट का सफर 1 घंटे में हो रहा
गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद एक अन्य यात्री, अविनाश ने बताया कि उनके सफर के समय में कितना ज्यादा इजाफा हुआ है. आमतौर पर मुझे अपने ऑफिस पहुंचने में 41 मिनट लगते हैं. आज इसमें 1 घंटा 20 मिनट लग रहे हैं. आप ही बताइए, क्या मेरे ईंधन की खपत बढ़ी है या नहीं?. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वाहन इसी तरह ट्रैफिक में फंसे रहेंगे, तो इन पाबंदियों से लंबे समय में क्या फायदा होगा?. अविनाश ने कहा दिल्ली आने-जाने वाले कई वाहन पहले से ही BS6 मानकों के अनुरूप हैं. उन्होंने सवाल किया कि क्या लागू की गई यह मौजूदा व्यवस्था, लंबे समय के लिए कोई प्रभावी समाधान है भी या नहीं? हालांकि सभी यात्री इन पाबंदियों के आलोचक नहीं थे.

गाजीपुर बॉर्डर पर परेशान हो रहे यात्री
गाजीपुर से गुजर रहे अश्वनी ने कहा कि ऐसी नीतियों का असर दिखने में समय लगता है, इसलिए लागू होने के महज दो दिन बाद ही उन पर कोई राय नहीं बनानी चाहिए. उन्होंने बताया कि उन्हें इन पाबंदियों के बारे में पहले से पता था और उन्होंने उसी हिसाब से अपनी यात्रा की योजना बनाई थी. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण से निपटने में नागरिकों को भी अपना योगदान देने के लिए तैयार रहना चाहिए. चिल्ला बॉर्डर पर ही अशोक नाम के एक यात्री ने बताया कि उनके वाहन को इसलिए रोक दिया गया क्योंकि वह BS6 मानकों को पूरा नहीं करता था. इसके बाद डेंटल अपॉइंटमेंट होने के बावजूद उन्हें वापस लौटने के लिए कह दिया गया है. अशोक ने सुझाव दिया कि सरकार को केवल पुराने वाहनों पर पाबंदी लगाने के बजाय, उन्हें स्क्रैप करने पर विचार करना चाहिए. साथ ही मालिकों को मुआवजा देना चाहिए ताकि वे नए और पर्यावरण के अनुकूल वाहन खरीद सकें.

दिल्ली में AQI 400 पार
दिल्ली में लगी पांबदियों से दोनों बॉर्डर के हालात अधिकारियों के सामने एक मुश्किल सवाल खड़ा करते हैं. क्या प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर पाबंदी लगाने से अपना मकसद हासिल किया जा सकता है, अगर इसके लागू होने की वजह से सैकड़ों वाहन घंटों तक सड़कों पर रेंगते रहें या खड़े रहें? दिल्ली में मंगलवार सुबह AQI का लेवल 400 पार कर गया है. दिल्ली की हवा की गुणवत्ता लगातार 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में बनी हुई है, ऐसे में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का एक अहम हिस्सा है.
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हालाँकि, बॉर्डर पॉइंट्स पर बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट और वाहनों की तेजी से जांच होना भी उतना ही जरूरी है. यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता सड़कों पर लगने वाला अतिरिक्त समय है. लेकिन जहरीली हवा में घुट रहे इस शहर के लिए बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रदूषण रोकने के लिए उठाया गया कदम, अनजाने में उसी समस्या को और तो नहीं बढ़ा रहा, जिसे हल करने के लिए इसे बनाया गया था?.
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