- दिल्ली जिमखाना क्लब की लीज भारत सरकार ने Clause 4 के तहत सार्वजनिक जरूरत के कारण समाप्त कर दी है
- क्लब की संपत्ति लगभग 27 एकड़ में फैली है और यह लुटियंस जोन के अति संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है
- पूर्व IAS अधिकारी अशोक खेमका ने सरकार के इस फैसले को साहसिक बताया और अभिजात वर्ग के विरोध की संभावना जताई
दिल्ली जिमखाना क्लब की लीज को खत्म करने की खबर सोशल मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सुर्खियां हैं. अब लीज कैंसिल के खिलाफ क्लब ने हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है. हालांकि, करीब 27 एकड़ में फैले लुटियंस जोन के इस प्रभावशाली क्लब को लेकर तमाम बातें सामने आ रही हैं. जिमखाना क्लब के पहले सदस्य बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह भी रहे हैं. अब भी तमाम नेता और प्रभावशाली नौकरशाह इसके सदस्य हैं, लेकिन अब इस विवाद में हरियाणा कैडर के पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह भी कूद गए हैं.
पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका सपोर्ट में
केंद्र सरकार के मुखर आलोचक समझे जाने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने अपने एक्स पर लिखा कि दिल्ली जिमखाना क्लब की लीज को खत्म करना केंद्र सरकार का बहुत साहसिक कदम है. क्लब की 10000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत का है. हालांकि, सरकार के इस फैसले का अभिजात वर्ग विरोध करेगा. सवाल ये है कि क्या मोदी सरकार अपने इस फैसले पर अडिग रहती है या संभ्रांत और प्रभावशाली वर्ग के सामने झुक जाएगी?

किरन बेदी हो गईं भावुक
दिल्ली जिमखाना क्लब के बारे में अलग-अलग राय लोग सोशल मीडिया पर दे रहे हैं. बीजेपी की पूर्व नेता और पुलिस अधिकारी रहीं किरन बेदी ने लिखा कि लीज कैंसिल करने के फैसले पर दोबारा विचार होना चाहिए. अरुण जेटली ने यहां एक पूल का निर्माण करवाया था और यहां बेहतरीन टेनिस मैच खेले. इस जगह से बहुत सारी पुरानी यादें जुड़ी हुईं हैं. दिल्ली जिमखाना क्लब सिर्फ एक संपत्ति नहीं, बल्कि हमारी संस्थागत और खेल विरासत का हिस्सा है.

प्रभु चावला ने दिया जवाब
किरन बेदी के एक्स का जवाब देते मशहूर पत्रकार प्रभु चावला लिखते हैं, 'सरकार से वित्त पोषित या समर्थित किसी भी संस्थान या क्लब को अपनी सुविधाओं का सीमित और चयनात्मक उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. दिल्ली जिमखाना, गोल्फ क्लब आदि पूरे देश में बाबुओं द्वारा मुफ्त या रियायती दरों पर उपलब्ध कराई गई विशाल भूमि पर चलते हैं, जो केवल बाबुओं और उनके साथियों के लिए ही होती है. अन्य लोगों को सदस्यता के लिए अपने पोते-पोतियों के जन्म तक इंतजार करना पड़ता है. अब जब उन्हें अच्छा वेतन मिल रहा है, तो उन्हें निजी क्लबों में शामिल होने दें, जहां वे नेटवर्किंग के लिए अपने संपर्कों का उपयोग कर सकें.'
Any institute or a club funded or supported by government can't be allowed restrictive and selective use of its facilities. Delhi Gymkhana, Golf Clubs etc all over the country run on free or subsidised huge land parcels provided by the babus ,for the babus and their cohorts… https://t.co/AKhjKQ0FOh
— PrabhuChawla (@PrabhuChawla) May 23, 2026
प्रभु चावला का जवाब देते पूर्व राजदूत KC सिंह लिखते हैं कि 1947 के बाद नौकरशाहों की पीढ़ियों ने निजी क्षेत्र की तुलना में बहुत कम वेतन पर नौकरी की है. क्लब के जरिए ही उनको खेलकूद और रियायती दरों पर खाने पीने का सामान उपलब्ध होता है. क्लब ने ही नौकरशाहों पर अमीर लोगों पर निर्भर रहने से बचाया है.
क्यों हुआ जिमखाना क्लब की लीज कैंसिल
दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक खाली करने को कहा गया है. देश के सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले इस क्लब के सबसे पहले सदस्यों में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह, मशहूर लेखक खुशवंत सिंह के अलावा कई ताकतवर सियासी नेता भी हैं. शुक्रवार को भारत सरकार के आवास विकास मंत्रालय की ओर से जिमखाना क्लब के सचिव को लिखी गए पत्र में कहा गया है कि सफदरजंग रोड में Imperial Delhi Gymkhana Club Ltd. को सामाजिक व खेल क्लब चलाने के लिए लीज पर दिया गया था. चूंकि यह परिसर दिल्ली के अति संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में है. अब सार्वजनिक सुरक्षा और जरूरी आधारभूत ढांचे के लिए इसकी तत्काल आवश्यकता है. इस पत्र में लीज डीड के Clause 4 का जिक्र करते लिखा गया है कि यदि परिसर की "सार्वजनिक प्रयोजन" के लिए जरूरत हो तो Lessor को पुनः कब्जा करने का अधिकार है. इसलिए Clause 4 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारत के राष्ट्रपति ने लीज समाप्त कर दी है और तत्काल प्रभाव से परिसर पर पुनः कब्जे का आदेश दिया है.
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