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दिल्‍ली के मुस्‍तफाबाद का नाम बदलने की तैयारी, बीजेपी विधायक मोहन सिंह बिष्‍ट लाएंगे प्रस्‍ताव

भारतीय जनता पार्टी के विधायक मोहन सिंह बिष्ट एनडीटीवी संग बातचीत में कह चुके हैं कि नाम बदलने से किसी को क्या दिक्कत है.

दिल्‍ली के मुस्‍तफाबाद का नाम बदलने की तैयारी, बीजेपी विधायक मोहन सिंह बिष्‍ट लाएंगे प्रस्‍ताव
बीजेपी विधायक मोहन सिंह बिष्ट
नई दिल्ली:

दिल्‍ली के मुस्‍तफाबाद इलाके का नाम बदलने की तैयारी हो रही है. इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी के विधायक मोहन सिंह बिष्‍ट आज प्रस्ताव लाएंगे. मोहन सिंह बिष्ट इससे पहले भी कह चुके हैं कि मुस्तफाबाद के नाम बदलने की तो हम इस सीट का नाम जरूर बदलेंगे. नाम बदलने की बात करने की एक ठोस वजह भी है. एक तरफ 58 फीसदी लोग हैं दूसरी तरफ 42 फीसदी लोग हैं. ऐसे में आप ही बताएं किसकी बात हमें पहले सुननी चाहिए. हमें लगता है कि हमे पहले 58 फीसदी लोगों का सम्मान करना चाहिए. 

मुस्तफाबाद इलाके का नाम क्या होगा?

मुस्तफाबाद का नया नाम शिवपुरी या शिवविहार रखा जा सकता है. MLA बिष्ट एनडीटीवी संग बातचीत में कह चुके हैं कि नाम बदलने से किसी को क्या दिक्कत है. 2008 के बाद जब मैं दूसरी सीट पर चला गया तब उसका नाम बदलकर मुस्तफाबाद किया गया. नाम बदलेंगे हम. मुस्तफाबाद के नाम से ना वहां गाड़ियां जाती हैं ना कोई टैक्सी जाती है. वहां जो भीड़ भाड़ है उसे भी ठीक करेंगे. भीड़भाड़ भी ठीक करेंगे बुल्डोजर भी चलाएंगे.

जगहों के नाम बदलने पर सियासत

देशभर में जगहों और सड़कों के नाम बदलने को लेकर सियासत होती रहती है. पिछले दिनों बीजेपी राज्य सभा सांसद दिनेश शर्मा के दिल्ली स्थित आवास तुगलक लेन का नाम बदलने से भी सियासी घमासान हुआ था. दिनेश शर्मा ने नई दिल्ली स्थित नए आवास 6 तुगलक लेन में गृह प्रवेश किया था. बीजेपी सांसद ने अपने घर के बाहर लगे नेम प्लेट में तुगलक लेन से पहले स्वामी विवेकानंद मार्ग लिखा है. सांसद ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ नए घर की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट की थीं. पोस्ट में तुगलक लेन को स्वामी विवेकानंद मार्ग के नीचे ब्रेकेट में लिखा गया था. जैसे ही उनकी ये तस्वीरें आई वैसे ही विपक्ष वो विपक्ष के निशाने पर आ गए.

दिल्ली में कैसे बदला जाता है किसी जगह का नाम 

अगर किसी जगह का नाम बदलना है तो इसके लिए एनडीएमसी को एक प्रस्ताव जाता है. फिर इस पर एनडीएमसी की 13 सदस्य कमेटी चर्चा करती है कि जो नाम सुझाया गया है वो क्यों रखा जाए. जगह के इतिहास को देखा जाता है. फिर से इस प्रस्ताव को एनडीएमसी काउंसिल में रखा जाता है, जिसके बाद बदलने गए नाम पर फाइनल मुहर लगती है. इसके बाद ही नाम बदला जा सकता है और फिर उस जगह को नए नाम से जाना जाता है.

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