- दिल्ली में पीडब्ल्यूडी ने कमजोर और गिरने वाले पेड़ों की पहचान के लिए 31 मई तक अभियान चलाने का निर्देश दिया है
- कमजोर पेड़ों की फोटो ई-फॉरेस्ट पोर्टल पर अपलोड करनी होगी ताकि संभावित हादसों को रोका जा सके
- कमजोर पेड़ हटाने के बाद दस नए पेड़ लगाने और सात साल तक उनकी देखभाल करना अनिवार्य है
दिल्ली में इन दिनों खतरनाक पेड़ों की खोज हो रही है. क्या आपके आसपास भी कोई ऐसा पेड़ है, जो कमजोर हो गया है और गिरने की स्थिति में है? दरअसल, पीडब्ल्यूडी ने 31 मई तक खतरनाक या कमजोर पेड़ों की पहचान करने का अभियान चलाने का फैसला किया है. सभी जोन को निर्देश दिया गया है कि अपने अपने क्षेत्र के उन पेड़ों की पहचान करें जो कमजोर या गिरने वाले हों. उन पेड़ों की फोटो लेकर ई-फ़ारेस्ट पोर्टल पर अपलोड करना होगा, ताकि पिछले साल कालका जी जैसे हादसे इस साल न होने पाए.
...ताकि फिर न हो कालकाजी जैसा हादसा
पीडब्ल्यूडी ने निर्देश दिया है कि अगर कमजोर पेड़ किसी जगह रह जाते हैं और उनसे किसी प्रकार दुर्घटना होती है, तो संबंधित अधिकारी उसके लिए ज़िम्मेदार होगा. दिल्ली में पीडब्ल्यूडी के पास 1400 किमी तक की सड़कें हैं. इन पर कितने पेड़ लगे हैं, इसकी गिनती फ़िलहाल चल रही है. लेकिन बारिश के मौसम को देखते हुए संभावित दुर्घटना पेड़ों की वजह से न हो इसके लिए ये कदम उठाया गया है. किसी भी इलाके के खतरनाक या कमजोर पेड़ों को हटाने के बाद दस पेड़ लगाने जरूरी होते हैं. इनकी 7 साल तक देखभाल भी जरूरी है. पिछले साल कालका जी में एक नीम का पेड़ बारिश की वजह से गिर गया था, जिससे पिता और बेटी चपेट में आ गए थे. पिता की मौत हो गई थी और बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई थी. इस तरह की घटना दोबारा न हो इसके लिए सरकार ने 15 मई तक खतरनाक पेड़ों की पहचान करने को कहा है.

हरियाली बढ़ाने पर जोर
दिल्ली में हरियाली बढ़ाने, रख-रखाव बेहतर करने के लिए दिल्ली सरकार आरडब्ल्यूए, एनजीओ और सोसायटी को 100 प्रतिशत तक अनुदान देगी. यही नहीं पार्क या उद्यान के रखरखाव मद में प्रति एकड़ सहायता 2.55 लाख से बढ़ाकर 3.8 लाख रुपये करने का प्रस्ताव भी शामिल किया जा रहा है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि बढ़ती लागत और श्रमिकों की मजदूरी को ध्यान में रखते हुए पार्कों और उद्यानों के रखरखाव के लिए दी जाने वाली वार्षिक सहायता को 2.55 लाख रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 3.8 लाख रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष करने का प्रस्ताव है. यह वृद्धि साफ-सफाई, सिंचाई, हरियाली के संरक्षण और समग्र रखरखाव को बेहतर बनाएगी.
मौजूदा 90:10 के वित्तीय साझेदारी मॉडल को समाप्त कर 100 प्रतिशत सरकारी सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है. वर्तमान 90:10 मॉडल के तहत कुल लागत का 90 प्रतिशत सरकार वहन करती थी, जबकि शेष 10 प्रतिशत आरडब्ल्यूए/संस्थाओं को देना पड़ता था, जिससे छोटे संगठनों की भागीदारी सीमित रहती थी.
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