- साल 2026 का पहला चक्रवात होरासियो कैटेगरी पांच के रूप में हिंद महासागर में तेजी से बढ़ रहा
- होरासियो चक्रवात ने मात्र चौबीस घंटे में अपनी रफ्तार सौ मील प्रति घंटे से अधिक बढ़ाई
- फिलहाल होरासियो का भारतीय तटों पर कोई सीधा खतरा नहीं है, क्योंकि यह काफी दूर है
साल 2026 का पहला चक्रवात दस्तक देने को तैयार है. इस चक्रवात का नाम 'होरासियो' (Cyclone Horacio) है. यह दुनिया के सबसे ताकतवर चक्रवातों में से एक है. महज़ 24 घंटे के भीतर यह तूफान 65 मील प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़कर करीब 260 किलोमीटर (160 मील) प्रति घंटे की भयावह गति तक पहुंच गया है. भयानक रफ्तार और रौद्र रूप की वजह से इसे कैटेगरी 5 का दर्जा दिया गया है. ये चक्रवात हिंद महासागर में आगे बढ़ रहा है. लेकिन सवाल यह है कि क्या होरासियो चक्रवात भारत के लिए भी खतरा लेकर आ रहा है? आइए बताते हैं.
होरासिया साइक्लोन से भारत को कितना खतरा?
यह चक्रवात हिंद महासागर में एक्टिव है और तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. राहत की बात यह है कि फिलहाल इसका भारत पर कोई सीधा खतरा नहीं है. यह भारतीय तट से काफी दूर है. हवाओं के पैटर्न के कारण तूफान आमतौर पर अपना गोलार्ध पार नहीं करते हैं, इसलिए इसके भारत पर असर डालने की संभावना न के बराबर है. भारत पर असर डालने वाले ज्यादातर तूफान बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनते हैं. भारतीय मौसम विभाग ने भी इसे लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया है.
आम चक्रवातों से ज्यादा खतरनाक क्यों है होरासियो?
मौसम वैज्ञानिकों ने होरासियो चक्रवात को कैटेगरी 5 में रखा है. इसकी वजह तेज रफ्तार है. होरासियो ने केवल 24 घंटों के भीतर अपनी रफ्तार 104 किमी प्रति घंटा से बढ़ाकर 257 किमी प्रति घंटा कर ली. इस प्रक्रिया को 'रैपिड इंटेंसिफिकेशन' कहा जाता है. इसकी रफ्तार की वजह समुद्र की सतह का तापमान बताया जा रहा है. समुद्र का तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस था, जिसने इस तूफान को इतनी ताकत दी.
भले ही होरासिया चक्रवात भारत के लिए कोई खतरा नहीं है, लेकिन पहले ऐसे कई चक्रवात आ चुके हैं. पिछले कुछ दशकों में भारत ने 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन जैसे विनाशकारी मंजर देखे हैं. इसके अलावा 2019 में आए फनी, 2020 के अम्फान, 2021 के तौकते जैसे भीषण चक्रवातों ने भारत में दस्तक दी. भारत का मौसम विभाग लगातार चक्रवातों की निगरानी करता है. ताकि इनसे होने वाले खतरों को कम किया जा सके.
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