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This Article is From Feb 25, 2026

पीएम मोदी की अगुवाई में पश्चिम एशिया में कैसे भारत की बढ़ी भूमिका, इनसाइड स्टोरी

पीएम मोदी के प्रभाव के व्यापक पैमाने का प्रमाण इस बात से भी मिलता है कि कई पश्चिम एशियाई देशों ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है. यह व्यक्तिगत और राज्य-स्तरीय सम्मान के स्तर को दर्शाता है जो साधारण व्यापार से परे है.

पीएम मोदी की अगुवाई में पश्चिम एशिया में कैसे भारत की बढ़ी भूमिका, इनसाइड स्टोरी
पश्चिम एशिया में बढ़ रही है भारत की धमक
NDTV
  • भारत ने पश्चिम एशिया में अपनी उपस्थिति को मजबूत करते हुए एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी पहचान बनाई है
  • PM मोदी ने जॉर्डन, ओमान और इज़राइल की यात्रा कर क्षेत्रीय और जियोपॉलिटिकल मुद्दों पर महत्वपूर्ण वार्ता की है
  • पश्चिम एशियाई देश भारत को एक तटस्थ, भरोसेमंद और क्रेडिबल भागीदार मानते हैं
नई दिल्ली:

भारत की बढ़ती ताकत से दुनिया का हर देश वाकिफ हो रहा है. एक समय पर भारत की पश्चिम एशिया में  उपस्थिति बिल्कुल नहीं थी लेकिन आज स्थिति पूरी तरह से बदल गई है. अब पश्चिम एशिया में भारत एक विश्वसनीय और साखदार हिस्सेदार बन गया है. पिछले दो-तीन महीनों का घटनाक्रम ही यह बताने को पर्याप्त है. 2025 दिसंबर में प्रधानमंत्री ने जॉर्डन और ओमान की यात्रा की थी.इस दौरान तमाम जियो पॉलिटिकल मुद्दों पर चर्चा हुई थी. इस साल जनवरी में अरब देशों के विदेश मंत्रियों ने ख़ासतौर से भारत की यात्रा की.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की

जनवरी में ही संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति  शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत आए. अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने पीएम मोदी से कई अहम मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा भी की.अब पीएम दो दिन की इज़राइल यात्रा पर जा रहे हैं जहां महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी जिसमें पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं. एक ओर जहां पश्चिम एशिया में लगातार स्थिति बदल रही है, वहां भारत एक महत्वपूर्ण प्लेयर बन कर उभरा है.पीएम मोदी की जॉर्डन ओमान यात्रा हो, अरब देशों के विदेश मंत्रियों और यूएई के राष्ट्रपति का भारत आना हो या अब पीएम मोदी का इज़राइल जाना हो. यह दिखाता है कि भारत के सभी के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं. 

इस क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियां हुई हैं.पीएम मोदी के क़द का अंदाज़ा इस बात से भी लगा सकते हैं कि पश्चिम एशिया के कई देशों ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाज़ा है. पूरा पश्चिम एशिया भारत को न्यूट्रल, क्रेडिबल और भरोसेमंद हिस्सेदार मानता है.उसी महीने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने महत्वपूर्ण वार्ता के लिए भारत की यात्रा की, जिसने दोनों देशों के बीच गहरे बंधन को और मजबूत किया. अब, प्रधान मंत्री की दो दिवसीय इज़राइल यात्रा एक और महत्वपूर्ण अध्याय को चिह्नित करती है, क्योंकि वह क्षेत्र में भारत के अद्वितीय संतुलन को बनाए रखते हुए जटिल क्षेत्रीय मुद्दों को संबोधित करते हैं.

जबकि पश्चिम एशिया में तेजी से और अक्सर अशांत परिवर्तन हो रहे हैं, भारत एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरा है जिस पर हर तरफ से भरोसा है. चाहे वह जॉर्डन और ओमान के साथ जुड़ाव हो, अरब नेताओं की उच्च-स्तरीय यात्राएं हों, या इज़राइल तक रणनीतिक पहुंच हो, ये कार्य प्रत्येक प्रमुख हितधारक के साथ उत्कृष्ट संबंध बनाए रखने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं. यह क्षेत्र अब भारत को एक तटस्थ और भरोसेमंद भागीदार के रूप में देखता है जो औपनिवेशिक हस्तक्षेप के ऐतिहासिक बोझ के बिना काम करता है.

पीएम मोदी के प्रभाव के व्यापक पैमाने का प्रमाण इस बात से भी मिलता है कि कई पश्चिम एशियाई देशों ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है. यह व्यक्तिगत और राज्य-स्तरीय सम्मान के स्तर को दर्शाता है जो साधारण व्यापार से परे है. इस क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारियाँ एक गहरी जड़ें जमा चुके गठबंधन में परिपक्व हो गई हैं, जिससे यह एक विश्वसनीय हितधारक बन गया है जिसकी पश्चिम एशियाई दुनिया अब संतुलन, निवेश और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए तलाश कर रही है.

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