
कोरोना वायरस किसी देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तीव्रता से 'हमला' कर रहा रहा है.'R' रेट के जरिये हमने यह जानने की कोशिश की है कि 'इंडो-कोरोना वायरस वॉर' में कौन का राज्य जीत हासिल कर रहा है अथवा मात खा रहा है.'R' रेट यानी कि रि-प्रोडक्शन रेट. सरल शब्दों में कहें तो एक संक्रमित व्यक्ति से कितने लोग संक्रमित हो रहे हैं. यदि .'R' रेट 2.0 है तो यह दर्शाता है कि कोविड-19 से संक्रमित एक व्यक्ति औसत के रूप में अन्य दो लोगों को संक्रमित करेगा. ये दो लोगों में से प्रत्येक दो-दो अन्य लोगों को संक्रमित करेंगे. इस तरह संक्रमण बढ़ते हुए सोसाइटी में महामारी का रूप ले लेगा.यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि 'R' रेट 1.0 से कम हो (यानी एक संक्रमित व्यक्ति एक से कम व्यक्ति में संक्रमण फैला पाए). जब 'R' रेट 1.0 से कम होगा तभी यह महामारी धीरे-धीरे दूर हो सकेगी.
देश के 20 बड़े राज्यों पर फोकस करने पर तीन वृहद कैटेगरी सामने आती है.
Category 1: राज्य जो कोरोना के खिलाफ जंग में सफल हैं, यहां 'R' rate कम हो रही
भारत में बड़े राज्यों में से 10 ने 'R' rate के मामले में उत्साहवर्धन संकेत दिए हैं, यहां 'R' rate में गिरावट देखी गई है. सभी देशों का पहला लक्ष्य माने जा रहा 'R' rate गुजरात, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में 1.0 से नीचे आ गया है. ग्राफ दिखाता है कि तेलंगाना में जुलाई के तीसरे सप्ताह में 'R' rate 1.0 से नीजे आ गया था लेकिन फिर बढ़ गया. महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के लिहाज से चिंता की बात यह है कि 'R' rate के नीचे जाने का सिलसिला रुक गया है.

Category 2: राज्य जो कोरोना के खिलाफ जंग में अब तक सफल हैं लेकिन यहां मामलों के बढ़ने के हैं संकेत
देश के बड़े राज्यों में से छह में ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण फिर जोर मार रहा है. सबसे ज्यादा चिंता असम और छत्तीसगढ़ को लेकर है जहां 'R' रेट 1.0 के नीचे पहुंच गया था लेकिन एक पखवाड़े में यह उछाल मारते हुए 1.30 के स्तर के पार पहुंप गया है. दिल्ली नए केसों के मामले में 'कर्व को फ्लैट' रखने में सबसे ज्यादा सफल राज्य रहा है लेकिन चिंता की बात यह है कि यहां दो सप्ताह के अंतराल में 'R' रेट 0.75 to 1.05 पहुंचा है.

Category 3: राज्य जो कोरोना के खिलाफ जंग में सबसे कम सफल हैं, जहां 'R' फैक्टर है ऊंचा
इस मामले में सबसे ज्यादा चिंता देने वाले दो राज्य बिहार और पंजाब है. बिहार में वायरस पर नियंत्रण नजर नहीं आ रहा और यहां 'R' रेट अस्वीकार्य रूप से ऊंचा है. पंजाब की बात करें तो दो माह पहले यहां कुछ नियंत्रण की स्थिति दिख रही थी लेकिन मौजूदा 'R' रेट दिखा रहा है कि वायरस तेजी से फैल सकता है. पश्चिम बंगाल में इसके मुकाबले ज्यादा गंभीर स्थिति नहीं है. आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में भी 'R' रेट ऊंचा है. यहां 'R' रेट अभी 1.0 से ऊपर है लेकिन राहत की बात यह है कि अगस्त माह में इसमें गिरावट देखने में आई है.

आखिरकार, आल इंडिया 'R' औसत इस बात का संकेत देता है कि हालांकि वायरस भारत में अभी नियंत्रण से बाहर है लेकिन स्थिति में सुधार हो रहा है. हालांकि अभी बेफिक्र होकर बैठने जैसी स्थिति नहीं है, कोरोना वायरस के खिलाफ जंग जारी है और केसों में नए उछाल से सावधान रहना होगा.
नोट: 'R' फैक्टर समझने में आसान है लेकिन इसकी गणना आसान नहीं है. इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमेटिकल साइंसेज चेन्नई के सीताभ्र सिन्हा ने 'R' फैक्टर के कैलकुलेशन का यह असाधारण काम अंजाम दिया है. यदि इसमें कोई त्रुटियां है तो वे हमारी हैं और इसके लिए प्रोफेसर सिन्हा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
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