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"मेरी सीट से लड़िए उपचुनाव...", हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को दिया बड़ा ऑफर

कबीर ने कहा कि अगर वह रेजिनगर सीट से इस्तीफा देते हैं तो वहां उपचुनाव होगा और ममता बनर्जी उस सीट से जीतकर विधानसभा में वापसी कर सकती हैं. उन्होंने दावा किया कि नंदीग्राम से ममता नहीं जीत पाएंगी, लेकिन अगर वह चाहें तो वह रेजिनगर से उनके लिए सीट खाली कर देंगे और उनकी जीत सुनिश्चित करेंगे.

"मेरी सीट से लड़िए उपचुनाव...", हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को दिया बड़ा ऑफर
  • आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को रेजिनगर सीट से चुनाव लड़ने का सुझाव दिया है.
  • कबीर ने कहा कि वे रेजिनगर सीट से इस्तीफा दे देंगे ताकि ममता बनर्जी विधानसभा में लौट सकें.
  • ममता बनर्जी वर्तमान में राजनीतिक संकट से गुजर रही हैं और टीएमसी को चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है.

 आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में लौटने के लिए रेजिनगर सीट से चुनाव लड़ने का बृहस्पतिवार को सुझाव दिया. कुछ महीने पहले ही कबीर ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग होने और बनर्जी की सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया था. कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले की नवदा और रेजिनगर, दोनों विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी. कबीर ने कहा कि वह रेजिनगर से बनर्जी की विधानसभा में वापसी में मदद करने के लिए तैयार हैं.

लेकिन अगर वह चाहें, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा :  हुमायूं कबीर

कबीर ने कहा कि रेजिनगर सीट से उनके इस्तीफा देने के बाद वहां उपचुनाव होगा, ऐसे में ममता बनर्जी रेजिनगर से चुनाव में जीत के बाद विधानसभा में लौट सकती हैं. चुनाव नियमों के अनुसार किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को दो सीटों में से एक छोड़नी होती है. कबीर ने पत्रकारों से कहा, ‘‘अगर ममता बनर्जी मेरे पास आती हैं, तो मैं उन्हें रेजिनगर से विधानसभा भेज सकता हूं. अगर वह नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो वह नहीं जीतेंगी. लेकिन अगर वह चाहें, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा और अपने निर्वाचन क्षेत्र से उनकी जीत सुनिश्चित करूंगा.''

राजनीतिक सफर के सबसे कठिन दौर से गुजर रही ममता

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ दी और भवानीपुर सीट अपने पास रखी, जहां से उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया था. कबीर की यह पेशकश ऐसे समय में आई है जब बनर्जी अपने राजनीतिक सफर के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं. टीएमसी की चुनावी हार और बगावत ने पार्टी को गहरे संकट में डाल दिया है. ऐसे में कबीर का यह प्रस्ताव राजनीतिक हलकों में विशेष महत्व रखता है.

पार्टी नेतृत्व के साथ लंबे समय तक टकराव के बाद पिछले वर्ष टीएमसी से निष्कासित किए गए हुमायूं कबीर ने बाद में एजेयूपी का गठन किया. इसके बाद वह सत्तारूढ़ दल के सबसे मुखर आलोचकों में शामिल हो गए और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर लगातार निशाना साधते हुए उसे सत्ता से हटाने की मांग करते रहे.

मैं आज जो कुछ भी हूं, उनकी वजह से ही हूं : हुमायूं कबीर

हालांकि टीएमसी के सत्ता से बाहर होने और पार्टी के भीतर अभूतपूर्व संकट के बीच ममता बनर्जी अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं. ऐसे में, एजेयूपी संस्थापक हुमायूं कबीर का रुख कुछ नरम दिख रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘आज जिस स्थिति में वह (ममता बनर्जी) हैं, उसे देखकर मुझे पीड़ा होती है. मैं आज जो कुछ भी हूं, उनकी वजह से ही हूं.''

समर्थन की पेशकश के साथ कबीर ने क्षेत्र में अपने प्रभाव का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है कि अब उनकी (ममता) बात कोई न सुने, लेकिन रेजिनगर में अंतिम फैसला हुमायूं कबीर का ही चलता है.''

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