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This Article is From Mar 07, 2018

80/20 गोल्ड स्कीम मामले पर भाजपा ने चिदंबरम पर फिर साधा निशाना

प्रसाद ने कहा, ‘‘15 मई 2014 को पी चिदंबरम ने नई नीति की घोषणा की जिसमें स्टार ट्रेड ऑपरेटर्स को प्रीमियम ट्रेडिंग हाउस से जोड़ दिया गया.’’

80/20 गोल्ड स्कीम मामले पर भाजपा ने चिदंबरम पर फिर साधा निशाना
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (फाइल फोटो)
नई दिल्‍ली: पीएनबी धोखाधड़ी मामले में कांग्रेस सहित विपक्ष के हमलों का सामना कर रही भाजपा ने बुधवार को एक बार फिर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को निशाने पर लेते हुए कहा कि निहित स्वार्थ के दबाव में चिदंबरम ने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए 80/20 गोल्ड स्कीम में नीतिगत बदलाव किया.

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संवाददताओं से कहा, ‘‘इस मामले में जो तथ्य हमारे सामने हैं, उससे स्पष्ट होता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने से एक दिन पहले 15 मई को सुपरसोनिक गति से चिदंबरम ने दस्तखत किये और 9 डेस्क से होते हुए यह आगे बढ़ा और आरबीआई ने भी इस पर हामी भर दी.’’ प्रसाद ने कहा कि उनका स्पष्ट रूप से कहना है कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के कार्यकाल में पसंदीदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिये यह नीतिगत बदलाव किया गया.

उल्लेखनीय है कि इस मामले में गीतांजलि ज्वैलर्स सवालों के घेरे में है. प्रसाद ने कहा, ‘‘15 मई 2014 को पी चिदंबरम ने नई नीति की घोषणा की जिसमें स्टार ट्रेड ऑपरेटर्स को प्रीमियम ट्रेडिंग हाउस से जोड़ दिया गया.’’ उन्होंने कहा कि एक परिपत्र के माध्यम से मई 2014 में एक इतना बड़ा दरवाजा खोल दिया गया.

भाजपा नेता ने कहा कि इन ट्रेडिंग हाउसेज को भारत के किसी भी बंदरगाह से 2,000 किलोग्राम तक सोना आयात करने की मंजूरी मिल गई और इस दौरान न तो कोई नियंत्रण था और नहीं कोई सत्यापन किया गया और यह एक रैकेट की तरह काम कर रहा था. प्रसाद ने कहा कि अगस्त 2013 से दो साल पहले तक जिन्होंने हिन्दुस्तान के किसी पोत से अधिकतम सोना आयात किया है, उनके लिये खिड़की खोल दी गई. ‘‘यह गंभीर अनियमितता का मामला है जो कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिये की गई.’’

केंद्रीय विधि मंत्री ने सवाल किया, ‘‘मैं सवाल पूछना चाहता हूं कि चिंदबरम जैसे सुलझे हुए व्यक्ति, अनुभवि नेता, गृह और वित्त मंत्रालय को संभालने का अनुभव रखने और संविधान के ज्ञाता व्यक्ति ने किस दबाव में यह फैसला किया. क्या इसकी कोई कीमत थी, या कोई दबाव था? देश इस सवाल का जवाब जानना चाहता है.’’ उन्होंने कहा कि चिदंबरम देश के मंत्री रहे हैं और देश में राजनीति में मर्यादा और लोकलाज होता है, ऐसे में चुनाव परिणाम से एक दिन पहले ऐसा नीतिगत फैसला कैसे लिया गया. उन्होंने कहा कि वह आरबीआई के तब के प्रशासन से भी पूछना चाहते हैं कि उन पर किसका दबाव था. उन्होंने कहा कि आदर्श चुनाव आचार संहिता भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पर भी लागू होता है और 80/20 गोल्ड स्कीम नीतिगत बदलाव का मामला था. क्या आरबीआई इंतजार नहीं कर सकती थी.

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के कार्यकाल के दौरान पी चिदंबरम ने अपनी पसंदीदा कंपनियों के लिए दरवाजे खोले. और यही वजह रही कि 'जिन कंपनियों को 80/20 योजना में शामिल होने की अनुमति नहीं थी उन्हें भी इसमें भाग लेने की मंजूरी मिल गई.' इस बारे में कई दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए प्रसाद ने कहा कि इस बारे में अपने बयान के लिये क्या कांग्रेस नेता आनंद शर्मा माफी मांगेगे.

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन संप्रग सरकार के आखिरी दिनों में 80/20 स्कीम के तहत निजी कंपनियों को सोना आयात की अनुमति देने को लेकर भाजपा के निशाने पर चल रहे पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का बचाव करते हुए कांग्रेस ने चिदंबरम के खिलाफ भाजपा के आरोपों को झूठा और बेबुनियाद करार दिया है. मंगलवार को कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा था कि हजारों करोड़ के पीएनबी घोटाले से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए सरकार और भाजपा चिदंबरम पर झूठे आरोप लगा रही है. आनंद शर्मा के अनुसार, 'चिदंबरम के खिलाफ कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के आरोप तथ्यों से परे हैं. बेबुनियाद आरोप लगाकर प्रसाद पीएनबी घोटाले को लेकर सरकार की जवाब देही से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं.'

(इनपुट भाषा से...)
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Ravishankar Prasad, P Chidambaram
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