मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया. आरोप है कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले का विवरण छुपाया था. इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद जांच की गई, जिसके आधार पर चुनाव अधिकारियों ने उनका नामांकन खारिज कर दिया. यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि राज्य में राज्य सभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है. इसके लिए बीजेपी ने तीन उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है, जबकि कांग्रेस के मौजूदा विधायकों की संख्या के हिसाब से मीनाक्षी नटराजन की जीत की संभावना जताई जा रही थी. हालांकि, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का भी डर था. इसीलिए वह अपने विधायकों को बैंगलुरू भेज रही थी.
डमी उम्मीदवार का पर्चा भी नहीं भरवाया
जैसे ही मीनाक्षी का नामांकन रद्द होने की खबर आई, विधायकों को बैंगलुरु ले जा रहा विमान रनवे से ही वापस लौट आया. कांग्रेस ने नामांकन पत्र खारिज करने के फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है. यह खबर लिखे जाते समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिल्ली में केंद्रीय चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटा रहे हैं और इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस के लिए परेशानी की बात यह भी है कि उसने अपने आधिकारिक उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के लिए किसी डमी उम्मीदवार का पर्चा भी नहीं भरवाया था. अब मीनाक्षी की पर्चा खारिज होने के कारण कांग्रेस चुनाव से बाहर हो गई है.
राज्य सभा की 24 सीटों पर चुनाव और तीन सीटों पर उपचुनाव हो रहा है. इसमें कांग्रेस को कर्नाटक में दो सीटों और तमिलनाडु में एक सीट का फायदा हो रहा है, जबकि गुजरात में एक सीट का नुकसान हो रहा है. कांग्रेस को उम्मीद थी कि मध्य प्रदेश से एक और झारखंड से एक सीट उसे मिल जाएगी. लेकिन ताजा घटनाक्रम उसके लिए बड़ा झटका है.
झारखंड में भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती
इस तरह मध्य प्रदेश की तीनों सीटें बीजेपी के खाते में जाती दिख रही हैं, बशर्ते कांग्रेस को मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र खारिज होने के मामले में अदालत या केंद्रीय चुनाव आयोग से कोई राहत मिले. उधर, झारखंड में भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है. वहां उसके आधिकारिक उम्मीदवार प्रणव झा के खिलाफ मशहूर उद्योगपति परिमल नाथवानी ने एनडीए के समर्थन से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार पर्चा भरा है. वैसे तो सत्तारूढ़ जेएमएम गठबंधन के पास अपने दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए आवश्यक विधायक हैं. लेकिन राज्य में क्रॉस वोटिंग का इतिहास रहा है. परिमल नाथवानी को जीत के लिए एनडीए के 24 विधायकों के अतिरिक्त चार और विधायकों के वोट चाहिए. वे पहले भी जेएमएम के समर्थन से राज्य सभा जा चुके हैं. ऐसे में झारखंड में कांग्रेस को अपना खेमा बचाए रखने की चुनौती है. बताया गया है कि कांग्रेस की ओर से परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को लेकर भी चुनौती दी गई है. उस पर आयोग को फैसला अभी करना है.
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