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This Article is From May 05, 2020

लॉकडाउन में अप्रत्याश‍ित रूप से बढ़ी बेरोजगारी, अप्रैल में 9.1 करोड़ का रोजगार छिना...

Coronavirus Lockdown: कोरोनावायरस संकट के दौरान आर्थिक अनिश्चितता के माहौल में लाखों मज़दूरों का पलायन इस संकट का पहचान सी बन गयी हैं. लॉकडाऊन के दौर में ठप्प पड़ी अर्थव्यवस्था की वजह से करोड़ों मज़दूरों और कर्मचारियों का रोज़गार छिन गया है.

लॉकडाउन में अप्रत्याश‍ित रूप से बढ़ी बेरोजगारी, अप्रैल में 9.1 करोड़ का रोजगार छिना...
बेरोज़गारी दर देश में बढ़कर अप्रत्याशित 27.1 % हो गयी
नई दिल्ली:

Coronavirus Lockdown: कोरोनावायरस संकट और उसे और फैलने से रोकने के लिए देश भर में लागू लॉकडाऊन की वजह से देश में बेरोज़गारी तेज़ी से बढ़ गयी है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में आगाह किया है कि पिछले एक हफ्ते में बेरोज़गारी दर देश में बढ़कर अप्रत्याशित 27.1 % हो गयी. सेंटर ने कहा है कि लॉकडाऊन के दौरान अप्रैल में 9.1 करोड़ छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मज़दूरों का रोज़गार छिन गया.

कोरोनावायरस संकट के दौरान आर्थिक अनिश्चितता के माहौल में लाखों मज़दूरों का पलायन इस संकट का पहचान सी बन गयी हैं. लॉकडाऊन के दौर में ठप्प पड़ी अर्थव्यवस्था की वजह से करोड़ों मज़दूरों और कर्मचारियों का रोज़गार छिन गया है. भारतीय अर्थव्यवस्था पर नज़र रखने वाली संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी ने अपने ताज़ा आंकलन में दावा किया है कि 3 मई को ख़त्म होने वाले पिछले हफ्ते के दौरान बेरोज़गारी दर बढ़कर 27.1 % पहुंच गयी. ये अब तक की सबसे ऊंची बेरोज़गारी दर है. 2019-20 के दौरान कुल औसत रोज़गार 40.4 करोड़ था जो अप्रैल 2020 में 30% गिरकर 28.2 करोड़ रह गया यानी 12.2 करोड़ रोज़गार घट गया.

इंडियन चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष वेद जैन कहते हैं, "असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों और प्रवासी मज़दूरों को मनरेगा के तर्ज़ पर डायरेक्ट जॉब क्रिएट करना होगा, उन्हें इंसेंटिव और मेहनताना देना ज़रूरी होगा. इससे इकॉनमी में बूस्ट होगा, डिमांड बढ़ेगा, प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी और रोज़गार के अवसर पैदा होंगे."

MSME फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल अनिल भरद्वाज ने कहा, "सभी MSME का एकजुट होकर ये कहना है कि सरकार को MSME के वर्करों को सैलरी की जो लायबिलिटी है उसको ख़त्म करना चाहिए यानी देना चाहिए."

लॉकडाऊन की सबसे ज्यादा मार छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मज़दूरों पर पड़ी है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है 2019-20 में छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मज़दूरों में औसतन 12.8 करोड़ के पास रोज़गार था. अप्रैल 2020 में ये गिरकर सिर्फ 3.7 करोड़ तक सीमित रह गया यानी लॉकडाऊन के दौरान अप्रैल में 9.1 करोड़ का रोज़गार छिन गया.

मार्च से ही बेरोज़गारी बढ़ती जा रही थी. लॉकडाऊन ने करोड़ों छोटे व्यापारियों और वर्करों का संकट अप्रत्याशित तरीके से और बढ़ा दिया है. मुश्किल ये है को कोरोना का संकट अगर और लम्बा चला तो रोज़गार का संकट और बड़ा होता जायेगा.

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