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This Article is From May 04, 2025

10वीं की टॉपर बिटिया की रिजल्ट से 17 दिन पहले मौत, मार्कशीट देख फफक पड़े परिजन

दो दिन पहले जब बंगाल बोर्ड का रिजल्ट आया तो थैबी मुखर्जी के परिवार के साथ-साथ उसके स्कूल में भी सबकी आंखें नम हो गई. 17 दिन पहले मर चुकी थैबी अपने स्कूल की टॉपर थी.

10वीं की टॉपर बिटिया की रिजल्ट से 17 दिन पहले मौत, मार्कशीट देख फफक पड़े परिजन

ऊपर तस्वीर में आप जिस वृद्ध महिला-पुरुष को विलाप करते देख रहे हैं, वो उस होनहार लड़की के परिजन है, 
जिसने 10वीं की परीक्षा में टॉप किया है. लेकिन दुर्भाग्य यह है कि टॉपर बिटिया अपना रिजल्ट जानने से पहले इस दुनिया को छोड़ चुकी है. दरअसल रिजल्ट से 17 दिन पहले बिटिया की बीमारी से मौत हो गई. एक होनहार बेटी के दर्दनाक अंत की यह कहानी सामने आई है पश्चिम बंगाल के आसनसोल से. 

रिजल्ट से 17 दिन पहले थैबी मुखर्जी की जॉन्डिस से मौत

बंगाल की होनहार बेटी ने थैबी मुखर्जी ने बीमारी की हालत में परीक्षा दी थी. वो रोज दवा खाकर परीक्षा देने जाती थी. परीक्षा के बाद उसका इलाज भी हुआ. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. रिजल्ट आने से 17 दिन पहले थैबी मुखर्जी की जॉन्डिस से मौत हो गई. 

थैबी की रिजल्ट देख नम हुई सबकी आंखें 

दो दिन पहले जब बंगाल बोर्ड का रिजल्ट आया तो थैबी मुखर्जी के परिवार के साथ-साथ उसके स्कूल में भी सबकी आंखें नम हो गई. थैबी आसनसोल के उमारानी गोराई महिला कल्याण स्कूल की छात्रा थी. थैबी मुखर्जी ने न सिर्फ अपने स्कूल में टॉप किया, बल्कि जिले की टॉप 10 सूची में आठवां स्थान भी पाया. 

थैबी ने बंगला में 99, गणित में 98, भौतिक विज्ञान में 97, जीव विज्ञान में 98, इतिहास और भूगोल में 95 अंक हासिल किए थे. थैबी ने परिजन उसकी मार्कशीट को देखकर फिर से फफक-फफक कर रोने लगे. 

इलाज के लिए हैदराबाद तक गए परिजन, पर नहीं बची जान

परिजनों ने बताया कि थैबी मुखर्जी को इलाज के लिए वो हैदराबाद भी लेकर गए थे. लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. थैबी के स्कूल की प्रिसिंपल पापारी मुखर्जी ने बताया कि 16 वर्षीय थैबी परीक्षा के दौरान बहुत बीमार थी. वह पढ़ने में बेहद होशियार थी. आज यदि वो होती तो बहुत खुश होती.  

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रोती हुई दादी बोलीं- आज वो होती तो बहुत खुश होती

थैबी मुखर्जी की दादी सविता मुखर्जी ने रोते हुए कहा कि "वह बहुत खुश होती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हर कोई कहता था कि वह फर्स्ट या सेकेंड पोजिशन पर आएगी. हमें कभी यकीन नहीं हुआ. वह यह परिणाम नहीं देख पाई. वह बहुत खुश होती. अगर वह यहाँ होती तो पूरे दिन टीवी के सामने बैठी रहती.

थैबी के दादा बोले- वह पढ़ाई में बहुत अच्छी थी

थैबी के दादा बसंती दास मुखर्जी ने कहा, "वह पढ़ाई में बहुत अच्छी थी. उसे चार स्कॉलरशिप मिलीं थी. लेकिन वह बहुत ज़्यादा दबाव में थी. वे समय पर उसका निदान नहीं कर सके. थैबी का रिजल्ट जानकर उसके दोस भी बेहद मायूस नजर आए. 

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