कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास का दशहरा तिहाड़ जेल में ही मनेगा. कोर्ट से उन्हें जमानत नहीं मिली है. कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत को दो दिन और बढ़ा दिया है. इसका मतलब हुआ कि आशुतोष और सौरव को अभी तिहाड़ जेल में कम से कम दो दिन और रहना होगा.
आशुतोष और सौरव को जंतर-मंतर में घुसने के आरोप में 13 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद दोनों को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.
दोनों की 5 दिन की न्यायिक हिरासत सोमवार को खत्म हो रही थी. इसके बाद दोपहर दो बजे उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की कोर्ट में पेश किया गया था.
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— NDTV India (@ndtvindia) October 19, 2026
सोमवार को कोर्ट में पेशी से पहले CJP की लीगल हेड और वकील रत्ना सिंह ने दोनों की रिहाई की मांग की थी.
रत्ना ने X पर लिखा था कि न्यायिक हिरासत बढ़ाने का कोई कारण नहीं है. उन्होंने मांग की थी कि सौरव और आशुतोष को रिहा किया जाना चाहिए.
CJP बोली- अदालत में मजाक चल रहा था
दोनों को जमानत नहीं मिलने पर CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने कहा कि न्यायिक हिरासत बढ़ाने की कोई जरूरत ही नहीं थी.
उन्होंने कहा, 'अदालत में एक तरह का मजाक चल रहा था. पिछले 6 दिनों से हम कह रहे हैं कि किसी न किसी बहाने से कमियां निकाली जा रही हैं. कभी कहा जाता है कि श्योरिटी वेरिफिकेशन नहीं हुआ है, तो कभी कहा जाता है कि उस श्योरिटी के खिलाफ ही FIR दर्ज है. हमने देखा कि किस तरह किसी की आजादी छीनी जा रही है.'
उन्होंने दावा किया कि 'दोपहर 2 बजे होने वाली सुनवाई 3 से 3:30 बजे शुरू हुई और एक घंटे तक चली. हमारे वकीलों ने कानूनी बिंदुओं पर चर्चा की. दूसरी तरफ से ऐसा कोई तर्क नहीं दिया गया जिससे न्यायिक हिरासत बढ़ाने की जरूरत साबित होती हो. उन्हें और ज्यादा न्यायिक हिरासत में रखने का कोई कारण नहीं था.'
रत्ना ने आरोप लगाया कि 'उन्हें बहुत ही अस्पष्ट वजह से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. हम इसे चुनौती देंगे. यह मानसिक प्रताड़ना है और आवाजों को दबाने की कोशिश है. हम सब कुछ देख रहे हैं, पूरी दुनिया सब कुछ देख रही है. वे हर किसी को चुप नहीं करा सकते.'
13 अक्टूबर को किया गया था गिरफ्तार
आशुतोष और सौरव को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था. उन पर 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में कथित रूप से अनाधिकृत तरीके से घुसने और पुलिस के काम में बाधा डालने का आरोप है.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आशुतोष-सौरव और CJP के कार्यकर्ता जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल पर निजी परिसर के रास्ते पहुंचे थे.
पुलिस का दावा है कि कानून के बार-बार उल्लंघन और भविष्य में दोबारा ऐसा करने की आशंका को देखते हुए न्यायिक हिरासत की मांग की गई थी. इस मामले में CJP के कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया गया था. उन्हें छह महीने तक शांति और सदाचार बनाए रखने का निर्देश दिया गया है.
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