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राष्ट्रों को ऐसे मंचों की जरूरत है, जो विविध दृष्टिकोणों को एक साथ ला सकें : प्रणव अदाणी

जैसे-जैसे भारत आर्थिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव में वृद्धि कर रहा है, उसे सोचने, सवाल करने, पूर्वानुमान लगाने और तैयारी करने की अपनी क्षमता में भी निवेश करना चाहिए. पिछले एक वर्ष में, भारत के भविष्य में मेरा विश्वास और भी मजबूत हुआ है. हमारी अर्थव्यवस्था का निरंतर विस्तार हो रहा है.

राष्ट्रों को ऐसे मंचों की जरूरत है, जो विविध दृष्टिकोणों को एक साथ ला सकें : प्रणव अदाणी
प्रणव अदाणी ने चिंतन रिसर्च फाउंडेशन जैसे मंचों की जरूरत के बारे में विस्तार से बताया.
  • प्रणव अदाणी ने कहा कि भारत को अपनी कहानी विश्वसनीयता और आत्मविश्वास के साथ स्वयं प्रस्तुत करनी चाहिए
  • चिंतन रिसर्च फाउंडेशन राष्ट्रीय नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों को कई मुद्दों पर चर्चा के लिए जोड़ रहा है
  • भारत नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन, बुनियादी ढांचा विकास और रोजगार सृजन में तेजी से प्रगति कर रहा है

अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के आईटीसी मौर्या में 'चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (सीआरएफ) दिवस' कार्यक्रम को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि कहानियों को वे लोग आकार देते हैं, जो प्रमाण प्रस्तुत करते हैं, संदर्भ प्रदान करते हैं और वैश्विक चर्चाओं में भाग लेते हैं. यदि भारत आत्मविश्वास और विश्वसनीयता के साथ अपनी कहानी स्वयं नहीं सुनाता है, तो दूसरे लोग इसे हमारे लिए सुनाएंगे और वो भी इसकी जटिलता को पूरी तरह समझे बिना. यहीं पर भारत के विचारकों की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, क्योंकि विश्वसनीयता केवल बौद्धिक ईमानदारी से ही आएगी.

सीआरएफ की बताई उपलब्धियां

प्रणव अदाणी ने कहा कि सीआरएफ लगातार शीर्ष नीति निर्माताओं, राजनयिकों, शिक्षाविदों, उद्योगपतियों और विशेषज्ञों को ऊर्जा सुरक्षा से लेकर महत्वपूर्ण खनिजों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक साथ ला रहा है.मेरे विचार में, सीआरएफ जैसे थिंक टैंक की सफलता का पैमाना उसके द्वारा प्रकाशित रिपोर्टों की संख्या या आयोजित कार्यक्रमों की संख्या नहीं है.इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या यह राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली चर्चाओं की गुणवत्ता में सुधार कर रहा है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रों को ऐसी संस्थाओं की आवश्यकता है, जो तात्कालिक सुर्खियों से परे सोच सकें. ऐसी संस्थाएं जो विभिन्न पहलुओं को जोड़ सकें, विचार उत्पन्न कर सकें, साक्ष्यों की जांच कर सकें, मान्यताओं को चुनौती दे सकें और निर्णयकर्ताओं को जटिलताओं से निपटने में मदद कर सकें. राष्ट्रों को ऐसे मंचों की आवश्यकता है, जो विविध दृष्टिकोणों को एक साथ ला सकें और भविष्य को आकार देने वाले मुद्दों पर विचारशील, साक्ष्य-आधारित विश्लेषण प्रस्तुत कर सकें.

अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक ने कहा कि भारत एक साथ ऊर्जा तक पहुंच बढ़ा रहा है, लाखों लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल कर रहा है, अभूतपूर्व पैमाने पर बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है, रोजगार सृजित कर रहा है, विनिर्माण को मजबूत कर रहा है और दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तनों में से एक का अनुसरण कर रहा है. लेकिन तथ्य अपने आप कहानी नहीं बन जाते. कहानियां उन लोगों द्वारा गढ़ी जाती हैं जो साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, संदर्भ प्रदान करते हैं और वैश्विक चर्चाओं में भाग लेते हैं. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि थिंक टैंकों को भारत के मूल से अधिक से अधिक जुड़ना चाहिए. देश भर में फैली ग्रामीण आबादी के साथ, सीआरएफ जैसी संस्थाओं को ज्ञान और कार्यान्वयन, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और स्थानीय वास्तविकताओं, और महत्वाकांक्षी नीतियों और व्यावहारिक परिणामों के बीच सेतु बनना चाहिए. इसका एक समान रूप से महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयाम भी है.

'एक संस्थागत उपलब्धि का जश्न'

प्रणव अदाणी ने कहा कि उनके सामने मौजूद मुद्दे भी अधिक जटिल होते जा रहे हैं. ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, शहरीकरण, जल संकट, भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक समावेशन अब भविष्य के प्रभावों से संबंधित चर्चाएं मात्र नहीं रह गई हैं. इनका प्रभाव लोगों के जीवन और आजीविका पर अभी से महसूस किया जा रहा है. इतिहास में हर सफल राष्ट्र ने भौतिक अवसंरचना-सड़कें, बंदरगाह, हवाई अड्डे, विद्युत प्रणाली, रसद और नेटवर्क में निवेश किया है. उन्होंने कहा कि सीआरएफ के दूसरे स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में, हम निश्चित रूप से एक संस्थागत उपलब्धि का जश्न मना रहे हैं. लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हम एक विचार का भी जश्न मना रहे हैं. यह विचार कि जैसे-जैसे भारत आर्थिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव में वृद्धि कर रहा है, उसे सोचने, सवाल करने, पूर्वानुमान लगाने और तैयारी करने की अपनी क्षमता में भी निवेश करना चाहिए. पिछले एक वर्ष में, भारत के भविष्य में मेरा विश्वास और भी मजबूत हुआ है. हमारी अर्थव्यवस्था का निरंतर विस्तार हो रहा है.

शशि थरूर ने बताई ऐसी संस्थाओं की जरूरत

वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने संबोधन में कहा कि सीआरएफ ठीक उसी समय सामने आया है, जब भारत को ऐसी संस्थाओं की आवश्यकता है जो तेजी से बदलती दुनिया के बारे में स्पष्ट रूप से सोच सकें, जो निश्चित रूप से इस बदलाव को समझने के हमारे पारंपरिक तरीकों से कहीं अधिक तेज है. व्यावहारिक उद्योग अंतर्दृष्टि को वकालत और शासन में एकीकृत करके, आप यह सुनिश्चित करते हैं कि नीति न तो वैचारिक शून्यता में तैयार की जाए और न ही अल्पकालिक लेन-देनवाद की मनमानी पर छोड़ी जाए. उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान का उत्पादन ही नहीं, बल्कि समझ का विकास भी.केवल विचारों का आदान-प्रदान ही नहीं, और बेशक, किसी भी विचार-मंथन के लिए विचार अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि अंतर्दृष्टि की खोज भी.ऐसे समय में जब सार्वजनिक चर्चा अक्सर सार के बजाय गति से प्रेरित होती है, जब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का बोलबाला है, तब चिंतन के प्रति ऐसी प्रतिबद्धता सामयिक और अत्यंत आवश्यक है.और यह इसलिए आवश्यक है क्योंकि आज हमारे सामने जो चुनौतियां हैं, वे इतनी व्यापक और जटिल हैं कि उनके सरल समाधान संभव नहीं हैं.

थरूर ने कहा कि चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के दूसरे स्थापना दिवस के अवसर पर आप सबके बीच उपस्थित होना मेरे लिए वास्तव में अत्यंत प्रसन्नता का विषय है. इस विशेष अवसर पर, मैं संस्था से जुड़े सभी लोगों को हार्दिक बधाई देता हूं.

नॉर्वे के पूर्व मंत्री ने बताई बड़ी बात

नॉर्वे के पूर्व मंत्री एरिक सोल्हेम ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि हम पूरी तरह से जलविद्युत से संचालित हैं, चाहे वह कोई एक संयंत्र हो या कोई अन्य कंपनी.यह बांग्लादेश के पूरे ग्रिड से डेढ़ गुना अधिक है, जो 18 करोड़ लोगों का देश है.और शायद सौर और पवन ऊर्जा से भी अधिक प्रभावशाली है बैटरी. अदाणी समूह ने अब तक 3.3 मेगावाट घंटे की बैटरी स्थापित की है.यह चीन के बाहर दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी है, लेकिन इस वर्ष यह 14 गीगावाट घंटे की हो जाएगी और यह चीन सहित दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी बैटरी होगी.

चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि यहां उपस्थित होकर, हमारे दूसरे जन्मदिन के अवसर पर हमारे साथ जुड़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. किसी भी संस्था के जीवन में दो साल बहुत कम समय होता है, फिर भी हर संस्था एक ऐसे मुकाम पर पहुंचती है जब वह महज एक कल्पना से आगे बढ़कर वास्तविक प्रभाव पैदा करने लगती है. सीआरएफ में हम उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं. हम एक ऐसा मंच बनाना चाहते थे जो भारतीय दृष्टिकोण से परिपूर्ण हो, वैश्विक स्तर पर जुड़ा हो, और व्यावहारिक दृष्टिकोण भी रखता हो.

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आईएएनएस
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