- रेलवे जज ने DRM को VIP रूम के सोफे पर खटमल मिलने पर नोटिस भेजा है.
- मामला महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन के VIP रूम का है.
- DRM ने निर्देश के बाद भी सोफे नहीं बदले थे, जिसके बाद नोटिस भेजा गया है.
महाराष्ट्र के औरंगाबाद रेलवे के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने नांदेड़ डिवीजन के डीआरएम को नोटिस भेजा है. यह नोटिस VIP वेटिंग रूम में लगे सोफे पर खटमल मिलने को लेकर जारी किया गया है. जज ने सोफे बदलने और पेस्ट कंट्रोल करने का निर्देश दिए जाने के बाद भी उसका पालन नहीं किया गया था. बताया जा रहा है कि 20 मई 2026 को यह निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसके बाद भी उनका पालन नहीं किया गया, ऐसे में यह नोटिस जारी किया गया है. जिसकी वजह से यह मामला चर्चा में बना हुआ है. क्योंकि खटमल मिलने पर एक्शन हुआ है.
खटमल मिलने के बाद भी नहीं दिया ध्यान
दरअसल, मामला 20 मई 2026 का है. जब VIP रूम के पुराने सोफों में कई खटमल मिलने के बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने DRM को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी थी. रेलवे अधिकारियों को पेस्ट कंट्रोल करने और मौजूदा सोफों को नए सोफों से बदलने और VIP रूम का ठीक से रखरखाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था. लगभग चार महीने बाद 19 सितंबर तक भी न तो सोफे बदले और न ही पेस्ट कंट्रोल हुआ. जिसके बाद यह कारण बताओं नोटिस जारी किया गया है. नोटिस में कहा गया है कि मौजूदा सोफो में अभी भी खटमल हैं और इसे हाई कोर्ट के जजों के बैठने के लिए 'घिनौनी स्थिति' है. इसमें यह भी कहा गया है कि जज VIP रूम का इस्तेमाल करने के बजाय अपनी कारों में बैठ रहे थे.
जज ने दिया नोटिस

जज VIP रूम में इंतजार करते हैं
नोटिस में बताया गया है कि बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच में 15 से ज्यादा हाई कोर्ट जज हैं और उनमें से ज्यादातर ट्रेन से यात्रा करते हैं और उन्हें VIP रूम में इंतजार करना पड़ता है. रेलवे अधिकारियों को 20 मई को भेजे गए पिछले संदेश का जवाब न देने या उस पर संतोषजनक कार्रवाई न करने के लिए भी फटकार लगाई गई है. ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने अब DRM नांदेड़ डिवीजन से कारण बताने को कहा है कि पिछले निर्देशों का पालन न करने के लिए 'अदालत की अवमानना' कानून के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए.
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अधिकारी को 30 सितंबर, 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है. नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर निर्देशों का पालन नहीं किया गया. तो 'कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट्स एक्ट' के तहत आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी. नोटिस की एक कॉपी साउथ सेंट्रल रेलवे के जनरल मैनेजर को भी भेजी गई है, जबकि औरंगाबाद में RPF इंस्पेक्टर को नोटिस तामील करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.
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