मारे गए केमिस्ट ने नुपुर शर्मा से जुड़ी पोस्ट व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट की थी, जिसमें मुस्लिम भी थे सदस्य : पुलिस

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विक्रम साली ने भारी दबाव के बीच कहा, "आरोपियों ने बताया कि उन्होंने नुपुर शर्मा के बारे में पोस्ट करने को लेकर कोल्हे को मार डाला."

अमरावती:

महाराष्ट्र के अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे (Amravati Chemist Murder) की सनसनीखेज तरीके से की गई हत्या और उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल साहू के मर्डर का तौरतरीका काफी कुछ हद तक मेल खाता है. कन्हैया लाल (Tailor Kanhaiya Lal) को हत्यारोपियों ने उसी की दुकान में चाकुओं से हमला कर मार डाला था और इस वारदात का वीडियो भी बनाया था. कन्हैया लाल ने भी नुपुर शर्मा का समर्थन करने वाली पोस्ट को शेयर किया था. उमेश कोल्हे की पिछले माह अमरावती में हत्या कर दी गई थी. अमरावती पुलिस का कहना है कि उमेश कोल्हे ने पैगंबर मोहम्मद पर विवादित बयान देने वालीं निलंबित बीजेपी नेता नुपुर शर्मा (BJP Nupur Sharma) के समर्थन वाली पोस्ट व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर की थी. इस ग्रुप में मुस्लिम भी सदस्य थे. अब यह केस केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया है.

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स्थानीय बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया था कि पुलिस हत्या के मकसद से जुड़े तथ्यों को छिपाने का प्रयास कर रही है. पुलिस अफसर के हवाले से पीटीआई ने बताया, "कोल्हे अमरावती शहर में एक मेडिकल स्टोर चलाते थे. उन्होंने नुपुर शर्मा का समर्थन करने वाला एक पोस्ट व्हाट्सऐप ग्रुप पर शेयर किया था. उस समूह में कुछ मुस्लिम भी सदस्य थे, जिनमें से कुछ उनके ग्राहक थे."  21 जून को, कोल्हे जब अपनी दुकान बंद करके घर को लौट रहे थे तो रात 10 बजे के करीब मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने गला रेतकर उनकी हत्या कर दी. उनकी 27 साल का बेटा और पत्नी एक दूसरे वाहन में पीछे आ रहे थे.  12 दिन पहले हुए इस मर्डर के बाद पुलिस ने अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया , लेकिन शनिवार सुबह तक यह नहीं माना कि यह हत्या नुपुर शर्मा के समर्थन से जुड़ी हुई थी.

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वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विक्रम साली ने भारी दबाव के बीच कहा, "आरोपियों ने बताया कि उन्होंने नुपुर शर्मा के बारे में पोस्ट करने को लेकर कोल्हे को मार डाला." "अमरावती जिले में बीजेपी नेता तुषार भारतीय ने कहा, यह घटना 21 जून को हुई थी. अगर यह बात 22 जून को बड़े पैमाने पर फैल गई होती तो शायद उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या नहीं हुई होती."

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