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6 रुपये के बैग पर 10 हजार का जुर्माना? कोर्ट ने ग्राहक के हक में कंपनी को सुनाया फैसला

दिल्ली में 6 रुपये के कैरी बैग का मामला साउथ दिल्ली के कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा. कोर्ट ने ग्राहक को सही माना और मशहूर जूते की कंपनी को 10 हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया.

6 रुपये के बैग पर 10 हजार का जुर्माना? कोर्ट ने ग्राहक के हक में कंपनी को सुनाया फैसला
6 रुपये के बैग पर हुआ विवाद, कंपनी को चुकाने पड़ेंगे 10 हजार रुपये.

मॉल, शोरूम और बड़ी दुकानों में खरीदारी करते समय बिल के साथ कैरी बैग का चार्ज जुड़ जाना आम बात है. ज्यादातर लोग कुछ रुपये देखकर बहस नहीं करते और भुगतान कर देते हैं. लेकिन क्या होगा अगर ग्राहक को पहले से यह बताया ही न जाए कि बैग के लिए अलग पैसे देने होंगे? दिल्ली में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां सिर्फ 6 रुपये के कैरी बैग को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिरकार साउथ दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) तक पहुंच गया. नतीजा यह रहा कि ग्राहक की शिकायत सही मानी गई और मशहूर फुटवियर कंपनी को 10 हजार रुपये देने का आदेश सुनाया गया. मामला अब ग्राहकों के अधिकारों को लेकर भी चर्चा में है.

क्या था पूरा मामला- 

मामला साल 2023 का है. दिल्ली की एक महिला ग्राहक ने एक स्टोर से करीब 1,500 रुपये के जूते खरीदे थे. खरीदारी पूरी होने के बाद जब बिल उनके हाथ में आया, तब उन्हें पता चला कि कैरी बैग के लिए अलग से 6 रुपये भी जोड़े गए हैं. महिला का कहना था कि स्टोर में कहीं भी ऐसा कोई बोर्ड या सूचना नहीं लगी थी, जिससे ग्राहकों को पहले से पता चल सके कि बैग के लिए अतिरिक्त भुगतान करना होगा. उनका तर्क था कि अगर पहले जानकारी होती तो वह अपना अलग बैग लेकर आतीं. 

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6 रुपये के बैग के लिए कंपनी को देना पड़ा 10 हजार. (Image NDTV) 

उपभोक्ता आयोग ने किस बात को माना अहम?

आयोग ने माना कि कैरी बैग के पैसे लेना गलत नहीं है, लेकिन ग्राहकों को पहले से इसकी स्पष्ट सूचना दी जानी चाहिए. फैसले में कहा गया कि विवाद कैरी बैग के 6 रुपये लेने को लेकर नहीं था, बल्कि ग्राहकों को पहले से इसकी जानकारी न देने को लेकर था. आयोग के अनुसार, जब ग्राहक को खरीदारी से पहले शुल्क की जानकारी नहीं मिलती, तो वह सोच-समझकर फैसला नहीं ले पाता. यही वजह रही कि शिकायत को उचित माना गया.

कंपनी को देना होगा मुआवजा-

फैसले में ग्राहक के पक्ष में आदेश देते हुए कंपनी को 10 हजार रुपये देने को कहा गया. इसमें मुआवजा और मामले से जुड़े खर्च भी शामिल हैं. आयोग ने यह भी कहा कि ग्राहक को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसे किसी चीज के लिए कितना और क्यों भुगतान करना पड़ रहा है.

कंपनी ने क्या कहा?

कंपनी की ओर से दलील दी गई कि कैरी बैग एक अलग उत्पाद था और उसका शुल्क बिल में स्पष्ट रूप से दिखाया गया था. साथ ही यह भी कहा गया कि बैग ग्राहक की सहमति के बाद दिया गया था. हालांकि आयोग को यह तर्क पर्याप्त नहीं लगा, क्योंकि विवाद का मुख्य मुद्दा पैसे लेना नहीं, बल्कि पहले से जानकारी न देना था.

यह पहली बार नहीं है जब कैरी बैग को लेकर किसी बड़ी रिटेल कंपनी पर सवाल उठे हों. इससे पहले भी अलग-अलग शहरों में उपभोक्ता आयोग इस तरह के मामलों पर टिप्पणी कर चुके हैं. ऐसे मामलों में अक्सर यही देखा जाता है कि ग्राहक को पहले से जानकारी दी गई थी या नहीं.यही वजह है कि खरीदारी करते समय बिल पर नजर रखना और स्टोर में लगी सूचनाएं पढ़ना ग्राहकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

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लेखक के बारे में
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आराधना सिंह
सीनियर सब एडिटर
दिल से फूडी हूं! इटेलियन, चाइनीज और इंडियन फूड्स खाना ही नहीं उनके बारे में जानना और बात करना भी पसंद है. नए स्वाद और फूड की तलाश का जुनून हर समय रहता... और पढ़ें
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