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खाने-पीने की चीजों पर '100%' का झूठा दावा और तेल का नाम छुपाना पड़ेगा भारी, FSSAI, CCPA ने कसा शिकंजा

देश में सीसीपीए ने 100% झूठा दावा करने पर स्टोरिया फूड्स और मिसेज बेक्टर्स पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. वहीं FSSAI ने तेल का नाम छुपाने पर रिश्ते नमकीन को नोटिस थमा दिया है.

खाने-पीने की चीजों पर '100%' का झूठा दावा और तेल का नाम छुपाना पड़ेगा भारी, FSSAI, CCPA ने कसा शिकंजा
FSSAI और CCPA ने झूठे दावों वाले ऐड दिखाने पर देश की बड़ी कंपनियों पर एक्शन लिया है.
FSSAI

टीवी ऐड हो या मार्केट या फिर सोशल मीडिया, कई बार आपने कंपनियों के ऐसे प्रोडक्ट देखे होंगे जिन पर नेचुरल या फिर प्योर जैसे बड़े दावे किए जा रहे हों. पर सवाल ये है कि क्या ये दावे सच्चाई पर खरा उतरते हैं? जवाब आपको ज्यादातर ना में ही मिलेगा. इन बढ़ते फेक मामलों को देखते हुए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के साथ कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी यानी CCPA ने एक्शन लेना शुरू कर दिया है. हाल ही में दो अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है. 

FSSAI के रडार पर 'रिश्ते नमकीन'

पहला मामला FSSAI से जुड़ा है. दरअसल सोशल मीडिया पर एक ग्राहक की शिकायत के बाद FSSAI ने रिश्ते नमकीन को एक नोटिस दिया है. ग्राहक ने शिकायत की थी कि कंपनी के दो पॉपुलर प्रोडक्ट्स फरसान स्ट्रीट मसाला पत्ता और फरसान स्ट्रीट रोस्टेड मिलेट भेल के पैकेट पर सिर्फ खाद्य वनस्पति तेल लिखा था. लेकिन ये साफ नहीं किया था कि वो कौन सा तेल है. FSSAI के अनुसार ये फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस, 2020 के नियमों का उल्लंघन है. इन नियमों के अनुसार कंपनी को बताना जरूरी है कि वो प्रोडक्ट में किस तेल, जैसे पाम ऑयल, मूंगफली का तेल, या राइस ब्रैन ऑयल का इस्तेमाल कर रही हैं. सिर्फ वेजिटेबल ऑयल लिख देना नियमों के खिलाफ है.

FSSAI ने मांगा जवाब

इस पूरे मामले पर फूड सेफ्टी अथॉरिटी ने कंपनी को निर्देश देते हुए कहा है कि, कंपनी ये बताए कि उसने लेबल पर तेल का नाम क्यों नहीं लिखा? साथ वो साबित करे कि उन्होंने 2020 के लेबलिंग नियम नहीं तोड़े हैं. साथ ही एक कार्रवाई रिपोर्ट जमा करे, जिसमें बताए कि गलती सुधारने और भविष्य में ऐसी कमी दोबारा ना होने देने के लिए क्या कदम उठाए हैं.

स्टोरिया फूड्स और मिसेज बेक्टर्स पर 1-1 लाख का जुर्माना

वहीं दूसरे केस में सीसीपीए ने स्टोरिया फूड्स और मिसेज बेक्टर्स नाम की बड़ी कंपनियों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. पीआईबी के अनुसार इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने अपने प्रोडक्ट्स के ऐड और पैकेजिंग पर 100% शब्द का झूठा दावा किया. सीसीपीए ने साफ कहा कि 100% वाले दावा मतलब एब्सोल्यूट न्यूमेरिकल क्लेम की कैटेगरी में ये आता है. मतलब ये कि अगर आप 100% लिख रहे हैं तो आपकी कही हुई बात प्रोडक्ट में होनी ही चाहिए. 

कंपनी ने किए थे 100% वाले झूठे दावे

स्टोरिया ने अपने प्रोडक्ट्स को 100% नारियल पानी, 100% जूस - अनार, 100% जूस - मिक्स फ्रूट, 100% जूस - आम, 100% जूस - अमरूद के तौर पर एडवर्टाइज किया. अथॉरिटी को इसके उलट प्रोडक्ट में चीजें मिलीं. ऐसा ही मामला मिसेज बेक्टर्स का था. इन्होंने 100% आटा ब्रेड, 100% साबुत गेहूं की ब्रेड जैसे फर्जी दावे किए हुए थे, जिस पर सीसीपीए ने सख्त कदम उठाते हुए आदेश दिए कि कंपनी अपनी पैकेजिंग, वेबसाइट और सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से इन झूठे दावों को तुरंत हटाएं.

मालूम हो कि पैकेट के पीछे लिखी सामग्री सूची कोई मामूली जानकारी नहीं है. ये नागरिक का अधिकार है कि वो जो खा रहा है, उसके बारे में सभी कुछ पता होना चाहिए. काफी लोगों को कई चीजों से एलर्जी होती है, ऐसे में ये जानकारी उनके सेहत का ध्यान रखने के लिए बहुत जरूरी है.

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लेखक के बारे में
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पल्लव मिश्रा
Correspondent
रेलवे, नागरिक उड्डयन और स्वास्थ्य मंत्रालय की अच्छी समझ रखने वाले पल्लव मिश्रा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रहें है. फिलहाल वह एनडीटीवी इंडिया के न... और पढ़ें
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