- केदारनाथ धाम में सबसे अधिक 94 तीर्थयात्रियों की मौत हुई है, जो स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त थे
- चार धाम यात्रा में इस साल 38 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं, जो पिछले वर्षों से अधिक संख्या है
- प्रमुख कारणों में हार्ट अटैक और उच्च पर्वतीय क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी से होने वाली बीमारी शामिल हैं
उत्तराखंड में चार धाम यात्रा में अब तक खराब स्वास्थ्य की वजह से 200 लोगों की मौत हो चुकी है. चार धाम यात्रा शुरू हुए 64 दिन ही हुए हैं, मगर मौत का आंकड़ा दोहरा शतक लगा चुका है. सबसे ज्यादा केदारनाथ में श्रद्धालुओं की खराब स्वास्थ्य होने के चलते मौत हुई है. केदारनाथ में 94 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है.
कौन से धाम में कितनी मौतें
साल 2026 की चार धाम यात्रा यात्रियों की संख्या 38 लाख के पार हो चुकी है. 19 अप्रैल से शुरू हुई चार धाम यात्रा में 38 लाख 52 हजार 316 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं. बदरीनाथ धाम में अब तक 62 श्रद्धालुओं की मौत खराब स्वास्थ्य के कारण हुई है. गंगोत्री धाम में अब तक 18 श्रद्धालुओं की मौत खराब स्वास्थ्य के कारण हुई है. यमुनोत्री धाम में अब तक 26 श्रद्धालुओं की मौत खराब स्वास्थ्य के कारण हुई है. केदारनाथ में 94 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है.
हेल्थ एडवाइजरी नजरअंदाज करना पड़ा भारी
सबसे ज्यादा हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के कारण मौतें हुईं हैं. राज्य सरकार ने यात्रा शुरू होने से पहले सभी राज्यों को चार धाम की यात्रा में आने के लिए एक हेल्थ एडवाइजरी भी जारी की थी, लेकिन उस हेल्थ एडवाइजरी को नजरअंदाज किया गया. नजरअंदाज करने वाले कोई और नहीं, बल्कि चार धाम यात्रा करने वाले तीर्थ यात्री ही हैं. उत्तराखंड के चारों धाम उच्च हिमालय क्षेत्र में है. चारों धाम लगभग 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं. यहां मौसम कभी एक जैसा नहीं रहता है. यहां पर सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की कमी रहती है. इसके अलावा ठंड बहुत ज्यादा होती है.
क्यों खराब होती है तबीयत
चार धाम यात्रा ऊंचाई पर होने की वजह से इन क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी लगातार अंतराल में होती रहती है. इसकी वजह से तापमान काफी नीचे चला जाता है. उत्तराखंड के चार धाम यात्रा करने वाले सबसे ज्यादा तीर्थयात्री उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा ,दिल्ली, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, और बिहार के अलावा अन्य प्रदेशों से आते हैं. इन सब प्रदेशों में तापमान 40 से 48 डिग्री तक चल रहे हैं. इनके लिए इतनी ऊंचाई और ठंड बर्दाश्त करना मुश्किल होता है.
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