केंद्र सरकार ने मंगलवार को "आतंकवादी कृत्य" की कानूनी परिभाषा को नया रूप दिया है. नए क्रिमिनल कोड में फर्जी नोट चलाना और सरकार को धमकाने के लिए अपहरण, किसी को घायल करने और उसकी मौत का कारण बनना भी अब आतंकवाद की श्रेणी में होगा. इसके साथ ही क्रूरता को पुन: परिभाषित किया गया है, जिसमें एक महिला के मानसिक स्वास्थ्य (Woman's Mental Health) को नुकसान पहुंचाना शामिल है.
आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाले नकली मुद्रा के व्यापार को अब आतंकवादी कृत्य माना जाएगा. साथ ही सरकार को धमकाने के लिए किसी व्यक्ति का अपहरण भी आतंकवादी कृत्य के रूप में परिभाषित किया गया है.
सरकार ने भारतीय न्याय संहिता या बीएनएस में दो नए सेक्शन जोड़े हैं, जो आपराधिक प्रक्रिया संहिता सहित मौजूदा आपराधिक कानूनों को बदलने के लिए बनाए गए तीन विधेयकों में से एक हैं.
इसकी धारा 86 में "क्रूरता" को परिभाषित किया गया है, जिसमें एक महिला के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना शामिल है.
विधेयक के पिछले संस्करण में धारा 85 में पति या उसके परिवार के सदस्यों को अपनी पत्नी के साथ क्रूर व्यवहार करने का दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान था.
हालांकि उसमें "क्रूर व्यवहार" को परिभाषित नहीं किया गया था. इसे अब शामिल कर लिया गया है और यह परिभाषा महिला के मानसिक स्वास्थ्य के साथ ही उसके शारीरिक स्वास्थ्य तक विस्तृत है. इसमें किसी यौन उत्पीड़न पीड़िता की अनुमति के बिना अदालती कार्यवाही से उसकी पहचान उजागर करने पर दो साल की जेल की सजा का प्रावधान है.
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