- केंद्र की 81,000 करोड़ रुपये की ग्रेट निकोबार परियोजना को एनजीटी ने मंजूरी दे दी है, लेकिन इस पर विवाद भी है
- परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों और आदिवासी समुदायों के अधिकारों को लेकर स्थानीय आदिवासी और जानकार चिंतित हैं
- परियोजना का उद्देश्य इस क्षेत्र को सामरिक, व्यापारिक और पर्यटन केंद्र बनाकर भारत की समुद्री सुरक्षा बढ़ाना है
भारत सरकार का 81,000 करोड़ का ‘ग्रेट निकोबार समग्र विकास परियोजना' मंजूरी के बाद से ही विवादों में है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस परियोजना को हरी झंडी दिखा दी है, लेकिन जानकारों का कहना है कि एनजीटी को परियोजना के रणनीतिक महत्व के बजाय इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर अधिक चिंतित होना चाहिए था. अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज अंडमान-निकोबार के दो दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं. जहां वो ग्रेट निकोबार द्वीप भी जाएंगे.
ग्रेट निकोबार परियोजना इस क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर लंबे समय से विवाद के केंद्र में है.
आदिवासी नेताओं ने ग्रेट निकोबार परियोजना पर जताई चिंता
पिछले महीने ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एक जनजातीय प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी और ग्रेट निकोबार इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना पर चिंता व्यक्त की थी. उन्होंने ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और वहां के मूल आदिवासी समुदायों पर परियोजना के संभावित प्रतिकूल प्रभाव के बारे में आशंका व्यक्त की थी.

राहुल गांधी ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया था कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए उनकी चिंताओं को उठाएगी. उस मुलाकात में प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से द्वीपसमूह आकर स्थिति देखने के लिए कहा था.
क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?
81,000 करोड़ की ‘ग्रेट निकोबार समग्र विकास परियोजना' भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. इसका मकसद अंडमान और निकोबार के दक्षिणी छोर पर स्थित ग्रेट निकोबार द्वीप का विकास करना है. 166 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, एक हवाई अड्डा, टाउनशिप और 450 मेगावाट क्षमता वाला गैस एवं सौर ऊर्जा आधारित संयंत्र निर्माण करना है. साथ ही इस क्षेत्र को व्यापार, पर्यटन और सामरिक (रक्षा) केंद्र के रूप में भी विकसित करना है.

ग्रेट निकोबार द्वीप पर दोहरे उपयोग वाले हवाई अड्डे के विकास की योजना
ग्रेट निकोबार में एक नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण की योजना तैयार की गई है. ये देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगा. इसे सैन्य एवं असैन्य दोनों उपयोगों के लिए विकसित किया जाएगा. इसका एयरसाइड और हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) भारतीय नौसेना के पास रहेगा, जबकि असैन्य विमानों की पार्किंग एवं यात्रियों के चढ़ने-उतरने का नियंत्रण और यात्रियों से जुड़ी सुविधाएं भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) संभालेगा.
इस योजना के मुताबिक, साल 2050 तक द्वीप की आबादी 6.5 लाख तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वर्तमान जनसंख्या सिर्फ 6,500 के आसपास है.

मनमोहक है निकोबार द्वीप
ग्रेट निकोबार द्वीप समूह जंगली सीमावर्ती इलाका है. यहां समुद्र किनारे रेत की पट्टी, खाड़ी, हिंद महासागर का नीला और हरा पानी, घने जंगल इसे मनमोहक बनाते हैं. यहां के जंगल में ऐसे पेड़-पौधे और जीव-जंतु हैं जो कहीं और नहीं मिलते. यहां का मौसम भी बदलता रहता है. दिन में हवा गर्म और उमस, तो रात होते ही, समुद्र तट शांत और ठंडा हो जाता है. चांदनी समुद्र पर चांदी जैसी चमक बिखेरती है. यहां लेदरबैक कछुआ दो मीटर लंबा और 400 किलोग्राम से अधिक वजन का है, और पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे बड़े समुद्री कछुओं में से एक है.
भारतीय मुख्य भूमि इस द्वीप से करीब 1,500 किलोमीटर दूर है. दिल्ली लगभग 3,000 किलोमीटर, जबकि कोलकाता और मुंबई क्रमशः 1,850 एवं 2,250 किलोमीटर दूर स्थित हैं. वहीं सिंगापुर, वियतनाम और बाली 1,000 से 1,500 किलोमीटर की परिधि में हैं.
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