- मणिपुर में नागरिकों की मांग पर जनगणना को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है
- राज्य में प्रदर्शन हुए थे जिसमें नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजंस पहले बनाने की मांग की गई थी
- अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मणिपुर की जनगणना स्थगित करने का निर्णय लिया गया
मणिपुर में जनगणना को सरकार ने अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है. यह जनगणना मणिपुर में नागरिकों की मांग पर की गई है. राज्य में प्रदर्शन चल रहे थे कि पहले यहां नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजंस तैयार कर लिया जाए. उसके बाद ही जनगणना की प्रक्रिया शुरू की जाए. सोमवार को होम मिनिस्टर अमित शाह की अध्यक्षता में हुई मीटिंग के बाद यह फैसला लिया गया है. इस मीटिंग में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, चीफ मिनिस्टर खेमचंद सिंह मौजूद थे. इसके अलावा होम मिनिस्ट्री के भी कई सीनियर अधिकारियों की उपस्थिति थी. इससे पहले मणिपुर हाई कोर्ट ने भी जनगणना को रोके जाने का फैसला दिया था.
अदालत का कहना था कि 1 सितंबर से होने वाली जनगणना की प्रक्रिया को रोक लिया जाए. इसके बाद दिल्ली में अमित शाह की अध्यक्षता में मीटिंग हुई और जनगणना रोकने का निर्णय लिया गया. इस बैठक में चर्चा हुई कि मणिपुर में लोगों की क्या मांग है और इस पर कैसे अमल किया जाए. मणिपुर में नागरिक कई बार प्रदर्शन भी कर चुके हैं कि पहले सूबे में एनआरसी को लागू किया जाए. इसके बाद ही जनगणना की प्रक्रिया हो. इस बैठक में सहमति बनी कि राज्य के लोगों की डिमांड को ध्यान में रखा जाए.
अमित शाह की मीटिंग के बाद जनगणना रोके जाने के फैसले का मणिपुर के सीएम खेमचंद ने स्वागत किया और केंद्र सरकार को धन्यवाद कहा. उन्होंने कहा कि हम सरकार को थैंक्स बोलते हैं कि उन्होंने मणिपुर के लोगों की भावनाओं का ध्यान रखा. सीएम खेमचंद ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी मणिपुर के लोगों की भावनाओं का ख्याल रखा है. बता दें कि मणिपुर के कुल 14 संगठनों ने मांग की थी कि जनगणना को फिलहाल रोक लिया जाए. इस मांग के साथ मणिपुर के कई भाजपा सांसद पिछले दिनों दिल्ली भी आए थे.
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