- पीएम मोदी ने पीएम राहत योजना को मंजूरी दी है, जिससे सड़क दुर्घटना पीड़ितों को कैशलेस इलाज मिल सकेगा
- दुर्घटना पीड़ितों को सात दिनों तक प्रति व्यक्ति डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मुहैया कराया जाएगा
- इलाज के खर्च का भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष एवं बीमा कंपनियों द्वारा किया जाएगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के सेवा तीर्थ में शिफ्ट होने के बाद अपने पहले फैसले में पीएम राहत (सड़क दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस उपचार) योजना शुरू करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी है. इस फैसले से देशभर में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को तत्काल चिकित्सीय सहायता मिल सकेगी. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पास मौजूद तथ्यों के मुताबिक, "भारत में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बहुत अधिक संख्या में मौते होती हैं, जिनमें से अनेक को समय पर चिकित्सीय सहायता प्रदान कर टाला जा सकता है. अध्ययनों से संकेत मिलता है कि अगर दुर्घटना पीड़ितों को पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती करा दिया जाए, तो लगभग 50% मौतों को टाला जा सकता है."
"पीएम राहत" योजना को मंज़ूरी
ज़ाहिर है, इस नयी "पीएम राहत" योजना को मंज़ूरी देकर प्रधानमंत्री ने दुर्घटना पीड़ितों के लिए एक कारगर आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र (emergency response system) स्थापित करने और अस्पतालों के लिए भी वित्तीय सुनिश्चितता को प्राथमिकता दी है. किसी भी सड़क हादसे की स्थिति में सड़क दुर्घटना पीड़ित, राह-वीर या दुर्घटना स्थल पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 नंबर डायल करके निकटतम नामित हॉस्पिटल की जानकारी ले सकता है और एम्बुलेंस सहायता के लिए अनुरोध कर सकता है.
गोल्डन आवर में अस्पतारल पहुंचाने से बचेगी जान
इससे आपातकालीन सेवाओं, पुलिस प्राधिकरणों और अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल भी संभव हो सकेगा, क्योंकि आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (Emergency Response Support System) 112 हेल्पलाइन के साथ इंटीग्रेटेड होने से सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन आवर (Golden Hour) के भीतर अस्पताल पहुंचाना संभव हो सकेगा.
7 दिनों तक मिलेगा 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक इस योजना के तहत, "किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुई दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों की अवधि तक प्रति व्यक्ति 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार प्रदान किया जाएगा. जीवन को खतरे में नहीं डालने वाले मामलों में अधिकतम 24 घंटे तक तथा जीवन के लिए घातक मामलों में अधिकतम 48 घंटे तक स्टेबलाइजेशन उपचार उपलब्ध कराया जाएगा. यह सुविधा एकीकृत डिजिटल प्रणाली पर पुलिस प्रमाणीकरण के अधीन होगी. निर्धारित समय-सीमा के भीतर, जीवन को खतरे में नहीं डालने वाले मामलों में 24 घंटे के भीतर और जीवन के लिए घातक मामलों में 48 घंटे के भीतर, पुलिस की पुष्टि आवश्यक होगी, ताकि आपातकालीन उपचार निर्बाध रूप से जारी रहने के साथ ही जवाबदेही सुनिश्चित हो सके."
मोटर वाहन दुर्घटना कोष से होगा इलाज का खर्च
अस्पतालों को इलाज़ के खर्च का भुगतान प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना कोष (Motor Vehicle Accident Fund) के माध्यम से किया जायेगा. जिन मामलों में दोषी वाहन बीमित होगा, उनमें भुगतान सामान्य बीमा कंपनियों (General Insurance Companies) द्वारा किए गए कंट्रीब्यूशन से किया जाएगा. बिना बीमा वाले और हिट एंड रन मामलों में भुगतान भारत सरकार द्वारा बजटीय आवंटन के माध्यम से किया जाएगा.
10 दिनों के भीतर होगा क्लम्स का भुगतान
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (State Health Agency) द्वारा स्वीकृत किये गए क्लेम्स का भुगतान 10 दिनों के अंदर किया जाएगा, जिससे अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चितता होगा और पीड़ितों का इलाज़ भी बाधित नहीं होगा. ज़ाहिर है, “पीएम राहत” योजना सड़क दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाने और देश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम पहल है.
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