अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और इसकी वजह से अंतराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, व्यापार, ग्लोबल एनर्जी मार्केट और एक्सपोर्टरों में अनिश्चितता भी बढ़ती जा रही है. दरअसल, 2026 के शुरुआत में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती अनिश्चितता की वजह से दुनियाभर में देश इसके संभावित असर से निपटने की तैयारी में जुट गए हैं. इस साल के बजट को अंतिम रूप देने में जुटी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से उम्मीद है कि वो अपने बजटीय प्रस्तावों में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के इस ताज़ा घटनाक्रम का अंतराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ने वाले संभावित असर को ध्यान में रखेंगी.
बुधवार को एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में उद्योग संघ - कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (CII) की इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष और DEKI इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के एमडी, विनोद शर्मा ने कहा,"बजट 2026-27 से ठीक पहले, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण भू-राजनीतिक अनिश्चितता (geo-political uncertainty) बढ़ रही है. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग में अपने पिछले तीन दशकों के अनुभव में मैंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में इतनी अधिक अनिश्चितता कभी नहीं देखी."
विनोद शर्मा कहते हैं, अगस्त 2025 से ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ट्रेड का स्वरुप बदला है. अब बदलती अंतराष्ट्रीय परिस्थिति भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है. लेकिन इसके लिए वित्त मंत्री को इस साल के बजट में विशेष प्रावधान शामिल करने होंगे.
DEKI इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के एमडी, विनोद शर्मा ने एनडीटीवी से कहा,"राजनीतिक अनिश्चितता भारत को एक मजबूत और विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला केंद्र (Global Supply Chain Hub) के रूप में विकसित करने का अवसर है. भारत को चीन के विकल्प के तौर पर एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) के रूप में स्थापित करने के लिए देश में व्यापार करने की लागत (Cost of Doing Business) को कम करना होगा. इंडस्ट्री के लिए बिजली की कीमत भारत में अधिक है, ये लगभग चीन की तुलना में दोगुनी है. विनिर्माण इकाई चलाने में शामिल रसद लागत ( logistics cost) को भी कम करने की तत्काल आवश्यकता है."
तीन दशक से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चला रहे विनोद शर्मा मानते हैं, निचले स्तर की नौकरशाही प्रणालियों में सुधार करके व्यापार करना आसान बनाने (Ease of Doing Business) के लिए मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार बेहद ज़रूरी है. उद्योग संघ CII ने बजट 2026-27 में सीमा शुल्क (Customs Duties) को तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है. CII ने सरकार से अनुरोध किया है कि कच्चे माल पर सीमा शुल्क 0% से 2.5% और तैयार माल पर 5% से 10% के बीच होना चाहिए.
विनोद शर्मा के मुताबिक, बजट 2025-26 में घोषित अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष (Research Development and Innovation Fund) को सक्रिय किया जाना चाहिए. साथ ही, बजट 2025-26 में घोषित राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (National Manufacturing Mission) को भी शीघ्र लागू करना ज़रूरी है
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