- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी की जीत को लेकर आश्वस्त
- 2006 के चुनावों में SIR के कारण वोट कटने से सीपीएम को फायदा हुआ था, जिससे बीजेपी सतर्क है
- नितिन नबीन के अनुसार इस बार टीएमसी में बेचैनी है जबकि बीजेपी के वोट कटने के बाद भी कोई बेचैनी नहीं है
पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार होगी? चुनावी रण में बीजेपी वर्सेज टीएमसी में बाजी कौन मारेगा? इसका जवाब जनता के पास है,जो उसने वोट के रूप में ईवीएम में लॉक कर दिया है और बाकी 29 अप्रैल को तय हो जाएगा. नतीजे 4 मई को आएंगे लेकिन उससे पहले NDTV के एडिटर इन चीफ राहुल कंवल ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक्सक्लूसिव बातचीत की. नितिन नबीन इस दौरान भाजपा की जीत को लेकर आश्वस्त दिखे. SIR और वोट कटने के डर के बीच हुए इस चुनाव में क्या इस बार गेम बीजेपी के पक्ष में ज्यादा है या अभी भी जनता टीएमसी को ही देख रही है. खास बातचीत में 2006 वाले विधानसभा नतीजे की बात हुई जब इसी तरह SIR का असर सीपीएम ने भुनाते हुए बड़ी मार्जिन से जीत दर्ज की थी. इसपर आइए जानते हैं कि नितिन नबीन ने क्या जवाब दिया.
बीजेपी के साथ न हो जाए 2006 वाला अंजाम
एनडीटीवी के एडिटर इन चीफ राहुल कंवल ने 2006 के पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों की याद दिलाते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से सवाल पूछा. राहुल कंवल ने कहा कि 2006 में चुनाव आयोग के सलाहकार केजी राव आए थे. तब भी इसी तरह SIR के तहत वोटर्स के नाम कटे थे,लेकिन इसने उलटे तब सीपीएम को इसका फायदा हुआ और वह और बड़ी जीत के साथ वापसी कर गई. तब वोटर्स को डर था कि कहीं वोट नहीं दिया तो उनका वजूद खत्म हो जाएगा. तब 75 फीसदी से ज्यादा वोट 84 प्रतिशत सीटों पर पड़ा. राहुल ने पूछा कि कहीं इस बार भी टीएमसी को SIR से लाभ न मिल जाए.
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'हमारे अंदर कोई बेचैनी नहीं है....'
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इसका जवाब देते हुए बताया कि बेचैनी तो तृणमूल कांग्रेस में है, हमारे यहां कोई बेचैनी नहीं है. 93 लाख वोट कटने के बाद किसके अंदर बेचैनी है, वो आप देख सकते हैं. राहुल कंवल ने पूछा कि जहां-जहां टीएमसी के वोट 11 फीसदी से ज्यादा कटे हैं, ये वो जिले हैं जो बांग्लादेश की सीमाओं से लगे हुए हैं, मतलब वहां टीएमसी जीता करती थी, चुनाव आयोग ने वहां ज्यादा ऐक्शन लिया है. नितिन नबीन ने इसपर कहा कि वो जिले बांग्लादेश से लगे हुए थे, तो क्या बांग्लादेश के लोग यहां आकर वोट करेंगे. जहां तक नाम काटने की बात है, चुनाव आयोग को डीएम,एसडीओ के प्रस्ताव पर ही इलेक्शन कमीशन निर्णय लेता है. नितिन नबीन ने कहा कि इलेक्शन कमीशन तो जिला प्रशासन के प्रस्ताव के आधार पर ही चुनाव आयोग काम करता है. क्या आप बांग्लादेश के लोगों को वोट करने का अधिकार देंगे?
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