- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में नीतू समरा को अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है.
- नियुक्ति बीसीएएस के नियमों के तहत हुई है, जो एयरपोर्ट के संचालन में नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करेगी.
- पूर्व सीईओ क्रिस्टोफ स्कैनेलमैन को एयरपोर्ट निदेशक मंडल में कार्यकारी उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया है.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) के नेतृत्व स्तर पर बड़ा बदलाव किया गया हैं. एयरपोर्ट प्रबंधन ने नीतू समरा को तत्काल प्रभाव से अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक निदेशक मंडल द्वारा नियमित सीईओ के चयन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं कर ली जाती. यह बदलाव ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) के निर्देशों के अनुपालन में किया गया है. बीसीएएस के नियमों के अनुसार भारत में किसी भी एयरपोर्ट का सीईओ भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है. इसी के चलते यह निर्णय लिया गया है, ताकि एयरपोर्ट संचालन सभी नियामकीय मानकों के अनुरूप हो सके.
क्रिस्टोफ स्कैनेलमैन को अब नई भूमिका
वहीं, अब तक सीईओ के रूप में कार्य कर रहे क्रिस्टोफ स्कैनेलमैन को नई भूमिका देते हुए एयरपोर्ट के निदेशक मंडल में कार्यकारी उपाध्यक्ष (एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन) नियुक्त किया गया है. इस पद पर रहते हुए वे एयरपोर्ट परियोजना और इसके संचालन में निरंतर सहयोग प्रदान करेंगे. इस संबंध में डेनियल बिर्चर, जो यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन हैं, ने कहा कि मार्च 2026 में प्रधानमंत्री द्वारा एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद प्राथमिकता जल्द से जल्द संचालन शुरू करने की है.
प्रोजेक्ट संभालने का 20 साल से ज़्यादा का अनुभव
नीतू समरा इस परियोजना से पहले से जुड़ी रही हैं. वह 2021 से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड में मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) के रूप में काम कर रही थीं. उन्हें फाइनेंस, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और बड़े प्रोजेक्ट संभालने का 20 साल से ज़्यादा का अनुभव है. एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में उन्होंने फाइनेंशियल प्लानिंग, निवेशकों से समन्वय, आर्थिक ढांचे और ऑपरेशनल तैयारी में अहम भूमिका निभाई है. अब अंतरिम CEO के तौर पर उनकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि एयरपोर्ट सभी नियमों और सुरक्षा मानकों को पूरा करे और संचालन की मंजूरी समय पर मिल सके.
हालांकि, उनका यह पद अस्थायी है. लेकिन आने वाले समय में उनके कामकाज से यह तय हो सकता है कि भविष्य में नेतृत्व को लेकर क्या फैसला लिया जाएगा. उनकी नियुक्ति को एक स्थिर और भरोसेमंद कदम माना जा रहा है, ताकि एयरपोर्ट का काम बिना रुकावट आगे बढ़ सके. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली के मौजूदा एयरपोर्ट पर दबाव कम होने और उत्तर भारत को एक नया बड़ा एयर हब मिलने की उम्मीद है. ऐसे में इस चरण पर किसी भी तरह की देरी या प्रशासनिक अड़चन का असर पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और विकास पर पड़ सकता है.
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